एनसीआर में प्रदूषण से निपटने के लिए राज्यों की संयुक्त रणनीति, गैर-अनुरूप प्रदूषणकारी उद्योगों पर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति होगी लागू

WhatsApp Channel Join Now
एनसीआर में प्रदूषण से निपटने के लिए राज्यों की संयुक्त रणनीति, गैर-अनुरूप प्रदूषणकारी उद्योगों पर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति होगी लागू


नई दिल्ली, 03 सितंबर (हि.स.)। राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में सर्दियों के दिनों में दमघोटू प्रदूषण को कम करने के लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने सात महीनों को एक विशेष एक्शन प्लान बनाया है। यह योजना के तहत निर्धारित किए गए उपाय़ों को सितंबर माह से अगले साल मार्च तक चलाया जाएगा। इन उपायों में वाहनों के प्रदूषण को कम करने के लिेए सार्वजनिक वाहनों के इस्तेमाल, प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों को बंद करना, पराली जलाने वालों पर कार्रवाई के साथ जागरुकता फैलाने का सघन कार्यक्रम शामिल है। इसी सिलसिले में गुरुवार को मंत्रालय में एनसीआर में आने वाले सभी राज्यों के एक्श प्लान की समीक्षा की गई। इस बैठक में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव भी मौजूद रहे। बैठक में प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ जनभागीदारी, हितधारकों की भागीदारी और व्यवहार में बदलाव पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में भूपेन्द्र यादव ने बताया कि पिछले एक वर्ष में एनसीआर के विभिन्न नगर निकायों की वायु गुणवत्ता प्रबंधन योजनाओं और उनके क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए 25 से अधिक बैठकें की गई हैं। इन बैठकों के बाद राज्यों ने प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग कार्ययोजनाएं तैयार की हैं।

राज्यों की कार्ययोजनाओं का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण से निपटने के प्रयासों में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने सूचना, शिक्षा एवं संचार गतिविधियों तथा व्यवहार परिवर्तन से जुड़ी मुहिम को जमीनी स्तर तक ले जाने और सभी संबंधित पक्षों को इसमें शामिल करने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि एनसीआर में वायु प्रदूषण के खिलाफ अभियान को अधिक प्रभावी बनाने के लिए राज्यों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। विभिन्न राज्यों द्वारा प्रस्तावित प्रचार प्रसार की गतिविधियों को भी समन्वित तरीके से संचालित करने की जरूरत बताई गई, ताकि इनका व्यापक प्रभाव हो सके।

मंत्री ने सुझाव दिया कि कृषि, पर्यावरण और शहरी विकास से जुड़े केंद्रीय मंत्री अपने-अपने राज्य समकक्षों के साथ बैठकें करें, ताकि वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए संयुक्त रणनीति तैयार की जा सके।

पीयूसी सर्टिफिकेट के लिए किया जाएगा संपर्कनए एक्शन प्लान के तहत हरियाणा, उत्तरप्रदेश में गाड़ी मालिकों को प्रदूषण की जांच कराने के लिए संपर्क किया जाएगा। इसके लिए राज्यों ने हफ्ते से लेकर महीने का टारगेट तय किया है। इससे प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों की निगरानी हो सकेगी।

प्रदूषण हॉटस्पॉट पर विशेष फोकस

भूपेंद्र यादव ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को निर्देश दिया कि वे चिह्नित प्रदूषण हॉटस्पॉट पर विशेष ध्यान दें और उनके समाधान के लिए व्यावहारिक एवं प्रभावी कार्ययोजनाएं तैयार करें।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गैर-अनुरूप और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जानी चाहिए। उल्लंघन और लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय करने के साथ-साथ नियमों का पालन नहीं करने वाले हितधारकों को सार्वजनिक रूप से चिन्हित करने जैसे कदम उठाने पर भी जोर दिया गया।

मंत्री ने कहा कि केवल आईईसी और जागरूकता अभियान से प्रदूषण की समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए प्रभावी क्रियान्वयन और सख्त प्रवर्तन भी जरूरी है।

उन्होंने बताया कि सितंबर में केंद्रीय मंत्री स्तर पर एक और समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें राज्यों द्वारा उठाए गए कदमों और उनकी प्रगति का आकलन किया जाएगा। केंद्र सरकार ने एनसीआर के राज्यों को वायु गुणवत्ता प्रबंधन के प्रयासों में हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।

बैठक में पर्यावरण मंत्रालय के सचिव, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के अध्यक्ष तथा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के पर्यावरण विभागों एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा पंजाब के कृषि मंत्री एवं कृषि सचिव तथा पर्यावरण सचिव और राजस्थान के अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं पर्यावरण सचिव ने भी बैठक में हिस्सा लिया।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

Share this story