उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष और गृहमंत्री ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर बुनकरों को दी शुभकामनाएं
नई दिल्ली, 07 अगस्त (हि.स.)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय गृह एवं सहकारितामंत्री अमित शाह समेत अनेक नेताओं ने शुक्रवार को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर देश के सभी बुनकरों को हार्दिक शुभकामनाएं दी।
उपराष्ट्रपति ने एक्स पर कहा, भारत की हथकरघा परंपरा एक जीवंत विरासत है जो कलाकारी, मजबूती और पीढ़ियों से चली आ रही कारीगरी से बुनी गई है। इस अवसर पर, हम उन बुनकरों और कारीगरों को सलाम करते हैं जिनकी लगन इस अनमोल विरासत को ज़िंदा रखती है, साथ ही टिकाऊ रोजगार पैदा करती है और ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाती है। हाथ से बुनी हर चीज हमारी संस्कृति की समृद्धि और आत्मनिर्भरता की भावना को दर्शाती है। हथकरघा उत्पादों को चुनकर, स्थानीय कारीगरों का समर्थन करके और 'वोकल फ़ॉर लोकल' तथा 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन को मजबूत करके उनके अमूल्य योगदान का जश्न मनाएं।
ओम बिरला ने कहा कि 'राष्ट्रीय हथकरघा दिवस' पर देश भर के बुनकरों के श्रम, कौशल और देश की सदियों पुरानी विरासत का सम्मान। कोटा डोरिया जैसे अद्भुत हथकरघा उत्पाद हमारी सांस्कृतिक समृद्धि और आत्मनिर्भर भारत के सशक्त प्रतीक हैं। उन्होंने हथकरघा अपनाने, स्थानीय बुनकरों का साथ निभाने और अपनी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आइए, आज देश के सभी बुनकरों का सम्मान करें, भारत की सदियों पुरानी बुनाई परंपराओं को संजोकर रखें और गर्व के साथ हथकरघा उत्पादों को चुनकर वोकल फॉर लोकल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराएं।
शाह ने कहा कि भारत का हथकरघा क्षेत्र, जो स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से जुड़ा था, भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविधता का प्रतीक है। हथकरघा बुनाई की कला को संरक्षित करने और इसे एक नया आयाम देने के लिए, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'राष्ट्रीय हथकरघा दिवस' की शुरुआत की। इसके अलावा, वैश्विक व्यापार समझौतों और घरेलू सहयोग के माध्यम से बुनकरों के लिए नए अवसर पैदा करके, मोदी सरकार इस क्षेत्र को बढ़ावा दे रही है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्गमंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि हर हथकरघा बुनाई में भारत की आत्मा बसी है। इसे हुनर, परंपरा और पीढ़ियों के समर्पण के साथ बुना जाता है। आज उन कारीगरों का सम्मान करते हैं जिनकी कलाकारी देश की सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध करती है और अनगिनत लोगों की आजीविका का सहारा बनती है।
केंद्रीय कपड़ामंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि हथकरघा केवल वस्त्र निर्माण का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, उत्कृष्ट शिल्पकला और लाखों बुनकर परिवारों की आजीविका का सशक्त आधार है। प्रत्येक हथकरघा उत्पाद देश के बुनकरों के कौशल, समर्पण और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का प्रतीक है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस हमारी विरासत पर गर्व करने, बुनकरों के योगदान का सम्मान करने और भारतीय हथकरघा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के संकल्प को और मजबूत करने का अवसर है।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

