नैनोमेडिसिन से निष्क्रिय हो सकते हैं कैंसर के प्रमुख कारक

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नैनोमेडिसिन से निष्क्रिय हो सकते हैं कैंसर के प्रमुख कारक


नई दिल्ली, 03 जून (हि.स.)। पुणे के वैज्ञानिकों ने जीन साइलेंसिंग की एक ऐसी रणनीति विकसित की है, जो स्तन कैंसर में ट्यूमर को प्रभावी ढंग से नियंत्रित कर सकती है। यह अगली पीढ़ी की सटीक नैनोमेडिसिन के रूप में सामने आई है। नैनोमेडिसिन में प्रगति तेजी से ऐसी सटीक रणनीतियों की ओर बढ़ रही है, जो कैंसर पैदा करने वाले जीन को सीधे निष्क्रिय करती हैं और साथ ही प्रणालीगत विषाक्तता को कम करती हैं।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान, पुणे के अगरकर अनुसंधान संस्थान (एआरआई) के वैज्ञानिकों ने स्तन कैंसर में लक्षित जीन थेरेपी के लिए एक नवीन जैव-अपघटनीय नैनोकैरियर प्लेटफॉर्म प्रस्तुत किया है।

एडवांस्ड हेल्थकेयर मैटेरियल्स में हाल ही में प्रकाशित यह शोध, स्तन कैंसर में प्रमुख जीवन रक्षा मार्गों के लक्षित जीन साइलेंसिंग में नई अंतर्दृष्टि प्रदान करता है, जिससे कुशल ट्यूमर लक्ष्यीकरण और दमन संभव होता है। यह अधिक प्रभावी और सुरक्षित नैनोमेडिसिन-आधारित उपचार विकसित करने के लिए एक आशाजनक रणनीति प्रदान करता है।

यह प्रणाली जैव-अपघटनीय मेसोपोरस सिलिका नैनोकणों पर आधारित है।

शोधकर्ताओं ने प्रोटामिन बायोपोलीमर और एमयूसी-1-विशिष्ट एप्टामर के साथ नैनोकैरियर को क्रियाशील बनाकर, स्तन कैंसर कोशिकाओं पर एमयूसी-1 रिसेप्टर्स की अति-अभिव्यक्ति का लाभ उठाते हुए, ट्यूमर को सटीक रूप से लक्षित किया। यह लक्ष्यीकरण रणनीति पारंपरिक उपचारों की एक प्रमुख सीमा, यानी गैर-लक्षित प्रभावों को कम करते हुए, कोशिकीय अवशोषण को काफी हद तक बढ़ाती है। नीलाद्री हलदर, राजकुमार सामंता, सुरजीत पात्रा, देवयानी सेंगर, सचिन जाधव और वीरेंद्र गजभिये की टीम द्वारा किए गए अध्ययन का एक प्रमुख पहलू दोहरे जीन-साइलेंसिंग दृष्टिकोण है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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