मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच 2000 मेगावॉट पीक पॉवर खरीद के लिए एमओयू

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मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच 2000 मेगावॉट पीक पॉवर खरीद के लिए एमओयू


मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच 2000 मेगावॉट पीक पॉवर खरीद के लिए एमओयू


- पूरक विद्युत मांग का मिलेगा लाभ, करीब 14 हजार करोड़ रुपये के निवेश की संभावना

भोपाल, 21 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश ने अपनी अलग-अलग मौसमी विद्युत मांग का लाभ उठाते हुए बिजली संसाधनों के बेहतर उपयोग और खरीद लागत में कमी की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (एमपी पीएमसीएल) और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपी पीसीएल) के बीच पूरक विद्युत खरीद तथा दीर्घकालिक फर्म पावर बैंकिंग व्यवस्था के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर शुक्रवार को लखनऊ में हस्ताक्षर किए गए।

इस पहल के तहत दोनों राज्यों में 2000 मेगावॉट पीक पॉवर क्षमता की प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया से खरीद शुरू करने पर सहमति बनी है। एमओयू पर एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी के मुख्य महाप्रबंधक (गैर-पारंपरिक ऊर्जा) जी.एस. खनूजा और उत्तर प्रदेश पॉवर कॉरपोरेशन के निदेशक (प्लानिंग) दीपक रैजादा ने हस्ताक्षर किए।

दोनों राज्यों की अलग-अलग मांग बनेगी अवसर

इस अवसर पर बताया कि एमओयू का आधार दोनों राज्यों में बिजली की मौसमी मांग का अलग-अलग होना है। मध्य प्रदेश में अक्टूबर से मार्च के दौरान रबी सीजन में कृषि क्षेत्र की बिजली मांग बढ़ती है, जबकि उत्तर प्रदेश में मई से सितंबर के बीच खरीफ सीजन और गर्मियों में बिजली की मांग अधिक रहती है। मांग के इस पूरक स्वरूप से एक राज्य के कम मांग वाले समय में उपलब्ध अतिरिक्त बिजली का दूसरे राज्य की अधिक मांग वाले समय में बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। इस व्यवस्था से उत्पादन क्षमता का अधिकतम उपयोग करने के साथ ही दोनों राज्यों को महंगी अल्पकालिक बिजली खरीद पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

2000 मेगावाट पीक पावर खरीद की तैयारी

एमओयू के तहत दोनों राज्यों ने 2000 मेगावॉट पीक पॉवर क्षमता की प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के माध्यम से खरीद की दिशा में प्रक्रिया शुरू करने पर सहमति दी है। प्रस्तावित मॉडल से विद्युत संसाधनों की साझा उपयोगिता बढ़ेगी, उत्पादन परिसंपत्तियों का बेहतर इस्तेमाल होगा तथा भविष्य की बिजली जरूरतों के लिए दीर्घकालिक संसाधन पर्याप्तता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

इस पहल से बिजली एवं नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में करीब 14 हजार करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। इससे नई विद्युत एवं ऊर्जा अवसंरचना के विकास, रोजगार के अवसरों और स्वच्छ ऊर्जा क्षमता के विस्तार को भी गति मिलने की उम्मीद है।

फर्म पावर बैंकिंग से जरूरत के समय मिलेगा अतिरिक्त बिजली संसाधन

एमओयू का एक महत्वपूर्ण हिस्सा दीर्घकालिक फर्म पावर बैंकिंग व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में काम करना है। इसके तहत जिस राज्य में कम मांग के समय अतिरिक्त बिजली उपलब्ध होगी, उसे दूसरे राज्य को उसके अधिक मांग वाले समय में उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे बिजली संसाधनों का वर्षभर बेहतर उपयोग, ग्रिड में लचीलापन, ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

पावर बैंकिंग व्यवस्था से दोनों राज्यों को अपने-अपने कम मांग वाले मौसम में उपलब्ध बिजली संसाधनों का बेहतर उपयोग करने का अवसर मिलेगा। इससे उत्पादन क्षमता के कम उपयोग की स्थिति घटेगी और महंगी अल्पकालिक बिजली खरीद की आवश्यकता भी कम हो सकेगी।

उपभोक्ताओं को भी मिलेगा लाभ

इस सहयोग का सीधा उद्देश्य बिजली खरीद की लागत को तर्कसंगत बनाना और उपभोक्ताओं को अधिक किफायती एवं विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराना है। उपलब्ध उत्पादन क्षमता के बेहतर उपयोग और दोनों राज्यों की पूरक मांग के समन्वय से मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश को संयुक्त रूप से बिजली खरीद लागत में कमी की उम्मीद है।

यह पहल राष्ट्रीय स्तर पर संसाधन पर्याप्तता, नवीकरणीय ऊर्जा के अधिकतम एकीकरण और उपभोक्ताओं को किफायती एवं भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराने के लक्ष्यों के अनुरूप है। दोनों राज्यों के बीच सहयोग का यह मॉडल भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी अंतरराज्यीय बिजली खरीद और पावर बैंकिंग की नई राह खोल सकता है।

एमओयू को दोनों राज्यों के बीच सहकारी संघवाद, विद्युत संसाधनों के कुशल उपयोग और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों की साझा योजना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल बिजली क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि देश के स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा संक्रमण को भी मजबूती मिलेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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