उज्जैन के महाकाल मंदिर में कैरेटमीटर मशीन से परखी जाएगी दान में मिले सोने-चांदी की शुद्धता

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उज्जैन के महाकाल मंदिर में कैरेटमीटर मशीन से परखी जाएगी दान में मिले सोने-चांदी की शुद्धता


उज्जैन, 18 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में दान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब मंदिर में आने वाले बहुमूल्य आभूषणों की शुद्धता जांचने के लिए अत्याधुनिक कैरेटमीटर मशीन 'एक्सआरएफ' (एक्स-रे फ्लोरेसेंस) का उपयोग किया जाएगा।

महाकाल मंदिर की उप प्रशासक एवं डिप्टी कलेक्टर सिम्मी यादव ने शनिवार को बताया कि मंदिर प्रबंध समिति ने सीएसआर फंड के माध्यम से करीब 15 लाख रुपये की लागत से यह अत्याधुनिक कैरेटमीटर मशीन महाराष्ट्र से मंगवाई है। मशीन मंदिर परिसर में पहुंच चुकी है और आवश्यक तैयारियां पूरी होने के बाद सोमवार से इसका संचालन शुरू कर दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि मंदिर में दान स्वरूप प्राप्त होने वाले सोने और चांदी के आभूषणों की शुद्धता कैरेटमीटर मशीन से परखी जाएगी। दानदाता की मौजूदगी में ही धातु की शुद्धता की जांच होगी, जिससे दान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहेगी। इस मशीन से दान में मिले सोने-चांदी की गुणवत्ता और कैरेट का पता कुछ ही मिनटों में लगाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि इस पहल के साथ महाकाल मंदिर देश के उन चुनिंदा मंदिरों में शामिल हो जाएगा, जहां दान में मिलने वाले बहुमूल्य आभूषणों के परीक्षण के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।

महाकाल मंदिर में अभी तक दान में प्राप्त सोने-चांदी की वस्तुओं को सोने जैसी, चांदी जैसी लिखकर कोठार में जमा कर लिया जाता है। बाद में स्वर्णकार से इसका परीक्षण कराया जाता है। कई बार कीमती धातु खोटी तथा कम शुद्धता की निकल जाती है। काफी दिन बीत जाने से समिति दानदाता को इससे अवगत भी नहीं करा पाती। प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होने के कारण अविश्वास भी पनपता है।

अब नई मशीन लगने के बाद यह प्रक्रिया अधिक सटीक और प्रमाणिक हो जाएगी। मंदिर समिति ने यह निर्णय देश के कई प्रमुख मंदिरों में दान के नाम पर नकली या कम शुद्धता वाले सोने-चांदी के आभूषण मिलने के मामलों को देखते हुए लिया है। समिति का मानना है कि कैरेटमीटर मशीन से जांच होने पर दानदाता का विश्वास और मजबूत होगा तथा मंदिर में दान प्राप्ति की प्रक्रिया भी पारदर्शी तथा प्रामाणिक बनी रहेगी।

समिति ने बताया कि इस मशीन को चौबीस घंटे वतानुकूलित कक्ष में रखना अनिवार्य है, इसलिए कोठार में छोटा कमरा तैयार कराया जा रहा है। कैरेट मीटर मशीन एक्स-रे बीम का उपयोग करती है। यह बीम जब धातु पर पड़ते हैं, तो धातु के परमाणु उत्तेजित हो जाते हैं और ऊर्जा छोड़ते हैं, जिससे मशीन कुछ ही सेकंड में सोने, चांदी की वास्तविक शुद्धता बता देते हैं। धातु परीक्षण अधिकतम तीस सेकंड में हो जाता है। टेस्टिंग के दौरान आभूषण को किसी प्रकार का कोई नुकसान भी नहीं होता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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