एनीमिया मुक्त भारत अभियान में मध्य प्रदेश को मिले दो राष्ट्रीय सम्मान

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एनीमिया मुक्त भारत अभियान में मध्य प्रदेश को मिले दो राष्ट्रीय सम्मान


- आईएफए अनुपूरण में देश में तृतीय स्थान, उत्कृष्ट आईईसी प्रदर्शन के लिए भी मिला राष्ट्रीय सम्मान

भोपाल, 12 अगस्त (हि.स.)। एनीमिया मुक्त भारत (एएमबी) अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में मध्य प्रदेश को दो अलग-अलग श्रेणियों में राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं।

जनसम्पर्क अधिकारी अंकुश मिश्रा ने बुधवार को बताया कि मध्य प्रदेश को सभी छह लक्षित लाभार्थी समूहों में आयरन एवं फोलिक एसिड (आईएफए) अनुपूरण के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए देश में तृतीय स्थान मिला है, वहीं एनीमिया नियंत्रण एवं जन-जागरूकता से संबंधित उत्कृष्ट आईईसी सामग्री के लिए “बेस्ट आईईसी डिस्प्ले” सम्मान प्रदान किया गया है।

सभी छह लाभार्थी समूहों तक आईएफए अनुपूरण की प्रभावी पहुंच

उन्होंने बताया कि एनीमिया मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत मध्य प्रदेश द्वारा एनीमिया की रोकथाम के लिए जीवन-चक्र दृष्टिकोण अपनाया गया है। इसके तहत जीवन-चक्र के विभिन्न चरणों में आने वाले सभी छह निर्धारित लाभार्थी समूहों तक निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार आईएफए अनुपूरण पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

प्रदेश में 6–59 माह के बच्चों को आईएफए सिरप, 5–9 वर्ष के बच्चों को आईएफए की गुलाबी गोली, 10–19 वर्ष के किशोर-किशोरियों को आईएफए की नीली गोली तथा 20–49 वर्ष की प्रजनन आयु की महिलाओं को आईएफए की लाल गोली उपलब्ध कराई जाती है। इसी प्रकार गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को भी निर्धारित अवधि एवं प्रोटोकॉल के अनुसार आईएफए अनुपूरण सुनिश्चित किया जा रहा है। इस प्रकार शैशवावस्था से लेकर किशोरावस्था, प्रजनन आयु, गर्भावस्था एवं स्तनपान की अवधि तक एनीमिया की रोकथाम के लिए निरंतरता आधारित दृष्टिकोण अपनाया गया है।

आईएफए अनुपूरण की पहुंच को स्वास्थ्य संस्थाओं तक सीमित न रखते हुए समुदाय एवं विद्यालय आधारित सेवा प्रदायगी तंत्र से भी जोड़ा गया है। स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले के साथ विद्यालयों, आंगनवाड़ी केन्द्रों एवं अन्य सामुदायिक प्लेटफॉर्म के माध्यम से पात्र हितग्राहियों तक IFA की नियमित उपलब्धता और सेवन सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही छूटे हुए लाभार्थियों की पहचान, आवश्यक फॉलो-अप तथा कार्यक्रम की प्रगति की सतत मॉनिटरिंग पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

नियमित सेवन और जन-जागरूकता पर विशेष जोर

एनीमिया नियंत्रण के लिए केवल आईएफए वितरण ही नहीं, बल्कि उसके नियमित सेवन और अनुपालन (Compliance) को भी महत्वपूर्ण माना गया है। इसी उद्देश्य से लाभार्थियों एवं उनके परिवारों में एनीमिया के कारणों, स्वास्थ्य एवं पोषण पर इसके प्रभाव, आयरन युक्त आहार तथा आईएफए के नियमित सेवन के महत्व के संबंध में व्यापक जन-जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

इसी क्रम में राष्ट्रीय कार्यशाला में मध्य प्रदेश की आईईसी सामग्री को “बेहतरीन आईईसी डिस्प्ले” के रूप में सम्मानित किया गया। एनीमिया की रोकथाम, आईएफए अनुपूरण एवं व्यवहार परिवर्तन से संबंधित राज्य की आईईसी सामग्री में सरल, प्रभावी एवं नवाचारपूर्ण संचार माध्यमों के उपयोग को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया। इन प्रयासों के माध्यम से एनीमिया नियंत्रण के संदेशों को समुदाय तक सहज एवं प्रभावशाली तरीके से पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

समन्वित प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता

सभी छह लक्षित लाभार्थी समूहों में आईएफए अनुपूरण के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मध्यप्रदेश को मिला राष्ट्रीय तृतीय पुरस्कार तथा उत्कृष्ट आईईसी प्रदर्शन के लिए प्राप्त सम्मान प्रदेश में एनीमिया नियंत्रण की दिशा में किए जा रहे समन्वित प्रयासों की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, मैदानी स्वास्थ्य अमले, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, विद्यालयों तथा अभियान से जुड़े सभी सहयोगियों के निरंतर प्रयासों, बेहतर समन्वय एवं प्रतिबद्धता से यह परिणाम प्राप्त हुआ हैं। मध्यप्रदेश एनीमिया की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए अंतिम लाभार्थी तक आईएफए अनुपूरण की पहुंच सुनिश्चित करने, नियमित सेवन को बढ़ावा देने और जन-जागरूकता को और प्रभावी बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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