सदानीरा समागमः भोपाल में लोक और विश्व कला का हुआ अद्भुत प्रदर्शन

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सदानीरा समागमः भोपाल में लोक और विश्व कला का हुआ अद्भुत प्रदर्शन


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सदानीरा समागमः भोपाल में लोक और विश्व कला का हुआ अद्भुत प्रदर्शन


भोपाल, 31 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में वीर भारत न्यास द्वारा भारत भवन में आयोजित सदानीरा समागम के पांचवें दिन रविवार को लोक, शास्त्रीय और अंतरराष्ट्रीय कलाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। दिनभर चले सांस्कृतिक आयोजनों में विश्वप्रसिद्ध बैले नाट्य प्रस्तुति ‘स्वान लेक’, निमाड़ी लोकगीतों तथा भरतनाट्यम आधारित नृत्य नाटिका ‘नर्मदे हर हर’ ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में पूर्वरंग मंच पर सुप्रसिद्ध निमाड़ी लोकगायिका मनीषा शास्त्री एवं उनके दल ने निमाड़ अंचल की समृद्ध लोक परंपराओं से जुड़े गीतों की मनोहारी प्रस्तुति दी। लोकधुनों और पारंपरिक गायन के माध्यम से कलाकारों ने जल संरक्षण तथा प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का संदेश दिया। दर्शकों ने प्रस्तुति की मुक्त कंठ से सराहना की। इस अवसर पर वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने कलाकारों का स्वागत सदानीरा समागम के विशेष स्मृति-चिह्न एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर किया।

नर्मदे हर हर में नर्मदा की आध्यात्मिक चेतना का सजीव चित्रण

सांस्कृतिक संध्या के अंतर्गत देश के प्रख्यात भरतनाट्यम कलाकार वैभव आरेकर ने अपनी एकल प्रस्तुति ‘नर्मदे हर हर’ प्रस्तुत दी। अपनी गहन, शांत और भावप्रधान शैली के लिए प्रसिद्ध आरेकर ने नर्मदा नदी की आध्यात्मिक महिमा, सांस्कृतिक विरासत और जीवनदायिनी स्वरूप को शास्त्रीय नृत्य के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया। प्रस्तुति में नृत्य, भाव और संगीत का सुंदर समन्वय देखने को मिला। दर्शकों ने इस प्रस्तुति को विशेष रूप से सराहा।

विश्वप्रसिद्ध बैले स्वान लेक ने बांधा समां

भारत भवन के अंतरंग सभागार में विश्वप्रसिद्ध बैले नाट्य प्रस्तुति ‘स्वान लेक’ का मंचन हुआ। द इंपीरियल फर्नांडो बैले कंपनी द्वारा प्रस्तुत इस कालजयी कृति ने प्रेम, त्याग, विश्वास और जादू की भावनाओं को मंच पर जीवंत कर दिया। प्रस्तुति की कोरियोग्राफी महान बैले आचार्य मारियस पेटीपा की मूल रचना पर आधारित थी, जिसे फर्नांडो अगुइलेरा ने नए स्वरूप में प्रस्तुत किया। निर्देशन फर्नांडो अगुइलेरा और रफी खान ने किया, जबकि संगीत महान रूसी संगीतकार प्योत्र इलाइची टचैकोवस्की का था।

कथा राजकुमारी ओडेट की है, जिसे दुष्ट जादूगर रोथबार्ट के श्राप के कारण हंस का जीवन जीना पड़ता है। झील के किनारे राजकुमार सीगफ्रीड से उसकी भेंट होती है और दोनों के बीच प्रेम जन्म लेता है। सच्चे प्रेम की शक्ति से श्राप को तोड़ने के संघर्ष की यह कहानी दर्शकों को भावनात्मक यात्रा पर ले गई। प्रस्तुति में ओडेट की भूमिका पेनेलोप स्केरियन, प्रिंस सीगफ्रीड की भूमिका दीपक तथा रोथबार्ट की भूमिका प्रतीक कपसाइम ने निभाई। इंटरनेशनल फाइन बैले कंपनी के कलाकारों के उत्कृष्ट नृत्य, आकर्षक मंच सज्जा और प्रभावशाली अभिनय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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