'भारत एआई के क्रियान्वयन में पहुंचा दुनिया में तीसरे स्थान पर'
–एमपी रीजनल एआई इम्पैक्ट कांफ्रेंस–2026
भोपाल, 15 जनवरी (हि.स.)। भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई अब वर्तमान समय की सबसे बड़ी परिवर्तनकारी शक्ति बन चुकी है। भारत एआई के क्रियान्वयन में दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।
इस बदलाव में देश के युवाओं की ऊर्जा और सरकार की सुनियोजित पहलें निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। इसी कड़ी में गुरुवार को राजधानी भोपाल के ताज लेक फ्रंट में आयोजित ‘मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कांफ्रेंस–2026’ ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत, विशेषकर मध्यप्रदेश, एआई नवाचार और क्रियान्वयन का नया केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
इस सम्मेलन का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत अन्य प्रमुख गणमान्य अतिथियों ने किया, जिसमें केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अपर सचिव और इंडिया एआई के सीईओ अभिषेक सिंह ने भारत की एआई यात्रा, युवाओं की भूमिका तथा सरकारी योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
सीईओ अभिषेक सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आज भारत एआई के क्रियान्वयन के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर है, यह देश की तकनीकी क्षमता और नीति-निर्माण की सफलता को दर्शाता है। भारतीय युवा आज न सिर्फ देश में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी शीर्ष तकनीकी कंपनियों का नेतृत्व कर रहे हैं। यह स्थिति वर्षों की मेहनत, मजबूत शिक्षा व्यवस्था और सरकार द्वारा तैयार किए गए अनुकूल इकोसिस्टम का परिणाम है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किया गया भारत एआई मिशन इस एआई क्रांति की रीढ़ है। यह मिशन सात प्रमुख स्तंभों पर आधारित है, जिनमें अत्यधुनिक कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा और मॉडल्स का विकास, एआई आधारित एप्लीकेशन्स, ट्रस्ट व एथिक्स, फ्यूचर स्किल्स, स्टार्टअप फाइनेंसिंग और इनोवेशन सेंटर शामिल हैं। मिशन के तहत 10,000 जीपीयू का राष्ट्रीय कंप्यूटिंग क्लस्टर विकसित किया जा रहा है, जिससे स्टार्टअप्स, शोध संस्थानों और छात्रों को विश्वस्तरीय संसाधन उपलब्ध होंगे। इसके लिए 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे अगले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की उम्मीद है।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि भारत जल्द ही एक स्वदेशी चैटजीपीटी जैसे एआई प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रहा है, जिसे फरवरी 2026 में लॉन्च किए जाने की तैयारी है। यह प्लेटफॉर्म भारतीय भाषाओं, संस्कृति और डेटा प्राइवेसी को ध्यान में रखकर विकसित किया जाएगा और ओपन-सोर्स होगा, ताकि देश के डेवलपर्स और स्टार्टअप्स इसे अपनी आवश्यकताओं के अनुसार उपयोग कर सकें।
सम्मेलन में यह भी रेखांकित किया गया कि भारत का एआई स्टार्टअप इकोसिस्टम दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वालों में से एक है। देश में पांच हजार से अधिक एआई स्टार्टअप सक्रिय हैं, जो स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, फिनटेक और शासन जैसे क्षेत्रों में नवाचार कर रहे हैं। आईआईटी, आईआईएससी और एनआईटी जैसे संस्थानों से निकलने वाले युवा शोधकर्ता और उद्यमी जेनरेटिव एआई, डीप लर्निंग और कंप्यूटर विजन में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। अभिषेक सिंह ने कहा कि यही युवा भारत को वैश्विक एआई नेतृत्व की ओर ले जा रहे हैं।
इसके साथ ही ‘मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कांफ्रेंस–2026’ में एआई को आम नागरिकों तक पहुंचाने के लिए “भाषिणी” प्लेटफॉर्म को भी सम्मेलन में विशेष रूप से रेखांकित किया गया। यह प्लेटफॉर्म 22 से अधिक भारतीय भाषाओं में एआई आधारित अनुवाद और भाषा सेवाएं उपलब्ध कराता है। इससे सरकारी योजनाओं, डिजिटल सेवाओं और शिक्षा को स्थानीय भाषाओं में सुलभ बनाया जा रहा है। भाषिणी के माध्यम से करोड़ों लोग, जो अंग्रेजी नहीं बोलते, अब एआई तकनीक से जुड़ पा रहे हैं, जिससे डिजिटल समावेशन को नई मजबूती मिली है।
सम्मेलन में मध्यप्रदेश की भूमिका को भी विशेष रूप से सराहा गया। राज्य में एआई डेटा लैब्स, स्किल डेवलपमेंट सेंटर और स्टार्टअप सपोर्ट सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं। भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे शहरों में स्थापित हो रही एआई डेटा लैब्स के माध्यम से हजारों युवाओं को डेटा साइंस और एआई में प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि मध्यप्रदेश को एक उभरते एआई हब के रूप में पहचान मिलेगी।
हालांकि एआई के क्षेत्र में चुनौतियां भी हैं, जैसे डेटा प्राइवेसी, स्किल गैप और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी, लेकिन सरकार की नीतियां और निजी क्षेत्र की भागीदारी इन समस्याओं के समाधान की दिशा में काम कर रही हैं। डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, स्किल इंडिया और भारतएआई मिशन जैसी पहलें इन चुनौतियों से निपटने का आधार तैयार कर रही हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी

