मप्र के रामनगर में दो दिवसीय “आदि उत्सव 2026” शुक्रवार से, जनजातीय संस्कृति और गोंडवाना विरासत का होगा भव्य संगम
मंडला, 14 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मंडला जिले की ऐतिहासिक नगरी रामनगर में से दो दिवसीय “आदि उत्सव 2026” का आयोजन किया जा रहा है। केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम शुक्रवार, 15 मई को इसका शुभारंभ करेंगे। गोंडकालीन राजाओं की राजधानी रहे रामनगर में आयोजित यह उत्सव जनजातीय संस्कृति, गोंडवाना इतिहास, पारंपरिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का भव्य उत्सव होगा।
जनसम्पर्क अधिकारी राहुल वासनिक ने गुरुवार को जानकारी देते हुए बताया कि आदि उत्सव का आयोजन ऐतिहासिक स्थल चौगान मढ़िया एवं रामनगर महल परिसर में किया जाएगा। कार्यक्रम में देशभर से जनजातीय समाज के प्रतिनिधि, राज परिवारों के सदस्य, लोक कलाकार एवं संस्कृति प्रेमी शामिल होंगे।
उन्होंने बताया कि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम 15 मई को ओडिशा के झारसुगुड़ा एयरपोर्ट से चार्टर्ड विमान द्वारा सुबह 10 बजे जबलपुर एयरपोर्ट आएंगे। इसके बाद यहाँ से सुबह 10:20 बजे सड़क मार्ग से मंडला जिले के रामनगर दोपहर 12 बजे पहुंचकर “आदि उत्सव” कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे। कार्यक्रम के पश्चात अपराह्न 4:30 बजे वापस जबलपुर के लिए रवाना होंगे। इसके बाद वे जबलपुर एयरपोर्ट से नई दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगे।
पहले दिन होगा पारंपरिक शुभारंभ
जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, 15 मई को प्रथम दिवस के कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 11 बजे चौगान मढ़िया रामनगर में ध्वजारोहण एवं पारंपरिक आदि उत्सव शुभारंभ के साथ होगी। इसके पश्चात मेगा स्वास्थ्य शिविर का उद्घाटन, स्मारक स्थल पर झंडा पूजन, नर्मदा पूजन तथा प्रदर्शनी का अवलोकन किया जाएगा। कार्यक्रम के अंतर्गत महल परिसर में विशेष पूजन-अर्चन भी आयोजित होगा, जिसमें जनजातीय परंपराओं और गोंडवाना संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी।
मंचीय कार्यक्रम में होगा सम्मान समारोह
दोपहर 12:20 बजे से आयोजित मंचीय कार्यक्रम में दीप प्रज्वलन एवं मुख्य अतिथियों का स्वागत किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान आदिवासी रियासतों के प्रतिनिधियों, विशिष्ट आदिवासी प्रतिभाओं एवं विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धि प्राप्त करने वाले व्यक्तियों का सम्मान किया जाएगा। साथ ही पंडा-पुजारियों का सम्मान भी किया जाएगा। इसके पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां होंगी तथा मुख्य अतिथियों का उद्बोधन आयोजित किया जाएगा।
रात्रि तक होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम
दोपहर 3 बजे से आदि उत्सव के दूसरे चरण की शुरुआत होगी, जिसमें देर रात्रि तक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। कार्यक्रम में उत्तर-पूर्व भारत, मध्य भारत एवं प्रदेश स्तरीय सांस्कृतिक दलों की विशेष प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इसके अलावा स्थानीय लोकनृत्य दलों द्वारा पारंपरिक जनजातीय नृत्य एवं लोक संस्कृति की जीवंत प्रस्तुतियां दी जाएंगी। गोंड, बैगा एवं अन्य जनजातीय समुदायों की कला, संगीत और परंपराओं का अनूठा प्रदर्शन उत्सव की विशेष पहचान होगा।
आदि उत्सव में शामिल होंगे विभिन्न राज परिवारों के सदस्य
आयोजन में विभिन्न राज परिवारों के सदस्य उपस्थित रहकर गोंडवाना की सांस्कृतिक धरोहर और ऐतिहासिक परंपराओं को सम्मान देंगे।कार्यक्रम में शामिल होने वाले प्रमुख अतिथियों में महेंद्र प्रताप सिंह जूदेव, कोशलेंद्र सिंह जूदेव, धरमवीर सिंह जूदेव, रामकुमार ठाकुर, विरेंद्र सिंह राज, योगेश्वर राज, विरेंद्र शाह, देवेंद्र बहादुर सिंह, योगेंद्र सिंह बाबा, कमलेश प्रताप सिंह, आदित्येंद्र बहादुर सिंह, चेतन प्रताप सिंह, नवेंद्र सिंह तेकाम, युवराज शरण सिंह, देवेंद्र प्रताप सिंह, राजा गुलाब सिंह, कुंवर सिंह, निर्मल राजा भरई, मुकेश बम्होरी, बी.के. शाह, धर्मवीर सिंह, सुजान सिंह तथा विक्रम सिंह प्रमुख रूप से शामिल रहेंगे।
16 मई को संगोष्ठी में शामिल होंगी प्रदेश की जानी-मानी हस्तियाँ
आदि उत्सव के दूसरे दिन छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका भी शामिल होंगे। दूसरे दिन महल परिसर के अंदर आयोजित की जाने वाली संगोष्ठी में जनजातीय साहित्य तथा ऐतिहासिक विषयों के जानकार प्रसिद्ध वक्ता शामिल होंगे। इसमें शामिल होने वाले प्रमुख व्यक्तियों में प्रोफेसर डॉ. सचिन तिवारी, सिविल सेवा एवं इतिहासकार दीपक द्विवेदी, प्रो. एवं विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद सिंह राणा, प्राचार्य डॉ. अलकेश चतुर्वेदी, तदर्थ विद्वान डॉ. गोविंद पांडे, असिस्टेंट प्रो. चंद्रेश मरावी, डॉ. ज्योति सिंह, डॉ. केएल धुर्वे, डॉ. गौरीसिंह परते, जिला पंचायत अध्यक्ष संजय कुशराम, सामाजिक कार्यकर्ता सोहन सिंह मरावी, रिसर्च स्कॉलर अर्चना मरकाम, एसोसिएट प्रो. डॉ. बीएल झारिया एवं कलाकार सतपाल सिंह पंद्राम सत्य प्रधान शामिल हैं। कार्यक्रम को भव्य और यादगार बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। आदि उत्सव को गोंडवाना संस्कृति, इतिहास और जनजातीय अस्मिता के महापर्व के रूप में देखा जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

