रक्षाबंधन पर देश में सबसे पहली राखी बाबा महाकाल को बंधेगी, सवा लाख लड्डुओं का लगेगा महाभोग

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रक्षाबंधन पर देश में सबसे पहली राखी बाबा महाकाल को बंधेगी, सवा लाख लड्डुओं का लगेगा महाभोग


रक्षाबंधन पर देश में सबसे पहली राखी बाबा महाकाल को बंधेगी, सवा लाख लड्डुओं का लगेगा महाभोग


उज्जैन, 26 अगस्त (हि.स.)। देशभर में रक्षाबंधन का पर्व आगामी 28 अगस्त को मनाया जाएगा। इस अवसर पर परम्परा के अनुसार देश में सबसे पहले मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल को राखी अर्पित की जाएगी। इस अवसर पर बाबा महाकाल को सवा लाख लड्डुओं का भोग लगाया जाएगा। रक्षाबंधन के लिए महाकालेश्वर मंदिर में खास तैयारियां की गई हैं।

मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बुधवार को बताया कि श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा। देश में हिन्दू धर्म से जुड़े सभी त्योहार सबसे पहले महाकाल मंदिर में मनाए जाते हैं। श्रावण पूर्णिमा पर श्री महाकालेश्वर मंदिर में पुजारी परिवार की ओर से भगवान महाकाल को राखी बांधने की परंपरा है। इसके साथ ही रक्षाबंधन के दिन भस्म आरती में बाबा महाकाल को बाबा को बेसन और शुद्ध घी से तैयार सवा लाख लड्डुओं का महाभोग अर्पित किया जाएगा। इसके बाद दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को लड्डू प्रसाद वितरित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि श्रावण मास के अंतिम दिन रक्षाबंधन पर तड़के 3 बजे भस्म आरती में भगवान महाकाल का जल, दूध, दही, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद सूखे मेवों और भांग से बाबा महाकाल का विशेष शृंगार किया जाएगा। इसके बाद पुजारी परिवार की महिलाओं द्वारा तैयार की गई विशेष राखी भगवान महाकाल को अर्पित की जाएगी। मान्यता के अनुसार भगवान महाकाल कालजयी हैं और भद्रा या मुहूर्त के बंधन से परे माने जाते हैं। इसलिए सबसे पहले बाबा महाकाल को राखी अर्पित कर सृष्टि के कल्याण की कामना की जाएगी।

आठ दिन से तैयार हो रही 2 फीट की विशेष राखी

वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार पुजारी परिवार की महिलाएं बाबा महाकाल के लिए विशेष रक्षासूत्र तैयार करती हैं। इस बार करीब दो फीट लंबी राखी बनाई जा रही है। इसे रेशम के धागों, स्पंज, आभूषणों और विशेष वस्त्रों से सजाया जा रहा है। पुजारी परिवार की महिलाओं के अनुसार राखी तैयार करने में करीब आठ दिन का समय लगता है। इस दौरान श्रावण माह के उपवास और मंगल गीतों के बीच पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ रक्षासूत्र तैयार किया जाता है।

वहीं, रक्षाबंधन के अवसर पर बाबा महाकाल को लगने वाले सवा लाख लड्डुओं के महाभोग की तैयारियों पंडित राजेश शर्मा, पंडित ओम गुरु और पंडित आकाश सहित पुजारी परिवार की ओर से की जा रही हैं। सवा लाख लड्डुओं के निर्माण में करीब 15 क्विंटल बेसन, 10 क्विंटल शुद्ध घी, 15 क्विंटल शक्कर बूरा और 2 क्विंटल मेवे के साथ इलायची का उपयोग किया जा रहा है। लड्डुओं के निर्माण में सामग्री की शुद्धता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

28 अगस्त को भस्म आरती के दर्शन करने वाले और दिनभर बाबा महाकाल के दरबार में पहुंचने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं को सवा लाख लड्डुओं का महाप्रसाद वितरित किया जाएगा। मंदिर परिसर में रक्षाबंधन को लेकर विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। ऐसी महिलाएं और बहनें, जिनके भाई नहीं हैं, वे भी बाबा महाकाल को अपना भाई मानकर मंदिर पहुंचेंगी और उन्हें रक्षासूत्र बांधेंगी। मान्यता और आस्था से जुड़ी इस परंपरा के चलते रक्षाबंधन के दिन महाकाल मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

भस्म आरती में गणेश स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, भांग-चंदन से हुआ शृंगार

विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार को श्रावण शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का पंचामृत पूजन-अभिषेक कर भांग, चंदन, सिंदूर और आभूषणों से श्री गणेश स्वरूप में आकर्षक शृंगार किया गया।

महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि बुधवार तड़के 3 बजे मंदिर के पट खुलते ही पण्डे पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी भगवान की प्रतिमाओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर फलों के रस से बने पंचामृत को अर्पित कर किया। इसके बाद प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को चांदी का मुकुट और मुंड माला धारण करवाई गई। इसके बाद बाबा महाकाल का भांग से शृंगार करने के साथ ही उन्हें श्री गणेश के स्वरूप मे सजाया गया। शृंगार के बाद बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग को महानिर्वाणी अखाड़े के द्वारा भस्म अर्पित की गई और फिर मेवे, फल और मिठाई का भोग लगाया गया।

भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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