(अपडेट) योग विश्व को हमारी सांस्कृतिक धरोहर का एक अनमोल उपहार है : द्रौपदी मुर्मु

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- राष्ट्रपति ने मप्र के जबलपुर में किया योग, कहा- यह हमारे ऋषियों-मुनियों की हजारों वर्षों की साधना का परिणाम

भोपाल, 21 जून (हि.स.)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि हम भारत की उस महान योग परंपरा का उत्सव मना रहे हैं, जिसने मानवता के लिये स्वस्थ, संतुलित और सार्थक जीवन का मार्ग प्रदान किया। योग विश्व को हमारी सांस्कृतिक धरोहर का एक अनमोल उपहार है। यह हमारे ऋषियों-मुनियों की हजारों वर्षों की साधना का परिणाम है।

राष्ट्रपति मुर्मु रविवार को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि आज भारतभूमि से स्वास्थ्य, संतुलन, शांति और आत्मकल्याण का संदेश विश्व में प्रसारित किया जा रहा है।

मध्य प्रदेश में राष्ट्रपति के मुख्य आतिथ्य में 12वें अंतरराष्ट्रीय याेग दिवस की थीम “योग स्वस्थ आयु के लिए” पर जबलपुर के गैरीसन ग्राउंड में राज्य स्तरीय योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कोलकाता से आयोजित कार्यक्रम का सजीव प्रसारण देखा व सुना। कार्यक्रम की शुरुआत व अंत में राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान किया गया।

योगाभ्यास में प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल समेत अन्य जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी तथा लगभग पांच हजार योग साधकों ने सामूहिक योगाभ्यास में सहभागिता की।

योग, आंतरिक शांति और सामूहिक कल्याण के लिये करता है प्रेरित

कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमारे शास्त्रों में शरीर, मन और आत्मा के संतुलन को जीवन की सफलता का आधार माना गया है। योग उसी संतुलन को स्थापित करने का मार्ग है। ‘योग’ शब्द का अर्थ है जोड़ना- व्यक्ति को स्वयं से, समाज को प्रकृति से और सम्पूर्ण मानवता को व्यापक विश्व चेतना से जोड़ना। योग एक सशक्त माध्यम है, जो हमें आंतरिक शांति, संतुलन और सामूहिक कल्याण की दिशा में आगे बढ़ाता है। आज जब विश्व अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब योग मानवता को शांति, संतुलन, समरसता और सामूहिक कल्याण का मार्ग दिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

योग जीवनशैली का बनता जा रहा है अहम हिस्सा

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में भारत की पहल पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रतिवर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। इस पहल से योग को विश्व कल्याण के एक सशक्त माध्यम के रूप में नई पहचान और व्यापक स्वीकार्यता मिली है। आज दुनिया के अनेक देशों में करोड़ों लोग योग को अपने दैनिक जीवन का अहम हिस्सा बना रहे हैं। योग अब जीवन शैली का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। विदेशों में भी योग के प्रति लोगों का आकर्षण निरंतर बढ़ रहा है, और यह भारत की सांस्कृतिक शक्ति का सशक्त उदाहरण है।

योग बढ़ती आयु में स्वयं को स्वस्थ रखने में सहायक

राष्ट्रपति ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम “योग फॉर हेल्दी एजिंग” है। यह थीम समाज के वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य, सक्रियता, आत्मनिर्भरता और गरिमापूर्ण जीवन में योग की उपयोगिता को रेखांकित करती है। योग बढ़ती आयु में भी व्यक्ति को स्वस्थ, सक्रिय और आत्मनिर्भर बनाए रखने में बहुत सहायक है। योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मन को शांति और भावनात्मक संतुलन प्रदान करता है। आज की व्यस्त दिन चर्या और जीवन शैली से जुड़ी बीमारियां हमारे सामने एक बड़ी चुनौती हैं। इनकी रोकथाम और समग्र स्वास्थ्य के लिए योग एक सरल, प्रभावी और सुलभ उपाय है।

उन्होंने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि भारत सरकार योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए योग शिक्षा, अनुसंधान, प्रशिक्षण और जन-जागरूकता के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। सामूहिक प्रयासों से योग जन-जन तक पहुंचेगा और सामूहिक मानवता के कल्याण का आधार बनेगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सभी नागरिकों को योग को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का संकल्प दिलाया।

योग संतुलित, सरल और आनंदमयी जीवन की है पद्धति : राज्यपाल

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ बनाने का माध्यम ही नहीं, बल्कि यह संपूर्ण जीवन को संतुलित, सरल और आनंदमयी बनाने की पद्धति है। योग ही स्वस्थ तन, प्रसन्न मन और योग बने जीवन का धन है। भारतीय ज्ञान परंपरा ने स्वस्थ जीवन का जो मार्ग दिखाया था, आज पूरी दुनिया उसे अपना रही है। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा भारतीय योग को अंतरराष्ट्रीय सम्मान दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी की दूरदृष्टि और अटूट प्रतिबद्धता से ही योग को पूरी दुनिया में अपनाया गया है।

विश्व कल्याण का आधार है योग : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री डॉ. माेहन यादव ने कहा कि भारत ने योग के रूप में दुनिया को मानव कल्याण का उपहार सौंपा है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा, हमारी आध्यात्मिक चेतना और समृद्ध सनातन संस्कृति का वैश्विक पटल पर परिचय कराया है। प्रधानमंत्री मोदी ने जब वर्ष 2015 में विश्व योग दिवस का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र सभा में रखा तो 175 से ज्यादा देशों ने इसका ऐतिहासिक समर्थन किया था। इस वर्ष सामूहिक योग सत्रों में करीब 30 से 35 करोड़ लोग शामिल हो रहे हैं। दुनिया के करीब 2500 स्थानों पर योगाभ्यास किया, 210 से अधिक दूतावासों ने भी सामूहिक योग में भागीदारी की। मध्य प्रदेश के कोने-कोने को योग से जोड़ने के लिए हर घर योग अभियान सफलतापूर्वक संचालित किया गया है।

देश ने दिया विश्व को वसुधैव-कुटुम्बकम का संदेश

मुख्यमंत्री ने आदि देव शंकर और आष्टांग योग के प्रणेता महर्षि पतंजलि को नमन करते हुए कहा कि यह मध्य प्रदेश का सौभाग्य है कि 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम संस्कारधानी जबलपुर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के मुख्य आतिथ्य में आयोजित हुआ। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति ने सदैव संसार को एक परिवार के रूप में देखा है। हमने कभी भौगोलिक सीमाओं तक अपनी सोच को सीमित नहीं किया है, अपितु विश्व को वसुधैव कुटुम्बकम का अमर संदेश दिया , हमारे ऋषियों ने सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे संतु निरामय: की कामना की।

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश योगियों की तपोस्थली रही है। भगवान श्रीकृष्ण को मध्यप्रदेश की धरती पर योग का ज्ञान प्राप्त हुआ। मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संपन्नता गौरवशाली इतिहास का अभिन्न हिस्सा रही है। योगेश्वर श्रीकृष्ण ने उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण की,यहां उन्होंने 64 कला और 14 विद्याओं का गहन अध्ययन किया, इनमें योग विज्ञान सबसे प्रमुख था। योग भारत की गौरवशाली संस्कृति का प्रतीक है। भारत एक बार फिर दुनिया को अपनी समृद्ध संस्कृति से परिचित करा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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