मप्रः प्रधानमंत्री मोदी के चीता प्रोजेक्ट के चार वर्ष पूर्ण, कूनो में रोशन होंगे हजारों दीप

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मप्रः प्रधानमंत्री मोदी के चीता प्रोजेक्ट के चार वर्ष पूर्ण, कूनो में रोशन होंगे हजारों दीप


मप्रः प्रधानमंत्री मोदी के चीता प्रोजेक्ट के चार वर्ष पूर्ण, कूनो में रोशन होंगे हजारों दीप


- चीता प्रोजेक्ट ने श्योपुर को दिलाई वैश्विक पहचान, प्रधानमंत्री का 17 सितंबर को टिकटोली गेट पर रोशन दीये व्यक्त करेंगे आभार

भोपाल, 16 सितम्बर (हि.स.)। चार वर्ष पहले, 17 सितंबर 2022 को मध्य प्रदेश की धरती पर वन्य जीव संरक्षण के इतिहास का एक नया अध्याय शुरू हुआ था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस दिन अपने जन्मदिवस के अवसर पर श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाए गए चीतों को भारत की धरती पर बसाकर अंतर्महाद्वीपीय चीता परियोजना का शुभारंभ किया था।

प्रधानमंत्री मोदी के जन्म-दिवस और परियोजना के चार वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 17 सितंबर को कूनो के टिकटोली गेट पर वन विभाग के तत्वावधान में हजारों दीप रोशन कर उनके प्रति आभार व्यक्त किया जाएगा। यह आयोजन सेवा संकल्प अभियान के तहत होगा। यह दीपोत्सव उस संकल्प और उपलब्धि का प्रतीक होगा, जिसके माध्यम से भारत में विलुप्त हो चुके चीते फिर अपनी धरती पर विचरण कर रहे हैं। कूनो की धरती पर जन्म लेते शावक और बढ़ती चीता संख्या इस यात्रा की महत्वपूर्ण उपलब्धियों को रेखांकित कर रहे हैं।

दीपों में सजेगा आभार का भाव

जनसम्पर्क अधिकारी केके जोशी ने बुधवार को बताया कि 17 सितंबर को टिकटोली गेट पर जलने वाले हजारों दीप केवल एक आयोजन का हिस्सा नहीं होंगे, बल्कि भारत में चीते की वापसी की इस यात्रा के प्रति आभार और प्रकृति संरक्षण के संकल्प का प्रतीक बनेंगे। कूनो के वनों में फर्राटा भरते चीते, भारत में जन्मे शावक, बढ़ता पर्यटन और श्योपुर की वैश्विक पहचान इस चार वर्ष की यात्रा को नई ऊंचाई देते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के जन्म-दिवस पर कूनो में रोशन होने वाले दीप इसी यात्रा की उपलब्धियों और आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्ध जैव विविधता के संकल्प को उजागर करेंगे।

देश में 52 चीते, कूनो में 49

चीता परियोजना के चार वर्ष पूरे होने के अवसर पर देश में चीतों की संख्या 52 हो गई है। इनमें 49 चीते कूनो नेशनल पार्क और ती चीते गांधी सागर अभयारण्य, मंदसौर में हैं। कुल 52 चीतों में से 32 का जन्म भारत में हुआ है। कूनो का प्राकृतिक वातावरण चीतों के प्रजनन के लिए अनुकूल साबित हुआ है। भारत में जन्मी संतानों ने परियोजना को नई गति दी है और चीता पुनर्स्थापन के प्रयासों को मजबूत आधार मिला है।

ग्लोबल हुई श्योपुर की पहचान, बढ़ रहा पर्यटन

चीता पुनर्बसाहट परियोजना ने श्योपुर को देश और दुनिया में नई पहचान दिलाई है। आज श्योपुर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीता संरक्षण के प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जा रहा है। परियोजना से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिला है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी विकसित हुए हैं।

पर्यटन को और सुविधाजनक बनाने के लिए टिकटोली गेट को प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां कूनो सफारी के लिए जिप्सियां उपलब्ध हैं और ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा संचालित है। शीघ्र ही कूनो वनमंडल, श्योपुर कार्यालय में बुकिंग काउंटर भी शुरू किया जाएगा। पर्यटकों की सुविधा के लिए मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा टिकटोली गेट पर भवनों का निर्माण किया जा रहा है।

प्राकृतिक संपदा से समृद्ध कूनो

विंध्याचल पर्वत श्रृंखला की सुरम्य पहाड़ियों से घिरा कूनो नेशनल पार्क अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। कूनो नदी इसकी खूबसूरती को और बढ़ाती है। इसके चौड़े और सपाट तटों पर धूप सेंकते मगरमच्छ पर्यटकों के लिए रोमांच का अनुभव प्रस्तुत करते हैं। कूनो नेशनल पार्क में पक्षियों की 174 प्रजातियां पाई जाती हैं, जबकि यहां सैकड़ों प्रजातियों के वन्यजीव मौजूद हैं। इनमें पक्षियों की 12 प्रजातियां दुर्लभ श्रेणी में मानी गई हैं। यह समृद्ध जैव विविधता चीता परियोजना के लिए भी अनुकूल प्राकृतिक आधार उपलब्ध कराती है।

वर्षों के प्रयासों के बाद भारत में हुई चीता की वापसी

वर्ष 1952 में भारत से एशियाई चीतों के विलुप्त होने के बाद उन्हें फिर से देश में स्थापित करने के प्रयास जारी रहे। सितंबर 2009 में राजस्थान के गजनेर में चीता विशेषज्ञों की बैठक हुई, जिसमें चीता संरक्षण कोष के डॉ. लोरी मार्कर, स्टीफन जे. ओ'ब्रायन और अन्य विशेषज्ञों ने दक्षिण अफ्रीकी चीतों को भारत लाने की सिफारिश की।

भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के निर्देश पर वर्ष 2010 में भारतीय वन्य जीव संस्थान ने चीता पुनर्स्थापना के लिए संभावित स्थलों का सर्वेक्षण किया। दस स्थलों के अध्ययन में मध्यप्रदेश के नौरादेही अभयारण्य, कूनो-पालपुर अभयारण्य और राजस्थान के शाहगढ़ को उपयुक्त पाया गया। इनमें कूनो को सर्वाधिक उपयुक्त स्थल के रूप में चिन्हित किया गया। यही कूनो आज देश की चीता पुनर्बसाहट परियोजना का प्रमुख केंद्र है।

कूनो में चीतों के लिए तैयार हुआ अनुकूल वातावरण

चीता परियोजना के निर्धारित प्रोटोकॉल और गाइडलाइन के अनुसार कूनो में चीतों के रहवास के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। एकीकृत प्रबंधन के तहत कूनो नेशनल पार्क का लगभग 750 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र चीतों के रहवास के लिए उपयुक्त है। इसके अलावा श्योपुर और शिवपुरी जिलों में लगभग 3,000 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र चीतों के स्वच्छंद विचरण के लिए उपयुक्त माना गया है।

कूनो नेशनल पार्क से लगे गांवों के लोगों को चीता मित्र बनाया गया है। चीतों के रहवास के लिए अनुकूल परिस्थितियां विकसित करने के साथ पानी की उपलब्धता और आवश्यक सिविल कार्य सुनिश्चित किए गए हैं। कूनो में शिकार प्रजातियों का घनत्व भी चीतों के लिए पर्याप्त है।

नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से शुरू हुई यात्रा पहुँची बोत्सवाना तक

नामीबिया से 17 सितंबर 2022 को आठ चीते भारत लाए गए थे। उनकी संख्या 25 हो गई है। दक्षिण अफ्रीका से 18 फरवरी 2023 को 12 चीते भारत लाए गए। आज दक्षिण अफ्रीकी मूल के जीवित चीतों और उनकी संतानों की संख्या 18 है। इनमें से 15 चीते कूनो नेशनल पार्क और 3 गांधी सागर अभयारण्य में हैं। इसके बाद 28 फरवरी 2026 को बोत्सवाना से 9 चीते भारत लाए गए। कूनो में वर्तमान में मौजूद 49 चीतों में से 17—10 नर और 7 मादा—खुले वन क्षेत्र में विचरण कर रहे हैं। वहीं 32 चीते—5 नर, 8 मादा और एक वर्ष से कम आयु के 19 शावक—सॉफ्ट रिलीज बाड़ों में हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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