मप्र में सेवा और समर्पण की मिसाल पद्मश्री डॉ. बीके जैन का निधन, मुख्यमंत्री ने व्यक्त किया दुख

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मप्र में सेवा और समर्पण की मिसाल पद्मश्री डॉ. बीके जैन का निधन, मुख्यमंत्री ने व्यक्त किया दुख


भोपाल, 27 फरवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के चित्रकूट में सेवा और समर्पण की मिसाल माने जाने वाले जानकीकुंड नेत्र चिकित्सालय के ट्रस्टी पद्मश्री से सम्मानित चिकित्सक डॉ. बीके जैन का निधन हो गया। उन्होंने शुक्रवार की शाम 72 वर्ष की आयु में जानकी कुंड चिकित्सालय में अंतिम सांस ली।

उनके निधन की पुष्टि सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट परिवार द्वारा की गई है। बताया गया है कि पद्मश्री डॉ. जैन पिछले कई महीनों से अस्वस्थ चल रहे थे और मुंबई में उनका उपचार जारी था। हालत गंभीर होने पर उन्हें चित्रकूट स्थित जानकी कुंड चिकित्सालय लाया गया, जहां वेंटिलेटर से हटाए जाने के बाद उनका निधन हुआ।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उनके निधन पर दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जानकीकुंड चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सक और सद्गुरू सेवा संघ ट्रस्ट चित्रकूट के निदेशक पद्मश्री डॉ. जैन ने आजीवन नेत्र रोगियों के उपचार का कार्य किया। उनका योगदान सदैव याद रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने बाबा महाकाल से दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिजन को यह गहन दुख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की है।

पद्मश्री डॉ. जैन सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट के डायरेक्टर और जानकीकुंड नेत्र चिकित्सालय के ट्रस्टी के रूप में लंबे समय से सेवा कार्यों से जुड़े रहे। उनके नेतृत्व में नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुए, जिससे लाखों जरूरतमंदों की आंखों का उपचार संभव हो पाया। वे स्वामी रणछोड़ दास महाराज के कृपापात्र थे और उनके बताए मार्ग पर चलते हुए चित्रकूट में गरीबों, संत समाज और नेत्र रोगियों की सेवा को उन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य बनाया। चिकित्सा और सेवा के क्षेत्र में उनके योगदान को समाज हमेशा याद रखेगा।

डॉ. बीके जैन (बुधेंद्र कुमार जैन) को चिकित्सा (नेत्र देखभाल) के क्षेत्र में 50 से अधिक वर्षों के असाधारण योगदान के लिए 26 जनवरी 2025 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उनके निधन से चित्रकूट सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

डॉ. जैन ने 1970 के दशक में चित्रकूट में अपनी सेवाएं शुरू कीं और नेत्र चिकित्सा को सुलभ और सस्ती बनाने के लिए, विशेषकर ग्रामीण और गरीब आबादी के लिए, एक मॉडल के रूप में काम किया। सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय उनके नेतृत्व में, यह संस्थान विश्व के प्रमुख नेत्र चिकित्सा संस्थानों में से एक बन गया है, जो प्रति वर्ष 1.55 लाख से अधिक नेत्र ऑपरेशन करता है। डॉ. जैन ने 4500 से अधिक सामुदायिक नेत्र शिविर आयोजित किए हैं, और पन्ना, सतना, बांदा, हमीरपुर और फतेहपुर जिलों को मोतियाबिंद बैकलॉग से मुक्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

डॉ. बी.के. जैन सदगुरु नेत्र चिकित्सालय, चित्रकूट के संस्थापक निदेशक और ट्रस्टी रहे। 1970 के दशक में उन्होंने चित्रकूट जैसे पिछड़े और आदिवासी अंचल में नेत्र चिकित्सा सेवा शुरू की। सीमित संसाधनों के बावजूद उनकी दूरदृष्टि, संकल्प और सेवा भाव ने इस संस्थान को देश-दुनिया में पहचान दिलाई। आज यह चिकित्सालय भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के प्रमुख नेत्र चिकित्सा केंद्रों में गिना जाता है।

सदगुरु नेत्र चिकित्सालय में हर वर्ष करीब 1.55 लाख से अधिक नेत्र ऑपरेशन किए जाते हैं और 17 लाख से ज्यादा मरीजों को नेत्र सेवाओं का लाभ मिलता है। डॉ. जैन के नेतृत्व में यहां दुनिया का सबसे बड़ा ऑफ्थैल्मिक मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर भी विकसित किया गया। चिकित्सा के साथ-साथ उन्होंने शिक्षा और जनजागरूकता के क्षेत्र में भी ऐतिहासिक योगदान दिया। डॉ. जैन की पहल पर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में 130 प्राथमिक नेत्र जांच केंद्र स्थापित किए गए। इन केंद्रों के माध्यम से समय पर जांच और उपचार संभव हो सका। उनकी प्रेरणा से हर साल हजारों सामुदायिक नेत्र शिविर लगाए जाते हैं। पन्ना, बांदा, फतेहपुर, हमीरपुर और सतना जैसे जिलों को मोतियाबिंद-मुक्त बनाने का अभियान लगातार सफलतापूर्वक चला।

डॉ. जैन का जन्म मध्य प्रदेश के सतना जिले में हुआ। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा सतना के शासकीय वेंकट क्रमांक-1 विद्यालय से प्राप्त की। वर्ष 1973 में श्याम शाह मेडिकल कॉलेज, रीवा से एमबीबीएस किया और 1979 में लोकमान्य तिलक मेडिकल कॉलेज, सायन मुंबई से नेत्र रोग में पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा किया। शहरी जीवन और बड़े अस्पतालों में करियर की संभावनाओं के बावजूद डॉ. जैन ने ग्रामीण भारत की सेवा का मार्ग चुना। उन्होंने श्री सदगुरु सेवा संघ ट्रस्ट के साथ मिलकर चित्रकूट में कार्य शुरू किया। उनके अथक प्रयासों से यह संस्थान लाखों लोगों के जीवन में रोशनी लाने का माध्यम बना।

पद्मश्री डॉ. जैन के निधन पर उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने व्यक्त किया शोक

मप्र के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने पद्मश्री डॉ. बी.के. जैन के निधन पर गहन शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि डॉ. जैन के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। डॉ. जैन ने सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट के माध्यम से नेत्र चिकित्सा सेवा को जनसेवा का व्यापक अभियान बनाकर हजारों जरूरतमंदों के जीवन में प्रकाश पहुँचाया। चित्रकूट में संत समाज, गरीब एवं असहाय जनों के लिए उनका समर्पण, सेवा-भाव और मानवीय दृष्टिकोण सदैव स्मरणीय रहेगा। उनका संपूर्ण जीवन करुणा, सेवा और मानवता के उच्च मूल्यों की प्रेरक मिसाल है।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने शोकाकुल परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिजन को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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