राष्ट्रीय खनिज चिंतन शिविर में मप्र ने रखे भूमि अनुसूची करण और अधिग्रहण से जुड़े सुधारात्मक सुझाव

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राष्ट्रीय खनिज चिंतन शिविर में मप्र ने रखे भूमि अनुसूची करण और अधिग्रहण से जुड़े सुधारात्मक सुझाव


भोपाल, 09 जनवरी (हि.स.)। गुजरात के गांधीनगर में 8 से 10 जनवरी 2026 तक आयोजित राष्ट्रीय खनिज चिंतन शिविर के दूसरे दिन शुक्रवार को आयोजित सत्र-III में मध्य प्रदेश के खनिज संसाधन विभाग के प्रतिनिधिमंडल ने ‘भूमि अनुसूचीकरण एवं भूमि अधिग्रहण’ विषय पर प्रस्तुति दी। इस अवसर पर भूविज्ञान एवं खनन संचालनालय के संचालक फ्रैंक नोबल ने राज्य के दृष्टिकोण, व्यावहारिक चुनौतियों तथा सुधारात्मक प्राथमिकताओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

तीन दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर में शुक्रवार को केंद्र एवं राज्य सरकारों के नेतृत्वकर्ता, नीति-निर्माता और विषय विशेषज्ञों ने आपसी सहयोग, पहुंच, सतत विकास तथा आत्मनिर्भर खनन पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण पर विचार-विमर्श किया गया। शिविर में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल सहित विभिन्न राज्यों के खनन मंत्रियों ने सहभागिता की।

मध्य प्रदेश खनिज संसाधन विभाग की प्रस्तुति में खनन परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन, भूमि उपलब्धता की प्रक्रिया को सरल बनाने, राज्यों के अनुभवों को नीति निर्माण में समाहित करने तथा निवेश-अनुकूल वातावरण सृजित करने जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई। चिंतन शिविर के दौरान यह सामूहिक संकल्प दोहराया गया कि भारत के खनन क्षेत्र को अधिक सशक्त नीतियां, सुरक्षित संचालन प्रणाली और जिम्मेदार एवं सतत विकास के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा। शिविर में तकनीक के उपयोग, पर्यावरणीय संतुलन और राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

राष्ट्रीय खनिज चिंतन शिविर 2026 ने यह स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य सरकारों के साझा प्रयासों से भारत का खनन क्षेत्र न केवल आर्थिक विकास का मजबूत आधार बनेगा, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी नई गति प्रदान करेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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