खान एवं खनिज संशोधन विधेयक, 2026 से मप्र को मिलेंगे खनन क्षेत्र में स्थिरता और निवेश के नए अवसर

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खान एवं खनिज संशोधन विधेयक, 2026 से मप्र को मिलेंगे खनन क्षेत्र में स्थिरता और निवेश के नए अवसर


खान एवं खनिज संशोधन विधेयक, 2026 से मप्र को मिलेंगे खनन क्षेत्र में स्थिरता और निवेश के नए अवसर


- एक समान और पूर्वानुमान योग्य कर व्यवस्था से खनन, निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास को मिलेगा प्रोत्साहन

भोपाल, 14 अगस्त (हि.स.)। खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 खनिज क्षेत्र के लिए एक समान, स्थिर और पूर्वानुमान योग्य कर व्यवस्था और राजकोषीय ढांचा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मध्य प्रदेश जैसे खनिज-संपन्न राज्य के लिए यह संशोधन खनन गतिविधियों को अधिक प्रतिस्पर्धी और निवेश-अनुकूल बनाने, खनिज उत्पादन बढ़ाने, रोजगार के अवसर सृजित करने तथा खनिज आधारित उद्योगों के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

जनसम्पर्क अधिकारी केके जोशी ने शुक्रवार को बताया कि यह विधेयक लोकसभा में 12 अगस्त और राज्यसभा में 13 अगस्त को पारित हुआ है। मध्य प्रदेश के लिए इस संशोधन का महत्व इस रूप में है कि स्थिर और देशभर में एक समान कर व्यवस्था से मौजूदा खनन गतिविधियों की आर्थिक व्यवहार्यता मजबूत होगी। नए खनन निवेश तथा उत्पादन के माध्यम से भविष्य में रॉयल्टी और नीलामी प्रीमियम जैसे राजस्व स्रोतों में वृद्धि की संभावनाएं बढ़ेंगी।

मध्य प्रदेश के लिए व्यापक संभावनाएं

उन्होंने बताया कि खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 का मूल उद्देश्य खनन क्षेत्र को प्रतिस्पर्धी, पारदर्शी, स्थिर, पूर्वानुमान योग्य और निवेश-अनुकूल बनाना है। इससे मध्यप्रदेश जैसे खनिज-संपन्न राज्य को खनिज संसाधनों के बेहतर दोहन, दीर्घकालिक निवेश, उत्पादन वृद्धि, स्थानीय रोजगार, खनिज आधारित उद्योगों और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए अनुकूल वातावरण मिलेगा।

संशोधन का लाभ केवल खनन गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खनिज से उद्योग, उद्योग से रोजगार और रोजगार से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की व्यापक संभावनाएं बनेंगी। साथ ही, रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, डीएमएफ और अन्य वैधानिक राजस्व स्रोतों की निरंतरता से राज्य के दीर्घकालिक राजस्व हित भी सुरक्षित रहेंगे।

‘एक राष्ट्र–एक खनिज बाजार’ की दिशा में कदम

जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, विधेयक देश में खनिजों के लिए एक समान बाजार और स्थिर राजकोषीय ढांचे की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। संशोधन से पूर्व अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग कर, शुल्क और उपकर होने से लागत में अंतर, आपूर्ति श्रृंखला में बाधा तथा परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने की स्थिति बनती रही है। कर संरचना के युक्तिकरण से स्थानीय उद्योगों, घरेलू विनिर्माण और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे प्रदेश के खनिज संसाधनों को राष्ट्रीय खनिज बाजार से बेहतर ढंग से जोड़ने और खनिज आधारित उद्योगों के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी वातावरण तैयार करने में मदद मिलेगी।

राज्य के खनिज राजस्व की सुरक्षा के साथ होगी दीर्घकालिक राजस्व वृद्धि

उन्होंने बताया कि विधेयक का उद्देश्य राज्यों के खनिज राजस्व को कम करना नहीं, बल्कि खनन परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता को बनाए रखते हुए दीर्घकालिक और टिकाऊ राजस्व सुनिश्चित करना है। संशोधित विधेयक के अनुसार, खनन क्षेत्र से प्राप्त राजस्व का लगभग 90 प्रतिशत राज्यों को मिलता है और संशोधन के बाद भी यह स्थिति यथावत रहेगी। रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ), राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट और जीएसटी में राज्यों की हिस्सेदारी पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025-26 में देश के राज्यों को कोयला एवं गैर-कोयला खनिजों से ₹1,14,549.28 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ, जो कुल खनिज राजस्व का 88.53 प्रतिशत था। वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच खनिज उत्पादन से राज्यों के राजस्व में 354 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

एक समान कर व्यवस्था से निवेश को मिलेगा भरोसा

जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक में नई धारा 9D जोड़ी गई है। इसके तहत खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर कोई नया कर, उपकर अथवा अन्य प्रभार केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों, सीमाओं और प्रतिबंधों के अनुरूप ही लगाया जा सकेगा। इसका उद्देश्य अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग और अप्रत्याशित राजकोषीय भार के कारण उत्पन्न होने वाली नीतिगत अनिश्चितता को कम करना है।

मध्य प्रदेश में खनन क्षेत्र में दीर्घकालिक और पूंजी-गहन निवेश को देखते हुए स्थिर एवं पूर्वानुमेय कर व्यवस्था निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में सहायक होगी। इससे खनन ब्लॉकों के विकास, आधुनिक तकनीक के उपयोग और नई परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

खनन के साथ स्थानीय उद्योग और रोजगार को बढ़ावा

खनिज सस्ता और प्रतिस्पर्धी होने से खनिज आधारित उद्योगों को कच्चा माल अधिक प्रतिस्पर्धी दरों पर उपलब्ध हो सकता है। इससे खनिज प्रसंस्करण, परिष्करण, संवर्धन, स्मेल्टिंग, रिफाइनिंग और डाउनस्ट्रीम विनिर्माण जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स लागत में कमी से एकीकृत आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी।

मध्य प्रदेश के संदर्भ में इसका लाभ खनन क्षेत्रों से आगे बढ़कर खनिज आधारित विनिर्माण, औद्योगिक इकाइयों, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और संबद्ध सेवाओं तक पहुंचेगा। खनन गतिविधियों के विस्तार से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

पहले से प्राप्त राजस्व सुरक्षित

संशोधन में पहले से पूर्ण हो चुके लेन-देन और राज्यों द्वारा पहले ही वसूले एवं खर्च किए जा चुके करों को वापस करने की व्यवस्था नहीं की गई है। इसका उद्देश्य राज्यों के बजट पर गंभीर वित्तीय दबाव और प्रशासनिक अव्यवस्था से बचना है। अर्थात, पहले से वसूले गए कर एवं उपकर से प्राप्त राशि को लेकर राज्यों के वित्तीय हित सुरक्षित रहेंगे।

अत्यधिक और पूर्वव्यापी कर मांगों से मिलेगी स्पष्टता

विधेयक का एक प्रमुख उद्देश्य पुरानी और पूर्वव्यापी कर मांगों से उत्पन्न कानूनी अनिश्चितता को कम करना है। मध्यप्रदेश के खनन क्षेत्र के लिए यह नीतिगत और वित्तीय निश्चितता दीर्घकालिक परियोजनाओं की योजना बनाने और निवेश संबंधी निर्णय लेने में सहायक होगी।

खनिज आधारित उद्योगों और आम नागरिक को भी लाभ

खनिज ऊर्जा, इस्पात, सीमेंट, एल्युमिनियम, बिजली और बुनियादी ढांचे के लिए प्रमुख कच्चे माल का आधार हैं। प्रतिस्पर्धी खनिज लागत से विनिर्माण, बुनियादी ढांचे और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। मध्यप्रदेश में खनिज लागत और खनन परियोजनाओं की व्यवहार्यता में सुधार का व्यापक लाभ उद्योग, बुनियादी ढांचे, रोजगार और आम उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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