मप्र के इंदौर में पाइपलाइन में लीकेज बना 14 मौतों की वजह, पानी में मिले जानलेवा बैक्टीरिया
- अस्पतालों में अब भी 201 मरीज भर्ती, इनमें से 32 आईसीयू में
इंदौर, 01 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई 14 लोगों की मौत के मामले में गुरुवार को आई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. माधव हसानी ने बताया कि महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की लैब में जांचे गए पानी के नमूनों की रिपोर्ट आज स्वास्थ्य विभाग को मिल गई है। इसमें साफ तौर पर पुष्टि हुई है कि दूषित पानी पीने से ही लोग बीमार पड़े और उनकी जान गई। पाइपलाइन में लीकेज के कारण पानी दूषित हुआ है। यह किस जगह और किस लेवल का है, इसके बारे में संबंधित अधिकारी ही बता पाएंगे।
उन्होंने बताया कि भागीरथपुरा क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वास्थ्य सेवाएं निरंतर प्रदान की जा रही है। आज विभाग ने 21 टीमें बनाई, जिसमें डॉक्टर, पैरामेडिकल, ए.एन.एम. आशा कार्यकर्ता सम्मिलित हैं, आशाकार्यकर्ता द्वारा क्षेत्र का व्यापक सर्वे किया जा रहा है, इस सर्वे में आज आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी सहयोग प्रदान कर रही हैं। घर-घर जाकर उबला पानी पीने एवं बाहर का भोजन व बाहर के कटे फल न खाने की समझाईश भी दे रही है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हासानी ने बताया कि कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देशानुसार क्षेत्र में 07 एम्बुलेंस लगाई गई हैं, 24x7 चिकित्सकों की ड्यूटी क्षेत्र में लगाई गई है, मरीजों को एम. व्हाय. चिकित्सालय, अरविंदों अस्पताल तथा बच्चों को चाचा नेहरु अस्पताल में रेफर किया जा रहा है, जो मरीज निजी चिकित्सालयों में जा रहें हैं, वहाँ पर भी निःशुल्क उपचार, जॉच एवं औषधि हेतु निर्देशित किया गया है। आज गुरुवार को 1714 घरों का सर्वे किया गया, जिसमें लगभग 8571 लोगों की जांच की गई, जिसमें से लगभग 338 मरीज मिले, मरीजों को वही पर प्राथमिक उपचार दिया गया।
डॉ. हासानी ने बताया कि आज दिनांक तक कुल 272 मरीज अस्पतालों में भर्ती किए गए, जिसमें से 71 मरीजों को डिस्चार्ज किया जा चुका है। वर्तमान में अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या 201 है और आईसीयू में भर्ती मरीजों की संख्या 32 है।
ऐसे सिस्टम में काम करना मुमकिन नहीं: महापौरभागीरथपुरा में दूषित पानी कांड को लेकर गुरुवार को रेसीडेंसी कोठी में हुई बैठक में अधिकारियों के रवैये को लेकर महापौर पुष्यमित्र भार्गव का गुस्सा जमकर फूटा। उन्होंने एसीएस (अपर मुख्य सचिव) संजय दुबे से यहां तक कह दिया कि अधिकारी सुनते नहीं हैं। मैं ऐसे सिस्टम में काम नहीं कर सकता। आप चाहो तो यह संदेश मुख्यमंत्री तक पहुंचा दो। एसओआर आया नहीं, इसके पहले अधिकारियों ने फाइल स्वीकारना बंद कर दी। अधिकारी संवाद तक नहीं करते।
कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर उठाए सवालमहापौर ने कलेक्टर शिवम वर्मा पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कलेक्टर साहब, मैंने आपको दो दिन पहले मैसेज किया था कि भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त के मरीज मिले हैं, आप जाकर देखो, लेकिन आपने कुछ नहीं किया। सोमवार को जब हम अस्पताल पहुंचे जिसके बाद आप सक्रिय हुए। अगर समय रहते संज्ञान ले लिया जाता तो स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती। महापौर ने कहा कि अधिकारियों की वजह से काम प्रभावित हो रहा है। उन्होंने असहजता जताते हुए हाथ खड़े कर दिए और कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में काम करना कठिन है। मैं इसके लिए राजनीति में नहीं आया था।
जांच रिपोर्ट में पुष्टि
अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने बताया कि भागीरथपुरा में नर्मदा पेयजल में दूषित पानी मिला, इस वजह से लोग बीमार हुए। पानी की जांच रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है। गुरुवार को उस क्षेत्र में जो नर्मदा जल प्रदाय हुआ उस पानी की गुणवत्ता बेहतर थी। रेसीडेंसी में हुई बैठक में तय किया गया कि अमृत-2 प्रोजेक्ट के कार्यों को तेजी से बढ़ाया जाएगा। निगम स्तर पर स्थानीय पेंडिंग कार्यों को तत्काल आगे बढ़ाया जाएगा। यदि राशि की जरूरत होगी तो वह भी उपलब्ध करवाएंगे।
मानव अधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्टराष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने दूषित पानी से मौतों की मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग के अनुसार, अगर मीडिया रिपोर्ट में कही गई बातें सही हैं तो इससे यह पीड़ितों के मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मुद्दा उठता है। शिकायतों के बावजूद कथित रूप से अधिकारियों ने दूषित पानी की आपूर्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। मामले में मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के अंदर इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है।
नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी माना कि भागीरथपुरा के पेयजल में सीवेज का पानी मिलने से हालात बिगड़े हैं। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि चौकी के पास जो लीकेज वाली जगह है, वहीं इसकी सबसे प्रमुख आशंका है। विजयवर्गीय स्कूटर पर सवार होकर भागीरथपुरा पहुंचे थे। इस दौरान 7 मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख रुपये के चेक दिए जाने थे। परिजन ने मंत्री की मौजूदगी में नाराजगी जताते हुए कहा कि हमें आपका चेक नहीं चाहिए।
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

