मप्र के इंदौर में दूषित पानी से एक और बुजुर्ग की मौत, मृतकों की संख्या बढ़कर 23 हुई

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मप्र के इंदौर में दूषित पानी से एक और बुजुर्ग की मौत, मृतकों की संख्या बढ़कर 23 हुई


मप्र के इंदौर में दूषित पानी से एक और बुजुर्ग की मौत, मृतकों की संख्या बढ़कर 23 हुई


इंदौर, 12 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। यहां सोमवार को एक और बुजुर्ग की मौत हो गई। इसके बाद यहां दूषित पानी से मरने वालों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है। मृतक का नाम भगवानदास (64) है। दूषित पानी से तबियत खराब होने के चलते उन्हें 10 दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पहले उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां हालत में सुधार नहीं होने पर बॉम्बे अस्पताल रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

इंदौर के बॉम्बे अस्पताल के जनरल मैनेजर राहुल पाराशर ने बताया कि भागीरथपुरा की इमली गली में रहने वाले भगवानदास भरणे को जब यहां लाया गया तो उस दौरान कार्डियक अरेस्ट आया था। इस पर सीपीआर देकर उन्हें फिर वेंटिलेटर पर लिया गया था। उन्हें गैंग्रीन सहित मल्टी ऑर्गन्स फेल्यूअर जैसी तकलीफ थी।

इंदौर में सोमवार को हुई मौत के बाद मृतकों का आंकड़ा 23 पहुंच गया है। मृतकों में उर्मिला यादव (60), नंदलाल पाल (75), उमा कोरी (31), मंजूला (74), ताराबाई कोरी (70), गोमती रावत (50), सीमा प्रजापत (50) जीवन लाल बरेडे (80), अव्यान साहू (5 माह), शंकर भाया (70), संतोष बिगोलिया, अरविंद लखर, गीताबाई, अशोक लाल पंवार, ओमप्रकाश शर्मा, हरकुंवर बाई, रामकली, सुमित्रा बाई, श्रवण खुपराव, हीरालाल, सुनीता वर्मा, कमला बाई और भगवानदास शामिल हैं।

इससे पहले नौ जनवरी को कमला बाई (59) पत्नी तुलसीराम की उपचार के दौरान हो गई थी। मृतक महिला का पति मजदूरी करता है। दोनों लगभग 20 दिन पहले ही भागीरथपुरा में आकर रहने लगे थे। इस दौरान दूषित पानी पीने से कमला बाई की तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें 5-6 जनवरी से उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी और हालत बिगड़ने पर 7 जनवरी को एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां कमला बाई ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था। मौत के बाद परिजनों ने भागीरथपुरा में नगर निगम की टीम और संबंधित केंद्र को इसकी जानकारी दी, लेकिन आधार कार्ड में पता नहीं बदला होने के कारण इस मामले को दूषित पानी से हुई मौत के रूप में दर्ज नहीं किया गया।

जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार क्षेत्र में व्यवस्थाएं सुधारने में जुटी हैं। रहवासी टैंकरों के भरोसे हैं और यह साफ नहीं है कि टंकियों से नियमित जलापूर्ति कब शुरू होगी। नगर निगम रोजाना पानी की टेस्टिंग और सैंपलिंग कर रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार वह आरओ, बोरिंग और बोतल के पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। पानी को छानकर और उबालकर इस्तेमाल कर रहे हैं।

अभी भागीरथपुरा के 42 मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती है और इनमें से 13 मरीजों की हालत गंभीर है, जिन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया है। इनमें से तीन मरीज वेंटिलेटर पर बताए जा रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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