मप्र की गोंडी चित्रकला को मिला डिजिटल बाजार का नया मंच, वैश्विक पहचान की ओर बढ़े जनजातीय कलाकार

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मप्र की गोंडी चित्रकला को मिला डिजिटल बाजार का नया मंच, वैश्विक पहचान की ओर बढ़े जनजातीय कलाकार


- डिंडोरी में आजीविका ग्राम संगठन और डॉट्स एंड डैशेज के बीच हुआ एमओयू

डिण्डोरी, 05 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले ने जनजातीय कला, संस्कृति एवं कलाकारों के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जिला प्रशासन ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट में गोंडी चित्रकला कलाकारों के लिए ई-कॉमर्स मंच का शुभारंभ किया। कार्यक्रम के माध्यम से पाटनगढ़ की विश्व प्रसिद्ध गोंडी चित्रकला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने की नई पहल की गई।

प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल एवं राज्य मंत्री राधा सिंह द्वारा वर्चुअल रिमोट का बटन दवाकर गोंडी चित्रकला आधारित उत्पादों के लिए ई-कॉमर्स मंच का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर आजीविका ग्राम संगठन, पाटनगढ़ एवं डॉट्स एंड डैशेज संस्था के मध्य गोंडी चित्रकला संवर्धन, कलाकार आजीविका उन्नयन एवं विपणन सहयोग हेतु समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

गोंड चित्रकला को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से मिलेगा वैश्विक मंच : मंत्री पटेल

मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने कार्यक्रम को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि गोंड चित्रकला हमारे जनजातीय समाज की एक प्राचीन और गौरवशाली कला है। गोंडी कला आधारित उत्पादों को अमेज़न ई-कारीगर सहित विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध करने से इस कला को वैश्विक बाजार तक पहुंच मिलेगी। इससे न केवल चित्रकारों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य और सम्मान मिलेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी विशेष पहचान बनेगी। उन्होंने इस पुरातन और जीवंत कला को 'जीआई टैग' दिलाने के लिए भी आवश्यक प्रयास करने की बात कही।

उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में आजीविका ग्राम संगठन पाटनगढ़ और डॉट्स एंड डैशेज संस्था के मध्य एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। ग्राम पाटनगढ़ के 157 परिवार प्रत्यक्ष रूप से इस कला से जुड़े हुए हैं, जिनमें 85 महिला और 72 पुरुष कलाकार शामिल हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक गोंडी कला का संरक्षण, संवर्धन और बाजार का विस्तार करना है।

आय में 10 गुना वृद्धि और ग्रामीण उद्यमिता का लक्ष्य

इस अवसर पर बताया कि यह समझौता कलाकारों के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। 'डॉट्स एंड डैशेज' के व्यवस्थित विपणन सहयोग से वर्तमान में चित्रकार परिवारों की औसत वार्षिक आय 35 हजार रुपये से बढ़कर 70 हजार रुपये तक पहुंच गई है। अब उत्पादों को ऑनलाइन बिक्री मंचों पर उपलब्ध कराने से इनकी वैश्विक मांग बढ़ेगी, जिससे आगामी समय में कलाकारों की आय में 10 गुना तक वृद्धि होने की संभावना है।

कार्यक्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी, मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मुख्य कार्यपालन अधिकारी हर्षिका सिंह, अमेज़न कारीगर टीम के प्रतिनिधि भी वर्चुअल माध्यम से जुड़े। इस अवसर पर स्थानीय गोंडी कलाकारों द्वारा आकर्षक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कलाकार चम्पी श्याम, आसमा तेकाम सहित अन्य चित्रकारों ने कैनवास, पेपर शीट, टी-शर्ट, शर्ट, साड़ी, दुपट्टा, रूमाल और अन्य उत्पादों पर उकेरी गई गोंडी कला की लगभग 30 कलाकृतियों का प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी में पारंपरिक जनजातीय संस्कृति, प्रकृति और लोकजीवन की झलक देखने को मिली।

राज्यमंत्री राधा सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश सरकार स्व-सहायता समूहों, ग्रामीण महिलाओं एवं कलाकारों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। गोंडी चित्रकला आधारित उत्पादों का डिजिटल विपणन कलाकारों की आय वृद्धि एवं सांस्कृतिक संरक्षण दोनों में सहायक सिद्ध होगा।

विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने कहा कि पाटनगढ़ की गोंडी चित्रकला केवल डिंडौरी जिले ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक धरोहर है। यह कला गोंड समाज की परंपराओं, संस्कृति, प्रकृति प्रेम और जीवन मूल्यों को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि वर्षों से गोंडी कलाकार सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी कला को संरक्षित किए हुए हैं, जिसके कारण आज पाटनगढ़ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि ई-कॉमर्स मंच के शुभारंभ से स्थानीय कलाकारों को अपनी कलाकृतियों के लिए व्यापक बाजार उपलब्ध होगा। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और कलाकारों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य प्राप्त हो सकेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल कलाकारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ-साथ युवा पीढ़ी को भी अपनी पारंपरिक कला और संस्कृति से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

डिंडौरी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने कहा कि पाटनगढ़ की कला केवल चित्र नहीं, बल्कि गोंड समुदाय की संस्कृति, इतिहास, प्रकृति और जीवन दर्शन की जीवंत अभिव्यक्ति है। करंजिया विकासखंड का पाटनगढ़ ग्राम देश और दुनिया में गोंडी चित्रकला के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित है, जहां 157 परिवार प्रत्यक्ष रूप से चित्रकला गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि गोंडी चित्रकला गोंड जनजाति की सांस्कृतिक चेतना, लोककथाओं और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाती है। बिंदुओं, रेखाओं और विशिष्ट पैटर्न से निर्मित यह कला प्रकृति और मानव के सह-अस्तित्व का संदेश देती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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