ऐतिहासिक भोजशाला के पास दरगाह की जमीन पर होगी जुमे की नमाज, कलेक्टर ने लिया जायजा
भोपाल, 30 जुलाई (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय द्वारा गुरुवार को सुनाए गए अहम आदेश के बाद मध्य प्रदेश के धार जिला मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर से सटी दरगाह की जमी पर शुक्रवार को मुस्लिम समाज के लोग जुमे की नमाज अदा करेंगे।
दरअसल, उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद प्रकरण को लेकर पूर्व में दिए अपने अंतरिम आदेश को स्पष्ट करते हुए मुस्लिम समाज के लोग नमाज अदा करने का स्थान तय कर दिया है, जहां हर शुक्रवार को मुस्लिम दोपहर के समय दो घंटे नमाज पढ़ सकेंगे।
उच्चतम न्यायालय द्वारा जुमे की नमाज के लिए तय जमीन का खसरा नंबर 596 है। यह भोजशाला के समीप दरगाह परिसर की जमीन है। न्यायालय के आदेश की जानकारी मिलते ही धार कलेक्टर राजीव रंजन मीणा और एसपी सचिन शर्मा प्रशासनिक अमले के साथ भोजशाला पहुंचे, यहां पर राजस्व विभाग की टीम ने उच्चतम न्यायालय द्वार चिंहित किए गए खसरा नंबर की जानकारी देते हुए नमाज के तय स्थान के बारे में उन्हें विस्तृत जानकार दी।
कलेक्टर ने निरीक्षण के दौरान राजस्व विभाग और नगर पालिका के अधिकारियों को इस स्थान की सफाई करने सहित नमाज पढ़ने के लिए अन्य व्यवस्था जुटाने के निर्देश दिए। जिला प्रशासन को शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी उचित कदम उठाए हैं। शुक्रवार को शहर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। शुक्रवार को शहर के चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल रहेगा। एएसपी, सीएसपी, डीएसपी, एसडीओपी रैंक के अधिकारी सहित 350 का बल मौजूद रहेगा। नगर के संवेदनशील इलाकों में लगातार पुलिस मोबाइल बाइक टीम भ्रमण करेगी।
धार कलेक्टर राजीव रंजन मीणा ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के निर्देश प्राप्त हुए हैं। इसके बाद पुलिस अधिकारियों के साथ संयुक्त भ्रमण किया और आवश्यक निर्देश दिए। विभागीय बैठक के बाद मुस्लिम समाज के लोगों से भी इस बारे में चर्चा की जाएगी।
उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को अपने अहम आदेश में ऐतिहासिक भोजशाला परिसर के समीप स्थित दरगाह की जमीन मुस्लिमों को जुमे 'शुक्रवार' की नमाज के लिए आवंटित की है। इसके साथ ही राज्य सरकार को आदेश दिया गया है कि वह दरगाह की इस जमीन पर हर शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे के बीच मुस्लिमों को नमाज की व्यवस्था सुनिश्चित करे।
प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने यह आदेश दिया। पीठ ने कहा कि इस आदेश के बाद भी राज्य सरकार व मुस्लिम पक्ष परस्पर सहमति से जुमे की नमाज के लिए दूसरे स्थान की तलाश भी कर सकते हैं।
इससे पहले 14 जुलाई को पीठ ने याचिका का फैसला होने तक भोजशाला के पास की खुली जमीन जुमे की नमाज के लिए उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मुस्लिम समाज की ओर से हाजी मुनीर अहमद ने उच्चतम न्यायालय से शिकायत की थी कि अदालत के आदेश के बाद भी उन्हें नमाज के लिए वैकल्पिक जगह मुहैया नहीं कराई गई है और धार जिला प्रशासन उन्हें भोजपशाला परिसर से करीब 1.3 किलोमीटर दूर जमीन उपलब्ध करा रहा है। जबकि नमाज की जगह इतनी पास होना चाहिए कि मुस्लिम आसानी से वहां जाकर नमाज अदा कर सकें।
हाई कोर्ट ने भोजशाला को हिंदू धर्म स्थल माना
गौरतलब है कि 15 मई को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने भोजशाला मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए इस परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित वाग्देवी मंदिर घोषित किया था। इसके साथ ही न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व विभाग 'एएसआई' के दशकों पुराने आदेश को खारिज कर दिया था, जिसमें इस परिसर में मुस्लिमों को जुमे की नमाज की इजाजत दी गई थी। अदालत ने यह भी कहा था कि केंद्र और एएसआई भोजशाला परिसर के प्रबंधन व प्रशासन के बारे में फैसला लें।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

