मप्र के उज्जैन में जुटेंगे देश-विदेश के दिग्गज शोधकर्ता, भविष्य की तकनीकों पर करेंगे मंथन
- उज्जैन में मंगलवार को होगा पांच दिवसीय तृतीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सह संकाय विकास कार्यक्रम का उद्घाटन
उज्जैन, 20 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में पांच दिवसीय तृतीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सह संकाय विकास कार्यक्रम में देश और विदेश के विख्यात वैज्ञानिक, शिक्षाविद और युवा शोधार्थी एक ही मंच पर जुटेंगे और भविष्य की वैज्ञानिक चुनौतियों का समाधान खोजेंगे।
उन्नत तकनीक, नैनो टेक्नोलॉजी और स्मार्ट मैटेरियल्स के क्षेत्र में शोध को नया आयाम देने के लिए मध्य प्रदेश का उज्जैन एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक चर्चाओं का मुख्य केंद्र बनने जा रहा है। इस तृतीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सह संकाय विकास कार्यक्रम(एनजीएमएफटी-2026) का आयोजन 21 जुलाई को सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ स्टडीज़ इन केमिस्ट्री एवं बायोकेमिस्ट्री, स्कूल ऑफ स्टडीज़ इन फिजिक्स तथा इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी द्वारा किया जा रहा है।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ अनिल कुमार शर्मा ने सोमवार को बताया कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर के सहयोग से भविष्य की तकनीक-उन्नत पदार्थ विज्ञान विषय पर केंद्रित इस पाँच दिवसीय महाकुंभ का औपचारिक शुभारंभ मंगलवार, 21 जुलाई को होगा। उन्होंने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन भारत की सुप्रसिद्ध एयरोस्पेस वैज्ञानिक और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित डॉ. शुभा वी. अयंगर करेंगी।
डॉ. अयंगर भारत की पहली स्वदेशी 'दृष्टि रनवे विजिबिलिटी एवं लैंडिंग गाइडेंस प्रणाली के प्रमुख आविष्कारक के रूप में पहचानी जाती है, जिनका वैज्ञानिक योगदान देश को रक्षा एवं विमानन क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित हुआ है। उनका आगमन विश्वविद्यालय और पूरे प्रदेश के लिए अत्यंत गौरव का विषय है।
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने इस आयोजन के महत्व के बारे में बताया कि यह सम्मेलन केवल शोध-पत्रों के प्रस्तुतीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य की तकनीकों, नवाचार, उद्योगों और अकादमिक जगत के बीच एक मजबूत सेतु निर्माण का अवसर है। पीएम उषा और सक्षम अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित यह कार्यक्रम मध्य प्रदेश को वैज्ञानिक अनुसंधान के एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करेगा और युवा शोधकर्ताओं को विश्वस्तरीय वैज्ञानिकों के साथ सीधे संवाद की प्रेरणा देगा।
सम्मेलन की संयोजक प्रो. उमा शर्मा ने बताया कि आयोजन का मुख्य केंद्र 'एडवांस्ड मैटेरियल्स' है, जिनका उपयोग आज ऊर्जा, स्वास्थ्य, रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स, पर्यावरण और भविष्य की स्मार्ट तकनीकों में तेजी से बढ़ रहा है। इस सम्मेलन में ऑस्ट्रेलिया की न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के प्रो. अजयन विनु, एल्सेवियर इंडिया के डॉ. संदीप संचेती, चित्रा तिरुनाल इंस्टीट्यूट तिरुवनंतपुरम के डॉ. हरे कृष्ण वर्मा सहित महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों से वैज्ञानिक और शिक्षाविद हिस्सा ले रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पाँच दिनों तक चलने वाले इस एफडीपी एवं सम्मेलन में नैनो टेक्नोलॉजी, फार्मास्यूटिकल विज्ञान, उन्नत विश्लेषणात्मक तकनीकों पर विशेषज्ञ व्याख्यान, पोस्टर सत्र और व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही प्रतिभागियों को 22 जुलाई को आईआईटी इंदौर की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और अनुसंधान केंद्रों का शैक्षणिक भ्रमण कराया जाएगा, जिससे उन्हें प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हो सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

