मप्र के उज्जैन में बाबा महाकाल की दिनचर्या बदली, तीन आरतियों का नया समय लागू

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मप्र के उज्जैन में बाबा महाकाल की दिनचर्या बदली, तीन आरतियों का नया समय लागू


- सुबह की दद्योदक और भोग आरती आधा घंटा लेट और संध्या आरती आधा घंटा पहले होगी

उज्जैन, 27 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर मंदिर में आज कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से बाबा महाकाल की दिनचर्या बदल गई है। मंदिर में प्रतिदिन होने वाली तीन आरतियों के समय में शीतकाल के अनुसार बदलाव किया गया है। मंगलवार को सुबह की दद्योदक (बालभोग) और भोग आरती आधा घंटा देरी से हुई।

मंदिर के पुजारी पं. महेश शर्मा ने बताया कि महाकालेश्वर मंदिर की पूजा परंपरा में मौसम के अनुसार बदलाव किया जाता है। ज्योतिर्लिंग भगवान की पूजन परंपरा में शरद पूर्णिमा से सर्दी की शुरुआत मानी जाती है। इस दिन संध्या आरती में भगवान महाकाल को केसरिया मीठे दूध का भोग लगा गया। इसके बाद अगले दिन कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से मंदिर में प्रतिदिन होने वाली पांच आरतियों में से तीन आरतियों का समय बदलता है। आज से प्रतिदिन सुबह की दद्योदक (बालभोग) और भोग आरती अब आधा घंटा देरी से होंगी, जबकि संध्या आरती आधा घंटा पहले की जाएगी। यह व्यवस्था फाल्गुन पूर्णिमा यानी होली तक जारी रहेगी।

सुबह और शाम की आरती का बदला समय

उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के तहत सुबह 7 बजे होने वाली दद्योदक आरती अब सुबह 7:30 बजे से 8:15 बजे तक होगी। इसी तरह सुबह 10 बजे होने वाली भोग आरती अब 10:30 से 11:15 बजे तक होगी, जबकि शाम को होने वाली संध्या आरती का समय भी बदलकर 7 बजे के बजाय 6:30 से 7:15 बजे तक कर दिया गया है। इसी तय कार्यक्रम के अनुसार, मंलगवार को महाकाल मंदिर में दद्योदक और भोग आरती संपन्न हुई।

हालांकि, बाबा महाकाल की भस्म आरती, शाम की संध्या पूजा और रात की शयन आरती के समय में कोई बदलाव नहीं किया गया है। भस्म आरती तड़के 4 से सुबह 6 बजे तक, संध्या पूजा शाम 5 से 5:45 बजे तक और शयन आरती रात 10:30 से 11 बजे तक पूर्व निर्धारित समय पर होगी। इसी तरह गर्मी के मौसम में भी निर्धारित अवधि के अनुसार आरती और पूजा के समय में परिवर्तन होता है।

बाबा महाकाल की दिनचर्या में अगला बदलाव कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी यानी रूप चौदस से होगा। इस दिन से भस्म आरती के दौरान भगवान को गर्म जल से स्नान कराने की परंपरा शुरू होती है। पुजारी परिवार की महिलाएं भगवान को गर्म जल से स्नान कराकर सुगंधित उबटन लगाती हैं। यह क्रम फाल्गुन पूर्णिमा यानी होली तक जारी रहता है।

श्रद्धालु नई समय-सारिणी के अनुसार बनाएं दर्शन की योजना

आरती के समय में बदलाव का ध्यान उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से जरूरी है, जो निर्धारित आरती में शामिल होने के उद्देश्य से उज्जैन पहुंचते हैं। सुबह की बालभोग और भोग आरती के लिए अब पहले की तुलना में आधा घंटा बाद पहुंचना होगा, जबकि संध्या आरती के लिए आधा घंटा पहले पहुंचने की योजना बनानी होगी। भस्म आरती और शयन आरती में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के लिए समय पहले जैसा ही रहेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

Livevns.news Desk
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