मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने असम के सिल्क विलेज सुआलकुची का किया भ्रमण

WhatsApp Channel Join Now
मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने असम के सिल्क विलेज सुआलकुची का किया भ्रमण


मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने असम के सिल्क विलेज सुआलकुची का किया भ्रमण


मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने असम के सिल्क विलेज सुआलकुची का किया भ्रमण


- असमिया संस्कृति और विश्व प्रसिद्ध मूगा रेशम की बुनाई प्रक्रिया का लिया जायजा, बुनकरों से किया संवाद

भोपाल, 08 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को अपने असम प्रवास के दौरान गुवाहाटी के समीप स्थित ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान के केंद्र सुआलकुची का भ्रमण किया। उन्होंने 'सिल्क विलेज' के नाम से विख्यात सुआलकुची पहुंचकर रेशम उत्पादन की प्राचीन और पारंपरिक प्रक्रिया को बेहद करीब से देखा और इस कला की बारीकियों के बारे में जानकारी प्राप्त की।

बुनकरों के कौशल से अभिभूत हुए मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुआलकुची में बुनकरों के घरों और कार्यशालाओं का अवलोकन किया। उन्होंने देखा कि किस तरह यहां की समृद्ध विरासत को सहेजते हुए लगभग हर घर में हाथकरघों (हैंडलूम) के माध्यम से कलाकृतियाँ उकेरी जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुनकरों से सीधे संवाद कर उनके श्रम और शिल्प कौशल की सराहना की। उन्होंने कहा कि यहां की पारंपरिक बुनाई तकनीक न केवल कला का उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ रीढ़ भी है।

'पूर्व का मैनचेस्टर' है सुआलकुचीउल्लेखनीय है कि गुवाहाटी से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित सुआलकुची को 'पूर्व का मैनचेस्टर' कहा जाता है। यह गांव अपनी विशिष्ट रेशम बुनाई तकनीकों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहां मुख्य रूप से तीन प्रकार के रेशम मूगा (सुनहरा), पैट (हाथीदांत जैसा सफेद) और एरी (हल्का बेज) का उत्पादन किया जाता है, जो असम की मूल पहचान हैं।

संग्रहालय और वस्त्र कला का अवलोकनभ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'बस्त्रा उद्यान' और 'आमार सुआलकुची' संग्रहालय का भी दौरा किया। संग्रहालय में प्रदर्शित हाथकरघा गतिविधियों और इस शिल्प के क्रमिक विकास की प्रदर्शनी ने मुख्यमंत्री को विशेष रूप से प्रभावित किया। उन्होंने यहाँ तैयार होने वाले पारंपरिक परिधानों जैसे मेखला चादर, साड़ियां, कुर्ते और गमछे की निर्माण पद्धति को भी समझा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इस भ्रमण का उद्देश्य अन्य राज्यों की श्रेष्ठ पारंपरिक कलाओं और कुटीर उद्योगों की कार्यप्रणाली को समझना और उनके अनुभवों से प्रदेश के शिल्प क्षेत्र को लाभान्वित करना है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

Share this story