मप्र के ग्वालियर में दारुल कुरआन मदरसे का बाल आयोग ने किया औचक निरीक्षण, 26 बच्चे रेस्क्यू
- निरीक्षण में मिलीं कई खामियां
ग्वालियर, 23 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश राज्य बाल अधिकार सरंक्षण आयोग की टीम ने शुक्रवार को ग्वालियर में एजी ऑफिस के पास स्थित दारूल कुरआन मदरसे का औचक निरीक्षण किया। यहां से आयोग की अध्यक्ष ने महिला बाल विकास विभाग व बाल कल्याण समिति के साथ 26 बच्चों को रेस्क्यू कराया। मौके पर जब मदरसे संचालक से दस्तावेज और मान्यता मांगी गई तो कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया जा सका।
मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा के नेतृत्व में शुक्रवार को झांसी रोड इलाका स्थित एजी ऑफिस के पास संचालित दारुल कुरआन मदरसे का औचक निरीक्षण किया गया। इस दौरान व्यवस्थाओं में कई गंभीर खामियां पाई गईं। बच्चे औपचारिक स्कूली शिक्षा से दूर पाए गए। आयोग की टीम ने मौके से 18 लड़कों और 8 लड़कियों समेत 26 बच्चों को रेस्क्यू कर बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की सुपुर्दगी में सौंप दिया है।
बाल कल्याण समिति को मिली थी सूचना
दरअसल, बाल कल्याण समिति को सूचना मिली थी कि एजी ऑफिस के पास अंजुमन इस्लाहे मुआशरा समिति द्वारा संचालित दारूल कुरआन मदरसे में गैर मान्यता के अवैध ढंग से बच्चों को रखा जा रहा था। सूचना पर राज्य बाल सरंक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने खुद जाकर अधिकारियों के साथ छापामार कार्रवाई की। यहां पहुंचने के बाद पूरे मदरसे का निरीक्षण किया गया और रिकार्ड मांगा गया। यहां अलग अलग कक्ष बने थे और बच्चों के लिए रहने की व्यवस्था थी।
निरीक्षण के दौरान पाया कि सुरक्षा व देखरेख की कोई व्यवस्था नहीं थी। शुक्रवार को दोपहर से शाम तक चली कार्रवाई के दौरान मदरसे का प्रबंधन कोई दस्तावेज नहीं दे सका। वहीं मदरसा प्रबंधन ने मौके पर बच्चों को फौरन छोड़ने की मांग की और कहा कि दस्तावेज देने में समय लगता है।
पूछताछ में कुछ बच्चों ने कथित तौर पर आयोग की अध्यक्ष डॉ निवेदिता शर्मा को बताया कि उन्हें यहां अच्छा नहीं लगता है और कुछ लोगों द्वारा मारपीट किए जाने की बात भी बताई। मदरसे में लगे सीसीटीवी कैमरे भी चालू नहीं होने की स्थिति पर आयोग की अध्यक्ष नाराजगी जाहिर की है। बच्चों से 500 से 800 रुपये तक फीस लिए जाने की बात भी सामने आई है। एक कमरे में रखी किताबों को लेकर भी जांच की गई। आयोग की अध्यक्ष ने कुछ हिंदी और उर्दू की किताबें जब्त की हैं। हिंदी में लिखी कुछ किताबों में हिंदू, यहूदी और ईसाई धर्म के खिलाफ सामग्री होने का दावा किया गया है। किताबों की वास्तविक सामग्री और उसमें क्या पढ़ाया जा रहा था, इसकी पुष्टि की भी जांच की जा रही है।
कमरों में बंद मिलीं बच्चियां, अधिकारियों से छिपाया
राज्य बाल अधिकार सरंक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने बताया कि मदरसे को लेकर शिकायत मिली थी कि यहां अवैध रूप से बालक बालिकाओं को रखा जा रहा है। निरीक्षण व जांच के बाद सामने आया कि मदरसा प्रबंधन पर कोई मान्यता नहीं है। तीन बच्चियां कमरे में बंद मिलीं जिसकी जानकारी यहां के प्रबंधन ने नहीं दी थी। जांच के दौरान यह पता चला कि कुछ बच्चियां कमरे में हैं।
बाल आयोग के अनुसार, मदरसे में ग्वालियर-चंबल संभाग के अलावा पड़ोसी राज्य राजस्थान के बच्चे भी रह रहे थे। रिकॉर्ड के मुताबिक मदरसे में 15 बच्चियों और 42 बच्चों का रजिस्ट्रेशन है। हालांकि, जांच में यह बात सामने आई कि कई बच्चे नियमित स्कूल नहीं जा रहे हैं।
दूसरी ओर, मदरसा प्रबंधन ने आयोग की इस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया है। मदरसे के शिक्षक मोहम्मद शकीर का कहना है कि इमारत अभी निर्माणाधीन है, जिसके कारण कुछ अस्थायी कमियां हैं और उन्हें जल्द दुरुस्त किया जा रहा है। उन्होंने इस कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण और 'टारगेटेड' करार दिया।
परिजनों ने भी जताई आपत्ति
कार्रवाई की खबर मिलते ही बच्चों के परिजन भी मौके पर पहुंचे और विरोध दर्ज कराया। परिजनों का कहना है कि उन्हें बच्चों के रहने, खाने और पढ़ाई की व्यवस्था को लेकर कोई शिकायत नहीं थी, इसके बावजूद बच्चों को जबरन वहां से हटाया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

