भोपाल मेट्रो की बढ़ेगी रफ्तार, सीएमआरएस ने जांचा सिग्नलिंग सिस्टम, ट्रैक का किया निरीक्षण

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भोपाल मेट्रो की बढ़ेगी रफ्तार, सीएमआरएस ने जांचा सिग्नलिंग सिस्टम, ट्रैक का किया निरीक्षण


भोपाल मेट्रो की बढ़ेगी रफ्तार, सीएमआरएस ने जांचा सिग्नलिंग सिस्टम, ट्रैक का किया निरीक्षण


भोपाल, 25 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में संचालित मेट्रो जल्द ही यात्रियों को तेज और अधिक नियमित सेवा देने की ओर बढ़ रही है। मेट्रो के सिग्नलिंग सिस्टम की जांच करने के लिए भोपाल आई कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) की टीम गुरुवार को ट्रैक पर उतरी। दो टीमों ने अलग-अलग मेट्रो में सवार होकर निरीक्षण किया।

गुरुवार को मेट्रो परियोजना के लिए बेहद अहम दिन रहा। सीएमआरएस की टीम ने नए सिग्नलिंग सिस्टम का विस्तृत सुरक्षा निरीक्षण किया। सुभाष नगर से एम्स तक के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर हुए निरीक्षण के दौरान पहली बार दो मेट्रो ट्रेनों को एक ही ट्रैक पर आमने-सामने लाकर करीब 30 मिनट तक सिस्टम की कार्यक्षमता जांची गई।

अफसरों के मुताबिक, टीमें देख रही है कि दो टीमें यदि आमने-सामने आ जाए तो सिस्टम कैसे काम करेगा? अचानक ब्रेक, स्पीड समेत अन्य बिंदुओं पर भी जांच की जा रही है। मेट्रो प्रबंधन के मुताबिक, निरीक्षण के बाद टीम 'ओके' रिपोर्ट देगी। इसके बाद सिग्नलिंग सिस्टम चालू हो जाएंगे। जिससे मेट्रो का नया शेड्यूल और टाइमिंग तय होगी। जुलाई में सिग्नलिंग सिस्टम चालू होने के बाद नया शेड्यूल जारी होगा।

सीएमआरएस नीलाभ्र सेनगुप्ता ने सबसे पहले सुभाष नगर स्थित मेट्रो डिपो में बने ऑपरेशन्स कंट्रोल सेंटर (ओसीसी) और डिपो कंट्रोल सेंटर का निरीक्षण किया। यहां ट्रेनों की लाइव मॉनिटरिंग, कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम, सिग्नलिंग नेटवर्क और परिचालन सुरक्षा व्यवस्थाओं की बारीकी से जांच की गई। निरीक्षण के दौरान ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम, इंटरलॉकिंग सिस्टम, कम्युनिकेशन नेटवर्क, पॉइंट मशीन, आपातकालीन ब्रेकिंग सिस्टम और विभिन्न सुरक्षा उपकरणों की कार्यप्रणाली का परीक्षण किया गया। अधिकारियों ने यह भी प्रदर्शित किया कि किसी तकनीकी खराबी या आपात स्थिति में सिस्टम किस तरह सुरक्षित ढंग से काम करेगा।

ट्रेन में बैठकर किया कॉरिडोर का निरीक्षण

सीएमआरएस टीम ने सुभाष नगर स्टेशन से एम्स स्टेशन तक ट्रेन में सफर कर पूरे कॉरिडोर का निरीक्षण किया। इस दौरान स्टेशनों पर उपलब्ध सिग्नलिंग सुविधाओं, परिचालन सुरक्षा मानकों और तकनीकी व्यवस्थाओं को परखा गया। रानी कमलापति और एमपी नगर स्टेशन के बीच विशेष परीक्षण के दौरान दो मेट्रो ट्रेनों को एक ही ट्रैक पर आमने-सामने लाया गया। करीब आधे घंटे तक चले इस ट्रायल में यह देखा गया कि ऐसी स्थिति में सिग्नलिंग सिस्टम कैसे प्रतिक्रिया देता है, ट्रेन की गति कैसे नियंत्रित होती है और आवश्यकता पड़ने पर ब्रेकिंग सिस्टम कितनी तेजी से सक्रिय होता है।

दोनों ट्रैक पर दौड़ेगी मेट्रो

फिलहाल भोपाल मेट्रो बिना पूर्ण सिग्नलिंग सिस्टम के संचालित हो रही है। इसी कारण ट्रेनें केवल एक ट्रैक का उपयोग कर रही हैं और उसी ट्रैक से वापस लौटती हैं। नई प्रणाली शुरू होने के बाद अप और डाउन दोनों ट्रैक पर एक साथ संचालन संभव होगा। इससे ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी, फेरे अधिक होंगे और यात्रियों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वर्तमान में मेट्रो की फ्रीक्वेंसी लगभग 75 मिनट है, जिसे काफी कम किए जाने की तैयारी है।

800 करोड़ की सिग्नलिंग परियोजना

भोपाल और इंदौर मेट्रो नेटवर्क के लिए लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम विकसित किया जा रहा है। सुभाष नगर से एम्स तक के हिस्से में इसका पहला चरण पूरा हो चुका है। सीएमआरएस का निरीक्षण इसी चरण की अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना जा रहा है।

दिल्ली मेट्रो जैसी तकनीक मिलेगी

भोपाल मेट्रो में वही अत्याधुनिक सिग्नलिंग तकनीक लागू की जा रही है जो दिल्ली मेट्रो में उपयोग होती है। यह तकनीक ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने, गति नियंत्रित करने, ऑटोमेटिक संचालन और आपातकालीन नियंत्रण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराती है। इसके लागू होने के बाद मेट्रो अपनी पूर्ण क्षमता के साथ संचालित हो सकेगी।

चेयरमैन ने ली दोनों परियोजनाओं की समीक्षा

इसी दौरान एमपीएमआरसीएल के चेयरमैन जयदीप ने सुभाष नगर डिपो पहुंचकर भोपाल और इंदौर मेट्रो परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने निर्माण कार्यों, तकनीकी तैयारियों और आगामी कार्ययोजना की जानकारी ली। समीक्षा बैठक में प्रबंध संचालक एस. कृष्ण चैतन्य ने दोनों परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजनाओं का प्रस्तुतीकरण किया। चेयरमैन ने अधिकारियों और कार्यदायी एजेंसियों को गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए सभी शेष कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

मेट्रो प्रबंधन के अनुसार निरीक्षण और परीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद 26 जून से मेट्रो सेवा फिर अपने निर्धारित समय पर शुरू हो जाएगी। वहीं जुलाई में सिग्नलिंग सिस्टम पूरी तरह लागू होने के बाद नया टाइम टेबल जारी किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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