मप्र की ऐतिहासिक भोजशाला का विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, मुस्लिम पक्ष ने हाई कोर्ट के फैसले को दी चुनौती

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मप्र की ऐतिहासिक भोजशाला का विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, मुस्लिम पक्ष ने हाई कोर्ट के फैसले को दी चुनौती


भोपाल, 21 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के धार जिला मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर चल रहे विवाद में मुस्लिम पक्ष ने अब उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर मप्र उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ द्वारा दिए गए फैसले को चुनौती देते हुए मुस्लिम पक्ष ने गुरुवार रात करीब 8:30 बजे उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की है।

मुस्लिम समाज के सदर अब्दुल समद ने इस बारे में बताया कि उच्च न्यायालय के फैसले से समाज में मायूसी है। इस फैसले को एकतरफा बताते हुए मुस्लिम पक्ष ने इसके खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया है। उनकी ओर से याचिका दायर कर दी गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद उच्चतम न्यायालय में जल्द सुनवाई करने और उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाने की मांग करेंगे। समद का कहना है कि कुछ महत्वपूर्ण तथ्य हाई कोर्ट के समक्ष सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किए गए।

सुप्रीम कोर्ट से है हमें उम्मीदः शहर काजी

शहर काजी वकार सादिक ने उच्च न्यायालय के हालिया फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुस्लिम समाज हमेशा से न्यायपालिका का सम्मान करता आया है। उन्होंने कहा कि फैसले के विरोध में समाज की ओर से उच्चतम न्यायालय में एसएलपी दायर कर दी गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने भी पक्ष को मजबूती से रखा है और पूरा भरोसा जताया है कि उच्चतम न्यायालय से न्याय मिलेगा।

उन्होंने कहा कि जब उच्चतम न्यायालय से राहत और स्टे मिलेगा, तब मुस्लिम समाज सम्मान के साथ पहले की तरह नमाज अदा करेगा। साथ ही शुक्रवार को लेकर प्रशासन द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन करने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि सभी समुदाय शांति और सौहार्द बनाए रखें। शहर हमारा अपना है, इसलिए अमन-चैन और भाईचारे को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

कानूनी दायरे में रहकर लड़ाई जारी रहेगी

याचिका दायरकर्ता अब्दुल समद के अनुसार, कमाल मौला मस्जिद में पिछले लगभग 700 वर्षों से लगातार जुमे की नमाज अदा की जाती रही है। इस ऐतिहासिक और धार्मिक परंपरा को रोके जाने से समाज को गहरा दुख पहुंचा है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि वे इस पूरी लड़ाई को पूरी तरह संवैधानिक और कानूनी दायरे में रहकर ही लड़ेंगे।

शहर में अमन-चैन बनाए रखने के लिए समाज के युवाओं और बुजुर्गों से विशेष अपील की गई है। शहर का माहौल किसी भी सूरत में नहीं बिगड़ना चाहिए। लोग किसी भी तरह की अफवाह या बहकावे में न आएं। कानून-व्यवस्था का सम्मान करते हुए सभी लोग अपने-अपने मोहल्लों और स्थानीय मस्जिदों में शांतिपूर्वक इबादत करें। समुदाय के लोगों से गुजारिश की गई है कि वे कमाल मौला मस्जिद के हक में और न्याय के लिए विशेष दुआ करें।

उन्होंने भारत के संविधान और न्यायपालिका के प्रति अपनी अटूट निष्ठा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि देश की सर्वोच्च अदालत से उन्हें पूरा न्याय मिलने की उम्मीद है और वे केवल कानूनी व शांतिपूर्ण तरीकों से ही अपनी बात आगे रखेंगे।

भोजशाला विवाद को लेकर पहले से ही प्रदेश की राजनीति और धार्मिक संगठनों में हलचल बनी हुई है। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि उच्च न्यायालय के आदेश से उनके अधिकार प्रभावित हो रहे हैं, इसलिए उच्चतम न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की गई है। वहीं, हिंदू पक्ष इस मामले में उच्च न्यायालय के फैसले को उचित बता रहा है। अब सभी की नजरें उच्चतम न्यायालय की संभावित सुनवाई पर टिकी हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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