मप्र विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पेश, मंगलवार को होगी चर्चा

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मप्र विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पेश, मंगलवार को होगी चर्चा


- सदन में एक साथ 14 विधेयक रखे जाने पर कांग्रेस विधायकों को आपत्ति, उज्जैन जमीन खरीदी मामले पर हंगामा

भोपाल, 20 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को ही राज्य सरकार ने सदन में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक 2026 पेश कर दिया है। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि इस पर कल चर्चा कराई जाएगी। इसके बाद आगे की कार्यवाही होगी।

इससे पहले सदन में उज्जैन जमीन खरीदी मामले पर चर्चा को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के विधायकों का शोर-शराबा जारी रहा। इसके चलते विधानसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित की गई। दोबारा कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर राज्य सरकार ने एक के बाद एक कई विधेयक पेश किए। मंत्रियों ने विभागीय पत्रों को पटल पर रखने की कार्यवाही पूरी की।

इनमें मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता 2026, मध्य प्रदेश निरसन विधेयक 2026, मध्य प्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक, 2026, मध्य प्रदेश राजमार्ग (संशोधन) विधेयक 2026, मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक 2026, मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2026, मध्य प्रदेश धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026, मध्य प्रदेश कोड ऑन एम्पावरिंग वर्क स्पेसेज 2026, मध्य प्रदेश श्रम शक्ति संहिता 2026, मध्य प्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, 2026, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता संशोधन विधेयक 2026 शामिल हैं।

मंत्री गौतम टेटवाल ने मध्य प्रदेश पंचायती राज और ग्राम स्वराज संशोधन अध्यादेश 2026, मध्य प्रदेश उपकर संशोधन अध्यादेश 2026 सदन के पटल पर रखे। इसके बाद उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, राजेंद्र शुक्ल, उदय प्रताप सिंह तोमर, चैतन्य कुमार काश्यप और इंदर सिंह परमार ने विभागीय पत्रों को पटल पर रखने की कार्यवाही की। मंत्री उदय प्रताप सिंह और चैतन्य कुमार काश्यप के स्थान पर मंत्री कृष्णा गौर ने पत्रों को पटल पर रखा।

दरअसल, विधानसभा सचिवालय ने आज की पूरक कार्य सूची जारी करते हुए 14 विधेयकों की जानकारी सदन को दी। एक साथ इतने विधेयक पेश किए जाने पर कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने आपत्ति जताई। उन्होंने अध्यक्ष से सवाल किया कि जब यह विधेयक कार्य सूची में शामिल नहीं थे तो अचानक इन्हें क्यों लाया गया है? इस पर इस पर विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने कहा कि कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में इस पर चर्चा हुई थी। इसके बाद यह विधेयक सदन में ले आए हैं। कल इन पर चर्चा होगी। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस मुद्दे पर कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने कहा कि बिना सदस्यों को जानकारी दिए इस प्रकार की प्रक्रिया गलत है। सदन को विश्वास में नहीं लिया गया और ऐसा लगातार हो रहा है।

संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि संशोधित कार्य सूची का प्रावधान पहले से है। अभी सदन के पटल पर विधेयक रखे गए हैं। इनकी प्रति आपको उपलब्ध कराई जाएंगी। सभी को चर्चा के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पॉइंट ऑफ आर्डर लिया। उन्होंने आपत्ति जताई कि सदन में जब कांग्रेस सदस्यों को बोलना होता है, तो सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाने का हवाला दिया जाता है लेकिन जब भाजपा के सदस्यों को बोलना होता है तो कार्यवाही आगे बढ़ाने के बाद भी पीछे आ जाती है। यह दोहरी नीति है। इसमें अध्यक्ष को नियम स्पष्ट रखना चाहिए।

दरअसल, कांग्रेस विधायक देवेंद्र पटेल की अनुपस्थिति के चलते उनके ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हो पाई थी। इस पर कांग्रेस विधायक सोहनलाल वाल्मीकि ने कहा कि उन्होंने भी सूचना दी थी और पटेल के प्रस्ताव पर चर्चा करना चाह रहे थे, लेकिन संसदीय कार्य मंत्री ने यह कहकर इनकार कर दिया था कि विधानसभा की गाड़ी आगे बढ़ गई है, पीछे नहीं लौटेगी।

उज्जैन जमीन खरीदी पर हंगामा, कार्यवाही दोपहर 3 बजे तक स्थगित

इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार द्वारा उज्जैन में जमीन खरीदी के मामले को लेकर लगाए गए स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करने की जानकारी सदन में दी। इस पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आपत्ति जताते हुए कहा कि यह गलत बात है। सरकार को जवाब देना चाहिए। इसके बाद दोनों दलों के विधायक बोलने लगे। सदन में शोर-शराबे की स्थिति को देखते हुए स्पीकर ने कार्यवाही दोपहर 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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