मप्र में ऑनलाइन हुई तीन दिवसीय ग्रीष्मकालीन गणना में मिले 10 हजार 742 गिद्ध

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मप्र में ऑनलाइन हुई तीन दिवसीय ग्रीष्मकालीन गणना में मिले 10 हजार 742 गिद्ध


मप्र में ऑनलाइन हुई तीन दिवसीय ग्रीष्मकालीन गणना में मिले 10 हजार 742 गिद्ध


भोपाल, 24 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश में इस वर्ष तीन दिवसीय ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना रविवार को पूरी हो गई। एप के माध्यम से ऑनलाइन की गणना का कार्य विभिन्न वनमंडलों एवं टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यानों में किया गया। इस दौरान प्रदेशभर में 10 हजार 742 गिद्ध पाए गए, जिसमें 9394 वयस्क एवं 1348 किशोर गिद्ध शामिल हैं।

जनसम्पर्क अधिकारी केके जोशी ने रविवार को बताया कि प्रदेश व्यापी गिद्ध गणना-2026-27 के अंतर्गत ग्रीष्मकालीन गणना 22 मई से 24 मई 2026 तक सूर्योदय से प्रातः 9 बजे तक प्रदेश के सभी 16 वृत्त, 9 टाइगर रिजर्व, वन विकास निगम के क्षेत्रों एवं अन्य संरक्षित क्षेत्रों में की गई। वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के अतिरिक्त स्वयंसेवकों के सहयोग से गिद्ध गणना का कार्य ऑनलाइन एप के माध्यम से किया गया है, जिससे आंकड़ों का संकलन शीघ्र हो पाया है।

जनसम्पर्क अधिकारी जोशी ने बताया कि मध्य प्रदेश में प्रदेशव्यापी गिद्ध गणना की शुरुआत वर्ष 2016 से की गई थी, जिसमें 7,028 गिद्धों का आंकलन किया गया था। विगत वर्ष 2025 में शीतकालीन एवं ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना की गई थी। इस वर्ष 2026 में भी शीतकालीन गणना की गई है। इस दौरान 9,509 गिद्ध पाए गए थे। इस वर्ष 10 हजार 742 गिद्ध की संख्या पिछले वर्ष की गिद्ध संख्या से लगभग 1200 ज्यादा है, जो कि बेहतर संरक्षण को इंगित करती है।

जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, गिद्धों की गणना के लिये 'ऑनलाइन एप' तैयार किया गया, जिसके माध्यम से गिद्धों की गणना की गई। 'एप' के माध्यम से गणना किये जाने पर आंकड़ों के संकलन एवं रिपोर्ट तुरंत लाइव प्राप्त होने से कार्य क्षमता में वृद्धि हुई है। एप के माध्यम से गणना किए जाने के लिये मास्टर ट्रेनर्स, अशासकीय संस्थाओं एवं अधिकारियों-कर्मचारियों को ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रदान किया गया था।

गिद्धों की गणना के लिये गणनाकर्मी एवं स्वयंसेवक आदि सुबह सूर्योदय के तत्काल बाद प्रथम चरण में चयनित गिद्धों के घोंसलों के समीप पहुंच जाते थे। उन्होंने घोंसलों के आसपास बैठे गिद्धों एवं उनके नवजातों की गणना कर ऐप में उसकी जानकारी दर्ज की। गणना में केवल आवास/विश्राम स्थलों पर बैठे हुए गिद्धों को ही गणना में लिया गया। उड़ते हुए गिद्धों को गणना में नहीं लिया गया। इस वर्ष वन विभाग के कर्मचारियों के साथ पूरे प्रदेश के विभिन्न स्थानों में पक्षी विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, छात्र एवं स्थानीय नागरिकों ने इस गणना में भाग लिया। कंट्रोल रूम वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में बनाया जाकर गणना के बाद डाटा संकलन का कार्य किया जा रहा है।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश पहले से चीता, टाइगर, तेंदुआ स्टेट है। अब यहां गिद्धों की संख्या भी बढ़ गई है। फरवरी में हुए सर्वे में गिद्धों की करीब सात प्रजाति पाई गई हैं। इनमें भारतीय गिद्ध, सिनेरियस गिद्ध, मिस्र गिद्ध (व्हाइट स्कैवेंजेर) और हिमालयन ग्रिफॉन जैसी प्रजातियां प्रमुख हैं। इस बार की गणना में यही प्रजातियां सामने आई हैं।

कभी विलुप्त होने की कगार पर थे गिद्ध

विशेषज्ञों के मुताबिक, गिद्ध जल्दी अपना साथी या मैटिंग पेयर नहीं बनाते हैं। यह पक्षी असल में नर्वस किस्म का जीव है। इस मामले में शर्मिला कहा जा सकता है। गिद्ध कभी विलुप्त होने की कगार पर थे। मप्र सहित देशभर में 'धरती के सफाई दूत' की संख्या बुरी तरह घटती जा रही थी, लेकिन अब प्रदेश में इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है।

वन विहार में 3 साल पहले हरियाणा से लाए गए थे गिद्ध

भोपाल के राष्ट्रीय उद्यान वन विहार में करीब तीन साल पहले हरियाणा से सफेद पीठ वाले 20 गिद्ध लाए गए थे। 1100 किलोमीटर की यात्रा करके यह भोपाल पहुंचे थे। वर्तमान में यह गिद्ध संरक्षण एवं संवर्धन केंद्र की एवरी में है। 20 व्हाइट रम वल्चर (सफेद पीठ वाले गिद्ध) में 5 नर और 5 मादा, 10 सब एडल्ट गिद्ध थे।

भोपाल के केरवा डैम में गिद्ध प्रजनन केंद्र की स्थापना के साथ वर्ष 2014 में गिद्धों के संरक्षण के प्रयास शुरू हुए थे। मार्च 2017 में यहां पहले सफल प्रजनन के रूप में सफेद पीठ वाले गिद्ध का चूजा पैदा हुआ था। यहां सफेद पीठ वाले और लंबी चोंच वाले गिद्धों का प्रजनन किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, गिद्धों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास के लिए पन्ना (पवई), रायसेन (हलाली डैम), शिवपुरी और गांधीसागर अभयारण्य (मंदसौर) में भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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