दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण घटाने के लिए ‘परिवर्तन’ योजना तेज, 2.31 लाख पुराने ट्रक-बसों को बदलने का लक्ष्य

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दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण घटाने के लिए ‘परिवर्तन’ योजना तेज, 2.31 लाख पुराने ट्रक-बसों को बदलने का लक्ष्य


नई दिल्ली, 28 अगस्त (हि.स.)। केंद्र सरकार ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने और पुराने वाणिज्यिक वाहनों को पर्यावरण-अनुकूल वाहनों से बदलने के लिए ‘परिवर्तन’ योजना के क्रियान्वयन को तेज कर दिया है। सरकार का लक्ष्य योजना के तहत पात्र 2,31,961 पुराने ट्रकों और बसों को नए वाहनों से बदलना है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इसके लिए दो वर्ष में पूरा होने वाले लक्ष्य को एक वर्ष में हासिल करने का रोडमैप तैयार किया है। योजना के तहत नए वाहनों की खरीद पर वाहन मालिकों को कई स्तरों पर वित्तीय प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने शुक्रवार को यहां परिवहन भवन में पत्रकार वार्ता में बताया कि केंद्र सरकार की ओर से जून में मंजूर और जुलाई में अधिसूचित ‘परिवर्तन’ योजना को दिल्ली-एनसीआर में तेजी से लागू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह पहली ऐसी बहु-हितधारक एकीकृत योजना है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों के विभागों के साथ वाहन निर्माता, डीलर, बैंक तथा तेल एवं गैस कंपनियां एक साझा डिजिटल मंच पर जुड़ी हैं।

मंत्रालय के सचिव ने बताया कि योजना के क्रियान्वयन के लिए एनसीआर के 37 जिलों में जिलाधिकारियों के नेतृत्व में जमीनी अभियान चलाया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाणिज्यिक वाहनों को तेजी से हटाकर अगले कुछ महीनों में वायु गुणवत्ता पर इसका असर दिखाई देने लगे।

‘परिवर्तन’ यानी ‘प्रोग्राम फॉर एक्सेलेरेटेड रिन्यूअल एंड इंसेंटिवाइजेशन ऑफ व्हीकल एसेट्स फॉर रिड्यूसिंग ट्रांसपोर्ट एयर पॉल्यूशन एंड नेटवर्क एमिशंस’ योजना का कुल परिव्यय 9,585 करोड़ रुपये है। इसमें केंद्र सरकार की बजटीय सहायता 5,041 करोड़ रुपये है। योजना के दायरे में 30 अप्रैल 2026 तक दिल्ली-एनसीआर के 37 जिलों में पंजीकृत बीएस-4 और उससे पुराने ट्रक तथा बस शामिल हैं।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार योजना के लिए पात्र 2,31,961 पुराने वाहनों में 2,00,121 ट्रक और 31,840 बसें हैं। इनमें हरियाणा के 1,06,720, दिल्ली के 78,503, उत्तर प्रदेश के 40,176 और राजस्थान के 6,562 वाहन शामिल हैं। मंत्रालय के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर के कुल वाहन बेड़े में ट्रकों और बसों की हिस्सेदारी करीब 3.1 प्रतिशत है, लेकिन परिवहन क्षेत्र से होने वाले पीएम 2.5 उत्सर्जन में इनका योगदान 36 प्रतिशत से अधिक है।

सरकार ने वाहन मालिकों के लिए योजना को आकर्षक बनाने के उद्देश्य से एक्स-शोरूम कीमत के करीब 25 से 30 प्रतिशत तक का संयुक्त वित्तीय लाभ उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। योजना में शामिल 15 प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियां एक्स-शोरूम कीमत पर कम से कम आठ प्रतिशत की सीधी छूट दे रही हैं। ये कंपनियां कुल बाजार बिक्री के करीब 96 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करती हैं।

इसके अलावा नए वाहन के लिए लिए गए ऋण पर पांच वर्षों तक पांच प्रतिशत ब्याज सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। डीजल और सीएनजी वाहनों के लिए पांच वर्ष तक हर महीने 1,200 से 4,800 रुपये तक के ईंधन वाउचर दिए जाएंगे। इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों को इसके स्थान पर 64,000 रुपये से 2.56 लाख रुपये तक का एकमुश्त अग्रिम वित्तीय लाभ मिलेगा।

योजना के तहत दिल्ली-एनसीआर के चारों राज्यों ने नए वाहनों के पंजीकरण पर 10 वर्ष तक मोटर वाहन कर में 100 प्रतिशत छूट और पंजीकरण शुल्क माफ करने की व्यवस्था की है। पुराने वाहन को स्क्रैप कराते समय एक वर्ष से अधिक पुरानी देनदारियों को भी माफ करने का प्रावधान किया गया है। इस्तेमाल किया हुआ बीएस-6 वाहन खरीदने वाले लाभार्थियों को भी 10 वर्ष तक मोटर वाहन कर में 50 प्रतिशत छूट, पांच वर्ष तक ब्याज सब्सिडी और ईंधन वाउचर की सुविधा दी जाएगी।

नियमों के अनुसार, बीएस-3 और उससे पुराने वाहनों को पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा (आरवीएसएफ) में अनिवार्य रूप से स्क्रैप कराना होगा। बीएस-4 वाहनों को गैर-एनसीएपी शहरों में बेचने अथवा स्क्रैप करने का विकल्प दिया गया है। दिल्ली में नए हल्के वाणिज्यिक वाहनों के लिए केवल इलेक्ट्रिक वाहनों की अनुमति होगी। मध्यम और भारी वाहनों में बीएस-6 डीजल/सीएनजी या इलेक्ट्रिक वाहन खरीदे जा सकेंगे। दिल्ली में नई बसों के लिए सीएनजी या इलेक्ट्रिक विकल्प ही उपलब्ध होगा।

योजना के लिए केंद्रीकृत वन-स्टॉप ‘परिवर्तन’ पोर्टल तैयार किया गया है, ताकि वाहन मालिकों को अलग-अलग विभागों और कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। पोर्टल शुरू होने के एक महीने से भी कम समय में करीब 1,450 वाहन मालिक पंजीकरण करा चुके हैं। 35 से अधिक पुराने वाहन स्क्रैप किए जा चुके हैं, जबकि 50 से अधिक पुराने वाहन बेचे गए हैं और नए वाहनों की खरीद तथा पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। राजस्थान के अलवर में 19 अगस्त को महेंद्र सिंह योजना के तहत नया वाहन हासिल करने वाले पहले वाहन मालिक बने।

सरकार ने अक्टूबर के अंत तक 25,000 पंजीकरण कराने का तत्काल लक्ष्य रखा है। योजना के वित्तीय तंत्र को सुगम बनाने के लिए केनरा बैंक को नोडल बैंक बनाया गया है। एनसीआर में 3,806 शाखाओं वाले 42 सार्वजनिक और निजी बैंक तथा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) पोर्टल से जुड़ चुकी हैं।

मंत्रालय के अनुसार, योजना के क्रियान्वयन में आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय, एनसीआर योजना बोर्ड, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकारों के अलावा वाहन निर्माता, डीलर, बैंक और तेल एवं गैस विपणन कंपनियां शामिल हैं। पत्रकार वार्ता में सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के महानिदेशक राजेश मेनन भी मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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