राष्ट्रीय वॉलीबॉल टूर्नामेंट का शुभारंभ कर प्रधानमंत्री ने कहा- टीम के समन्वय से मिलती है जीत
नई दिल्ली, 04 जनवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि वॉलीबॉल का खेल संतुलन, संयोग और संकल्पशक्ति की परीक्षा है। खिलाड़ियों का मूलमंत्र टीम फर्स्ट होता है, जहां अलग-अलग कौशल के बावजूद हर खिलाड़ी टीम की जीत के लिए खेलता है। उन्होंने वॉलीबॉल और देश की उन्नति में समानताएं बताते हुए कहा कि कोई भी जीत अकेले नहीं होती, यह समन्वय, विश्वास, समर्पण और टीम की तत्परता पर निर्भर करती है। देश भी इसी टीम भावना और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह बातें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वाराणसी में 72वें राष्ट्रीय वॉलीबॉल टूर्नामेंट का उद्घाटन के दौरान कहीं। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित रहे। टूर्नामेंट में 28 राज्यों और संस्थानों का प्रतिनिधित्व करने वाली 58 टीमों के 1,000 से अधिक खिलाड़ी, कुल 1,000+ राष्ट्रीयस्तर के प्रतिभागी, हिस्सा ले रहे हैं। आयोजन 4 से 11 जनवरी 2026 तक वाराणसी स्थित डॉ. संपूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम में संपन्न होगा, जिसका निर्माण हाल ही में पूरा हुआ है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी में वॉलीबॉल चैम्पियनशिप का शुभारंभ एक भारत श्रेष्ठ भारत की सुंदर तस्वीर प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने बनारसी शैली में कहा कि अगर बनारस को जानना है तो बनारस आना पड़ेगा। वाराणसी खेलप्रेमियों का नगर है, जहां कुश्ती, मुक्केबाजी, नौकायान, कबड्डी जैसे खेल लोकप्रिय हैं और बनारस ने कई राष्ट्रीय खिलाड़ी दिए हैं। उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय, यूपी कॉलेज, काशी विद्यापीठ जैसे संस्थानों की खेल परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि काशी हजारों वर्षों से विज्ञान और कला की साधना का सत्कार करती आई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय वॉलीबॉल चैम्पियनशिप के दौरान वाराणसी का उत्साह चरम पर रहेगा और खिलाड़ियों को काशी की आतिथ्य परंपरा अनुभव करने का अवसर मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि साल 2014 के बाद से खेलों के प्रति सरकार और समाज का दृष्टिकोण बदला है। पहले खेलों को लेकर उदासीनता के कारण खिलाड़ियों का भविष्य अनिश्चित रहता था, लेकिन पिछले दशक में खेल क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई है। सरकार ने खेल बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की है और आज भारत का खेल मॉडल एथलीट-केंद्रित बन चुका है, जिसमें प्रतिभा की पहचान, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, पोषण और पारदर्शी चयन प्रक्रिया को सर्वोच्च महत्व दिया जा रहा है। टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम और अन्य योजनाएं खिलाड़ियों को वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रही हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने पिछले दशक में 20 से अधिक बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन सफलतापूर्वक आयोजित किए हैं, जिनमें फीफा अंडर-17 विश्व कप, हॉकी विश्व कप और प्रमुख शतरंज प्रतियोगिताएँ शामिल हैं। उन्होंने घोषणा की कि साल 2030 का कॉमनवेल्थ गेम्स भारत में होगा और देश साल 2036 के ओलंपिक की मेजबानी के लिए भी मजबूत प्रयास कर रहा है, जिससे युवा खिलाड़ियों को अधिक अवसर मिलेंगे और खेल पारिस्थितिकी तंत्र को नई मजबूती मिलेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जिस सिगरा स्टेडियम में यह प्रतियोगिता हो रही है, वह अब आधुनिक खेल सुविधाओं से सुसज्जित हो चुका है। वाराणसी में नए खेल परिसरों और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का विस्तार हो रहा है, जिससे आसपास के जिलों के खिलाड़ियों को भी उच्च स्तरीय प्रशिक्षण का लाभ मिल रहा है। इस तरह के बड़े खेल आयोजन न केवल खिलाड़ियों को मंच देते हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति प्रदान करते हैं और शहर की राष्ट्रीय प्रोफ़ाइल को और मजबूत बनाते हैं। प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वाराणसी की मिट्टी से निकलने वाला हर स्पाइक, हर ब्लॉक और हर अंक भारत के खेल सपनों को नई ऊँचाई देगा। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से बाबा विश्वनाथ के दर्शन, गंगा में नौकायन और वाराणसी की विरासत को आत्मसात करने का भी आग्रह किया।
उल्लेखनीय है कि 72वें राष्ट्रीय वॉलीबॉल टूर्नामेंट की मेजबानी वाराणसी में खेल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और एथलेटिक विकास को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम है। यह आयोजन शहर को एक प्रमुख राष्ट्रीय खेल केंद्र के रूप में स्थापित करने की प्रक्रिया को और गति देता है। प्रतियोगिता में 58 टीमों के 1,000 से अधिक खिलाड़ियों की भागीदारी भारतीय वॉलीबॉल में प्रतिस्पर्धा, खेल भावना और उभरती प्रतिभा का भव्य प्रदर्शन करेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

