हिमाचल में विक्रमादित्य सिंह की पोस्ट से आईएएस-आईपीएस एसोसिएशन नाराज
शिमला, 14 जनवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह की एक सोशल मीडिया पोस्ट से राज्य की अफसरशाही में भारी रोष फैल गया है। मंत्री ने यूपी और बिहार से आए कुछ आईएएस तथा आईपीएस अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा था कि वे “हिमाचलियत की धज्जियां उड़ा रहे हैं” तथा हिमाचल के हितों से उन्हें कोई सरोकार नहीं है। इस टिप्पणी को अधिकारियों ने अपनी निष्ठा, निष्पक्षता तथा संवैधानिक भूमिका पर सीधा हमला माना है।
इसके जवाब में बुधवार शाम इंडियन पुलिस सर्विसेज एसोसिएशन (हिमाचल प्रदेश) तथा हिमाचल प्रदेश आईएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन ने अलग-अलग सार्वजनिक बयान जारी कर मंत्री के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज किया है।
इंडियन पुलिस सर्विसेज़ एसोसिएशन (हिमाचल प्रदेश) ने बुधवार को हुई बैठक के बाद औपचारिक प्रस्ताव पारित करते हुए कहा कि मंत्री विक्रमादित्य सिंह का बयान हिमाचल में तैनात हिमाचली और गैर-हिमाचली अधिकारियों के बीच “कृत्रिम और अवांछित विभाजन” पैदा करने वाला है। एसोसिएशन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अखिल भारतीय सेवाएं संविधान द्वारा स्थापित संस्थाएं हैं, जिनका मूल उद्देश्य राष्ट्रीय एकता को मज़बूत करना और देशभर में निष्पक्ष, पेशेवर और एकीकृत प्रशासन उपलब्ध कराना है। ऐसे में किसी अधिकारी की नीयत, प्रतिबद्धता या वैधता पर केवल उसके मूल राज्य के आधार पर सवाल उठाना न सिर्फ़ तथ्यात्मक रूप से ग़लत है बल्कि अत्यंत हतोत्साहित करने वाला भी है।
आईपीएस एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि इस तरह के बयान पुलिस सेवा के मनोबल को नुकसान पहुंचा सकते हैं, पुलिस तंत्र के भीतर अविश्वास पैदा कर सकते हैं और संस्थागत एकजुटता को कमजोर कर सकते हैं। एसोसिएशन का कहना है कि इसका सीधा असर सार्वजनिक प्रशासन और सेवा वितरण पर पड़ सकता है। इसी पृष्ठभूमि में एसोसिएशन ने सरकार से आग्रह किया है कि इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया जाए, भविष्य में ऐसे बयान दोहराए न जाएं और सिविल सेवाओं की गरिमा, एकता और तटस्थता को बनाए रखा जाए। प्रस्ताव में यह मांग भी शामिल है कि मंत्री विक्रमादित्य सिंह के साथ किसी भी आईपीएस अधिकारी की तैनाती न की जाए।
इसी विवाद पर हिमाचल प्रदेश आईएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन ने भी आज शाम एक विस्तृत सार्वजनिक बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि हाल के दिनों में एक सेवारत कैबिनेट मंत्री द्वारा दिए गए बयान, जिनमें अन्य राज्यों विशेष रूप से यूपी और बिहार से आए अधिकारियों पर राज्य हित में काम न करने के आरोप लगाए गए, गहरी चिंता का विषय हैं। एसोसिएशन ने यह माना कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रशासन की जवाबदेही तय करने और आलोचना करने का अधिकार है, लेकिन अधिकारियों को उनके मूल राज्य के आधार पर चिन्हित करना अनुचित है और इससे सिविल सेवाओं की निष्पक्षता व तटस्थता पर सीधा असर पड़ता है।
आईएएस एसोसिएशन ने अपने बयान में ज़ोर देकर कहा कि हिमाचल प्रदेश में सेवा दे रहे सभी अधिकारी चाहे वे राज्य के मूल निवासी हों या अन्य राज्यों से आए हों, संविधान द्वारा गठित अखिल भारतीय सेवाओं का हिस्सा हैं। उनकी नियुक्ति, पोस्टिंग और कैडर आवंटन स्थापित संवैधानिक और वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत होता है तथा इसमें केंद्र सरकार की भी भूमिका होती है। ऐसे में प्रशासनिक कमियों को अधिकारियों की क्षेत्रीय पहचान से जोड़ना अखिल भारतीय सेवाओं की उस मूल भावना के विपरीत है, जिसे राष्ट्रीय एकता, प्रशासनिक निष्पक्षता और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था।
इस पूरे घटनाक्रम का बैकग्राउंड मंत्री विक्रमादित्य सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट और उसके बाद आयोजित की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ा है। अपनी पोस्ट और बयान में मंत्री ने कथित तौर पर यह संकेत दिया कि बाहर से आए कुछ अधिकारी हिमाचल की संस्कृति और हितों के प्रति संवेदनशील नहीं हैं।
विक्रमादित्य सिंह ने अपनी पोस्ट में लिखा कि हम उप मुख्य मंत्री हिमाचल प्रदेश के मंडी के अभिभाषण से सहमत है कुछ यूपी-बिहार के आला आईएएस/आईपीएस अधिकारी हिमाचल में हिमाचलियत की धज्जिया उड़ा रहे हैं, उन्हें हिमाचल से कोई ज्यादा सरोकार नहीं है। समय रहते हुए उनसे निपटने की आवश्यकता है नहीं तो हिमाचल के हित निपट जाएँगे। हम बाहर के राज्य के अधिकारियों का पूर्णतया सम्मान करते है पर उन्हें हिमाचली अधिकारियों से सीख लेने की आवश्यकता है, हिमाचल के हित के साथ कोई भी समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जब तक हिमाचल में हों हिमाचल के लोगों की सेवा करो, शासक बनने की गलती ना करों।
इस पोस्ट के सामने आते ही प्रशासनिक हलकों में असहजता फैल गई और मामला केवल नौकरशाही तक सीमित न रहकर राजनीतिक बहस में भी तब्दील हो गया। दिलचस्प बात यह है कि मंत्री विक्रमादित्य सिंह की इस टिप्पणी की आलोचना उनकी ही सरकार के दो अन्य मंत्रियों जगत सिंह नेगी और अनिरुद्ध सिंह भी सार्वजनिक रूप से कर चुके हैं। दोनों मंत्रियों ने कहा कि अधिकारियों को क्षेत्रीय आधार पर कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है और इससे सरकार व प्रशासन के बीच समन्वय पर असर पड़ता है।
उल्लेखनीय है कि विक्रमादित्य सिंह वर्तमान में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार में लोक निर्माण मंत्री हैं। 38 वर्षीय विक्रमादित्य सिंह हिमाचल प्रदेश के छह बार मुख्यमंत्री रहे दिवंगत वीरभद्र सिंह के पुत्र हैं। उनकी मां प्रतिभा सिंह पूर्व सांसद और हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष रह चुकी हैं, हालांकि लगभग दो महीने पहले उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद उनकी जगह नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति की गई। विक्रमादित्य सिंह दूसरी बार विधायक बने हैं और कांग्रेस में उन्हें एक प्रमुख युवा नेता के रूप में देखा जाता है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

