मुंबई में चीनी दूतावास के बाहर आंदोलन कर रहे तिब्बती शरणार्थी हिरासत में

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मुंबई, 03 अगस्त(हि.स.)। महाराष्ट्र के दक्षिण मुंबई के नरीमन पॉइंट स्थित चीनी वाणिज्य दूतावास (कॉन्सुलेट जनरल) के बाहर सोमवार को चीन के नए 'एथनिक यूनिटी एंड प्रोग्रेस प्रमोशन लॉ' के खिलाफ आंदोलन कर रहे दर्जनों तिब्बती शरणार्थियों को मुंबई पुलिस ने हिरासत में लिया और कानूनी कार्रवाई कर छोड़ दिया है। इस मामले की कानूनी कार्रवाई आजाद मैदान पुलिस स्टेशन की टीम ने किया है।

इस मामले पर कार्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारी ने बताया कि तिब्बती प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए और विरोध संबंधी तख्तियां लेकर चीनी दूतावास के बाहर एकत्र हुए थे। उनका कहना था कि यह कानून तिब्बती समुदाय की सांस्कृतिक, भाषाई और धार्मिक पहचान के लिए खतरा पैदा कर सकता है। यहां की स्थिति को देखते हुए मौके पर तैनात पुलिस ने हस्तक्षेप किया और दूतावास परिसर के निकट आंदोलन जारी रखने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

मुंबई के प्रदर्शन में महाराष्ट्र समेत देश के विभिन्न हिस्सों में रह रहे तिब्बती शरणार्थियों ने भाग लिया था। प्रदर्शनकारियों ने तिब्बत की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं पर इस कानून के संभावित प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की है।

उल्लेखनीय है कि यह विरोध प्रदर्शन चीन के नए कानून के खिलाफ तिब्बती संगठनों द्वारा चलाए जा रहे व्यापक अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है। चीन का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य विभिन्न जातीय समूहों के बीच एकता और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है। वहीं, कानून के आलोचकों का आरोप है कि इससे अल्पसंख्यक समुदायों के सांस्कृतिक और धार्मिक अधिकारों पर असर पड़ सकता है तथा समरसता एसिमिलेशन की नीति को बढ़ावा मिलेगा। चीन का 'एथनिक यूनिटी एंड प्रोग्रेस प्रमोशन लॉ' 12 मार्च 2026 को पारित किया गया था और 1 जुलाई 2026 से लागू हुआ था।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव

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