आज की पीढ़ी की बातों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए: मोहन भागवत
मुंबई, 06 अगस्त, (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार को मुंबई में कहा कि आज की युवा पीढ़ी सवाल पूछती है, बदलाव चाहती है और उसकी बातों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन के पीछे की पूरी सच्चाई का दावा करना आसान नहीं है, लेकिन वह नई पीढ़ी यानी जेनरेशन जेड (जेन-जी) पर पूरा भरोसा करते हैं।
सरसंघचालक मोहन भागवत आज मुंबई में आयोजित आईआईएमयूएन के एक कार्यक्रम में संस्थापक ऋषभ शाह के साथ बातचीत कर रहे थे। मोहन भागवत ने कहा, आंदोलन क्यों हुआ या नहीं, इसका पूरा जवाब न तो मेरे पास है और न ही आपके पास। मैं भी उपलब्ध जानकारी के आधार पर अपनी राय बना रहा हूं। मुझे नहीं पता कि क्या सच है और क्या झूठ, लेकिन यदि मुझसे जेन-जी पर आंख बंद करके भरोसा करने को कहा जाए, तो मैं उन पर भरोसा करूंगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन लोकतांत्रिक संवाद का एक माध्यम है। जब लोगों की बात नहीं सुनी जाती, तब विरोध-प्रदर्शन होते हैं। उन्होंने कहा कि हाल की घटनाएं गंभीर हैं और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता है।
मोहन भागवत ने कहा कि उनकी पीढ़ी बड़ों की बात बिना सवाल किए मान लेती थी, जबकि आज की जेन-जेड और जेन-अल्फा हर विषय पर सवाल पूछती हैं और तर्क चाहती हैं। उन्होंने कहा कि वह यह नहीं मानते कि युवाओं को आंदोलन नहीं करना चाहिए, लेकिन आंदोलन संविधान और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के दायरे में होने चाहिए। उन्होंने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान ने बदलाव के लोकतांत्रिक रास्ते बताए हैं और व्यवस्था में सुधार के लिए वैधानिक आंदोलन जरूरी हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि जेन-जेड और जेन-अल्फा पहले की पीढिय़ों की तुलना में अधिक ईमानदार हैं और उन्हें अपनापन तथा संवाद की जरूरत है।
शिक्षा व्यवस्था पर अपनी राय रखते हुए मोहन भागवत ने कहा कि शिक्षा कोई व्यावसायिक कारोबार नहीं, बल्कि समाज की मूल आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पैसा कमाना नहीं, बल्कि अगली पीढ़ी का निर्माण करना होना चाहिए। उन्होंने शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 6 प्रतिशत खर्च किए जाने की मांग को उचित बताते हुए कहा कि इस दिशा में लंबे समय से मांग उठती रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का पूरा बोझ केवल सरकार पर नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज को भी इसमें अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के मुद्दे पर भागवत ने कहा कि एलजीबीटी समुदाय समाज का हिस्सा है। उन्होंने समलैंगिक विवाह के संबंध में उपयुक्त कानूनी व्यवस्था बनाए जाने की आवश्यकता पर भी विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सामाजिक और कानूनी ढांचे में संतुलित सुधार की जरूरत है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव

