मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, भोपाल में चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर कांग्रेस नेताओं का धरना

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मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, भोपाल में चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर कांग्रेस नेताओं का धरना


मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, भोपाल में चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर कांग्रेस नेताओं का धरना


भाेपाल, 09 जून (हि.स.)।मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। इस निर्णय के विरोध में कांग्रेस ने मंगलवार रात राजधानी भोपाल स्थित चुनाव आयोग कार्यालय के सामने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया।

धरने में प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी सहित कई वरिष्ठ नेता, विधायक और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। कांग्रेस नेताओं ने इस फैसले को लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाला बताते हुए इसे “राजनीतिक दबाव में लिया गया निर्णय” करार दिया।

चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर नारेबाजी, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

धरने के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। “लोकतंत्र बचाओ”, “भाजपा जवाब दो” जैसे नारे और राम धुन पूरे क्षेत्र में गूंजते रहे। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि नामांकन रद्द करना निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के खिलाफ है और इसके पीछे राजनीतिक प्रभाव काम कर रहा है। नेताओं ने कहा कि पार्टी इस निर्णय को स्वीकार नहीं करेगी और इसके खिलाफ कानूनी तथा राजनीतिक दोनों स्तरों पर संघर्ष जारी रहेगा।

यूथ कांग्रेस का प्रदर्शन, पुतला दहन कर जताया विरोध

धरने से पहले यूथ कांग्रेस ने भी विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने भाेपाल स्थित कांग्रेस प्रदेश कार्यालय के सामने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा नेताओं के पुतले जलाए। इस दौरान भी सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी हुई और निर्णय को “राजनीतिक साजिश” बताया गया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस का तीखा हमला

देर शाम धरने से पहले कांग्रेस ने भोपाल प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि यह निर्णय लोकतंत्र की मूल भावना पर प्रहार है और भाजपा पूरे देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है। जीतू पटवारी ने कहा कि भाजपा महिला सम्मान और महिला आरक्षण की बात करती है, लेकिन मध्यप्रदेश में जो हुआ है उसने उनकी वास्तविक सोच उजागर कर दी है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक चुनावी मुद्दा नहीं बल्कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की लड़ाई है। पटवारी ने आरोप लगाया कि रिटर्निंग ऑफिसर और निर्वाचन अधिकारी की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठते हैं और यह निर्णय राजनीतिक दबाव का परिणाम प्रतीत होता है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि इस “लोकतंत्र पर हमले” के विरोध में कल प्रदेश कांग्रेस के सभी नेता और कार्यकर्ता भूख हड़ताल करेंगे।

प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने इसे “राज्यसभा सीट की चोरी” करार देते हुए चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक उम्मीदवार का मामला नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई है। प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा कि इस घटनाक्रम ने चुनाव आयोग की भूमिका और उसके अस्तित्व पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र की अवमानना बताते हुए कहा कि कांग्रेस इस निर्णय के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेगी और अंतिम समय तक संघर्ष जारी रहेगा।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सत्ता और तंत्र के दुरुपयोग से विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे “लोकतंत्र की हत्या” बताया। नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने कहा कि भाजपा को पहले से पता था कि कांग्रेस के पास 62 विधायकों का समर्थन है, इसलिए लगातार भ्रम फैलाने की कोशिश की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायकों और उनके परिवारों को परेशान किया गया तथा चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास हुआ। उन्होंने इसे केवल एक सीट का मामला नहीं बल्कि लोकतंत्र और संविधान की विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा बताया।

कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि जब भाजपा ने तीसरा उम्मीदवार उतारा तभी स्पष्ट हो गया था कि राजनीतिक दबाव की रणनीति अपनाई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक पुराने नोटिस को आधार बनाकर नामांकन रद्द किया गया, जबकि उनके अधिवक्ताओं की दलीलों को अनसुना कर दिया गया। नटराजन ने इसे लोकतंत्र और संविधान से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए कहा कि वे इस फैसले को कानूनी रूप से चुनौती देंगी।

कांग्रेस अधिवक्ता अजय गुप्ता ने कहा कि नामांकन निरस्त करने का आदेश पूरी तरह कानून और न्यायिक सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने बताया कि जिस मामले का हवाला दिया गया वह BNSS की धारा 223 के तहत केवल नोटिस की प्रक्रिया थी, जिसमें किसी अपराध का संज्ञान नहीं लिया गया था। न तो कोई आरोपी घोषित था और न ही कोई आपराधिक प्रक्रिया शुरू हुई थी। उन्होंने इसे “नॉन-स्पीकिंग ऑर्डर” बताते हुए कहा कि आदेश में कांग्रेस के प्रमुख कानूनी तर्कों पर विचार ही नहीं किया गया। पार्टी इस आदेश को न्यायालय में चुनौती देगी।

वरिष्ठ नेता जेपी धनोपिया ने कहा कि नामांकन के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज, शपथ पत्र और विधायकों के हस्ताक्षर विधिवत प्रस्तुत किए गए थे और किसी प्रकार की कमी नहीं थी। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया की कानूनी जांच के बाद ही नामांकन दाखिल किया गया था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि रिटर्निंग ऑफिसर की कार्यवाही में सेवानिवृत्त न्यायाधीश की भूमिका और शिकायतकर्ता के नाम को लेकर प्रक्रियागत विसंगतियां सामने आई हैं।

कांग्रेस का दावा: नामांकन रद्द करना अवैधानिक

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि नामांकन रद्द करने का निर्णय कानूनी रूप से सही नहीं है। उनका कहना था कि जिस आधार पर कार्रवाई की गई, वह आपराधिक श्रेणी में नहीं आता और न ही जानबूझकर कोई तथ्य छिपाया गया। कांग्रेस ने इसे “राजनीतिक दुष्टता” और “प्रक्रिया का दुरुपयोग” बताते हुए कहा कि विधानसभा स्तर पर राजनीतिक दबाव में निर्णय लिया गया।

नामांकन रद्द होने के बाद बढ़ा सियासी तनाव

दरअसल मंगलवार को रिटर्निंग ऑफिसर ने भाजपा की आपत्ति के आधार पर कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया। भाजपा ने आरोप लगाया था कि हैदराबाद की अदालत में लंबित एक मामले की जानकारी नामांकन पत्र में नहीं दी गई थी, जो नियमों के अनुसार आवश्यक थी। निर्णय के बाद विधानसभा परिसर में भी दिनभर हंगामे की स्थिति बनी रही। कांग्रेस और भाजपा नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जबकि दोनों दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आकर नारेबाजी करते रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

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