एमसीडी ने टोल टैक्स नियमों में किया बड़ा बदलाव, डिजिटल वसूली लागू, दरों में सालाना पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रावधान

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नई दिल्ली, 25 जून (हि.स.)। दिल्ली में प्रवेश करने वाले व्यावसायिक वाहनों से टोल टैक्स वसूली की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया। नगर निगम दिल्ली (एमसीडी) ने टोल टैक्स उपविधि-2007 में संशोधन को मंजूरी देते हुए टोल संग्रह, डिजिटल निगरानी और प्रवर्तन से जुड़े कई नए प्रावधान लागू करने का निर्णय लिया है। संशोधित उपविधियों में टोल टैक्स की दरों में हर वर्ष अधिकतम पांच प्रतिशत तक वृद्धि का प्रावधान भी जोड़ा गया है।एमसीडी अधिकारियों के अनुसार टोल दरों में बढ़ोतरी स्वतः लागू नहीं होगी। इसके लिए प्रत्येक वर्ष अलग से प्रस्ताव लाना होगा, जिसे एमसीडी सदन की मंजूरी मिलने के बाद ही लागू किया जा सकेगा।

संशोधन का मुख्य उद्देश्य दिल्ली की सीमाओं पर टोल वसूली को पूरी तरह तकनीक आधारित बनाना और टोल चोरी पर प्रभावी रोक लगाना है। इसके तहत मल्टी लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ), फास्टैग, आरएफआईडी और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। नई व्यवस्था लागू होने पर वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की आवश्यकता नहीं होगी और पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित होगी। संशोधित उपविधियों में बड़े मालवाहक वाहनों के लिए अधिकतम टोल दरें भी निर्धारित की गई हैं। छह पहिया (दो एक्सल) ट्रकों के लिए अधिकतम टोल 400 रुपये, दस पहिया (तीन एक्सल) ट्रकों के लिए 800 रुपये तथा चार से छह एक्सल और सात या उससे अधिक एक्सल वाले भारी वाहनों के लिए अधिकतम 2,000 रुपये प्रति प्रवेश तक निर्धारित किया गया है। इन दरों को लागू करने से पहले आवश्यक प्रशासनिक और निगमीय स्वीकृतियां प्राप्त करनी होंगी।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान संशोधन का अर्थ तत्काल टोल वृद्धि नहीं है। यह प्रावधान निगम को महंगाई, परिचालन लागत और अन्य परिस्थितियों के आधार पर भविष्य में दरों की समीक्षा करने का अधिकार प्रदान करता है। किसी भी प्रस्तावित वृद्धि के लिए एमसीडी सदन की मंजूरी अनिवार्य होगी। नई उपविधियों में टोल चोरी रोकने के लिए भी सख्त प्रावधान किए गए हैं। यदि किसी वाहन का दिल्ली में प्रवेश इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली में दर्ज हो जाता है और निर्धारित टोल जमा नहीं होता है, तो वाहन स्वामी को 72 घंटे के भीतर डिजिटल नोटिस भेजा जाएगा। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर ई-वॉरंट जारी किया जा सकेगा और संबंधित वाहन को डिफॉल्टर घोषित किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त फर्जी नंबर प्लेट का उपयोग, ब्लैकलिस्टेड फास्टैग के माध्यम से प्रवेश, वाहन की गलत श्रेणी घोषित करना अथवा इलेक्ट्रॉनिक निगरानी प्रणाली से बचने का प्रयास ‘रॉन्गफुल पैसेज’ की श्रेणी में माना जाएगा। ऐसे मामलों में मूल टोल राशि के पांच गुना तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। लगातार उल्लंघन करने वाले वाहनों को ब्लैकलिस्ट करने, रोकने और जब्त करने का भी प्रावधान किया गया है। एमसीडी नई डिजिटल व्यवस्था से दिल्ली की सीमाओं पर जाम की समस्या कम होगी, टोल वसूली अधिक पारदर्शी बनेगी तथा राजस्व हानि पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। साथ ही निगरानी और प्रवर्तन की प्रक्रिया भी अधिक सशक्त और प्रभावी हो सकेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

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