महाराष्ट्र में 3.27 करोड़ का प्रतिबंधित गुटखा और पान मसाला ज़ब्त, मकोका लागू करने के निर्देश

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महाराष्ट्र में 3.27 करोड़ का प्रतिबंधित गुटखा और पान मसाला ज़ब्त, मकोका लागू करने के निर्देश


महाराष्ट्र में 3.27 करोड़ का प्रतिबंधित गुटखा और पान मसाला ज़ब्त, मकोका लागू करने के निर्देश


मुंबई, 12 जून (हि.स.)। महाराष्ट्र राज्य खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने राज्यभर में अवैध गुटखा और प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। हाल के हफ्तों में चलाए गए राज्यव्यापी छापों के दौरान लगभग ₹3.27 करोड़ मूल्य का प्रतिबंधित सामान ज़ब्त किया गया, जबकि 35 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं।

एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने पद संभालने के बाद इस अभियान को और तेज़ किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में गुटखा, पान मसाला, निकोटीन-युक्त उत्पादों और अन्य प्रतिबंधित तंबाकू मिश्रित खाद्य पदार्थों की अवैध बिक्री किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे संगठित गिरोहों के खिलाफ, जो उत्पादन से लेकर बिक्री तक की पूरी सप्लाई चेन में शामिल हैं, आवश्यक मामलों में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम, 1999 (मकोका) के तहत कार्रवाई की जाए। यह भी स्पष्ट किया गया कि कार्रवाई से पहले आरोपितों के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच अनिवार्य होगी।

अधिकारियों ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में छापेमारी कर मिलावटी और प्रतिबंधित उत्पादों को जब्त किया है तथा कई विक्रेताओं को गिरफ्तार भी किया गया है। इसके अलावा खुले में और अस्वच्छ तरीके से खाद्य पदार्थ बेचने वालों पर भी कार्रवाई की जा रही है। एफडीए ने उन आरोपों को भी गंभीरता से लिया है जिनमें कुछ अधिकारियों की मिलीभगत की बात कही गई है। इस संबंध में जांच जारी है और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

इसके साथ कमिश्नर ने अस्पतालों में दवाओं की पारदर्शिता को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवाओं की पर्ची मरीजों के परिजनों को देना अनिवार्य होगा ताकि वे अपनी सुविधा और बजट के अनुसार किसी भी रजिस्टर्ड फार्मेसी से दवाएं खरीद सकें। यदि किसी ब्रांड की दवा उपलब्ध नहीं है, तो जेनेरिक विकल्प भी लिया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल सलाह नहीं बल्कि सरकारी आदेश है, और इसका पालन सभी अस्पतालों के लिए अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों के खिलाफ एफडीए में शिकायत की जा सकती है, जिसके बाद सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुधांशू जोशी

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