महादेव ऐप मामला: प्रमुख आरोपी सौरभ चंद्राकर 12 नवंबर तक पुलिस हिरासत में

WhatsApp Channel Join Now
महादेव ऐप मामला: प्रमुख आरोपी सौरभ चंद्राकर 12 नवंबर तक पुलिस हिरासत में


रायपुर, 04 नवंबर (हि.स.)। महादेव बुक ऐप से जुड़े अवैध सट्टेबाजी मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपित सौरभ चंद्राकर को छत्तीसगढ़ के रायपुर की एक अदालत ने 12 नवंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। अदालत ने जांच के सिलसिले में उसे दिल्ली ले जाने की अनुमति भी दी है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष टीम उसे एक नवंबर को ओमान से भारत लेकर आई थी।

सौरभ चंद्राकर को मंगलवार को रायपुर लाया गया था। उसे बुधवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया। वह छत्तीसगढ़ में दर्ज महादेव ऐप से जुड़े अवैध सट्टेबाजी मामले में वांछित था। भारत पहुंचने पर सीबीआई ने उसे गिरफ्तार किया था। सीबीआई ने उसके प्रत्यर्पण में सहयोग के लिए ओमान सरकार और रॉयल ओमान पुलिस का आभार जताया था। एजेंसी ने इसे विदेशों से संचालित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ भारत की कार्रवाई में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया था।

इससे पहले सितंबर में सीबीआई ने महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले में एक अन्य प्रमुख आरोपित अभिषेक कुमार को गिरफ्तार किया था। उसे दुबई से भारत लौटने पर हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि वह ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए का नेटवर्क चलाने, अलग-अलग पैनल के बीच तालमेल बनाने और सट्टे से जुटाई गई रकम एकत्र करने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने महादेव ऐप से जुड़े मामलों की जांच अपने हाथ में ली थी। महादेव ऐप ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट में से एक था। इसका संचालन भारत के बाहर से किया जा रहा था। इस नेटवर्क के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ताश के खेल और अन्य आयोजनों पर अवैध सट्टेबाजी कराई जाती थी। इसके लिए देशभर में फ्रेंचाइजी पैनल और शाखाओं का नेटवर्क बनाया गया था। ये पैनल लोगों को अपने साथ जोड़कर उनसे सट्टे की रकम जमा कराते थे।

सीबीआई की जांच में सामने आया कि सट्टेबाजी से हासिल रकम को बड़ी संख्या में म्यूल बैंक खातों के जरिए इधर-उधर किया जाता था। कई स्तरों पर लेनदेन के बाद इस रकम को हवाला नेटवर्क के माध्यम से विदेश भेजा जाता था। जांच एजेंसी के अनुसार, अवैध कमाई का एक हिस्सा सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को कथित तौर पर संरक्षण राशि देने में भी इस्तेमाल किया गया। सीबीआई ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988, भारतीय दंड संहिता और छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम के प्रावधानों के तहत आरोपपत्र दाखिल किए हैं। इनमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित आरोप शामिल हैं। सौरभ चंद्राकर को इन आरोपपत्रों में प्रमुख आरोपितों में शामिल किया गया है। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भारत और विदेशों में उसकी कई संपत्तियां कुर्क कर चुकी है।

----------

हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

Livevns.news Desk
Livevns.news Desk

772373 Articles

Share this story