लोको पायलटों का अधिकार घोषणा सम्मेलन, कार्य स्थितियों में सुधार और भत्तों पर उठाई आवाज

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लोको पायलटों का अधिकार घोषणा सम्मेलन, कार्य स्थितियों में सुधार और भत्तों पर उठाई आवाज


नई दिल्ली, 28 मार्च (हि.स.)। भारतीय रेलवे के लोको पायलटों और सहायक लोको पायलटों के संगठन ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (एलरसा) ने शनिवार को यहां अधिकार घोषणा सम्मेलन आयोजित किया। इसमें कार्य स्थितियों में सुधार, पर्याप्त विश्राम और वित्तीय लाभों से जुड़ी मांगों को प्रमुखता से उठाया गया।

नई दिल्ली में स्थित सुरजीत भवन में आयोजित इस सम्मेलन में ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क के संस्थापक और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंसाल्वेस ने कहा कि न्यायालय के आदेशों को लागू न करना श्रमिकों का “क्रूर शोषण” है। उन्होंने जोर देकर कहा कि श्रमिकों के अधिकारों की अनदेखी न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि इससे कार्यस्थल पर असंतुलन भी बढ़ता है।

सम्मेलन में वक्ताओं ने बताया कि रेलवे में लोको पायलटों के लगभग 39 हजार पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण मौजूदा कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार पड़ रहा है। इसके चलते न तो उन्हें पर्याप्त विश्राम मिल पा रहा है और न ही अवकाश की सुविधा।

एलरसा ने अपनी प्रमुख मांगों में 16 घंटे का दैनिक विश्राम, 30 घंटे का साप्ताहिक विश्राम, लगातार रात्रि ड्यूटी को सीमित करना, अधिकतम 8 घंटे की ड्यूटी तय करना और मुख्यालय से दूर रहने की अवधि को सीमित करने की मांग रखी।

वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 2010 में न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों के बावजूद इन प्रावधानों को लागू नहीं किया गया है और कई मामलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई की आशंका दिखाकर कर्मचारियों को अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।

सम्मेलन में यह भी कहा गया कि बढ़ते कार्यभार, लंबी दूरी की ट्रेनों, अधिक गति और घनी रेल यातायात व्यवस्था के चलते लोको पायलटों पर मानसिक और शारीरिक दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे हर वर्ष बड़ी संख्या में कर्मचारी चिकित्सकीय रूप से अयोग्य घोषित हो रहे हैं।

सम्मेलन के अंत में संगठन ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो अधिकारों की प्राप्ति के लिए आगे ठोस कदम उठाए जाएंगे। संगठन ने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपनी मांगों के समर्थन की अपील भी की।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

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