पुनर्जनी मामला : एफसीआरए उल्लंघन के आरोप में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश
तिरुवनंतपुरम, 06 जनवरी (हि.स.)। केरल की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो (वीएसीबी) ने ‘पुनर्जनी’ हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़े कथित फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट, 2010 (एफसीआरए) के उल्लंघनों के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की सिफारिश की है। यह सिफारिश राज्य के विपक्ष के नेता वीडी सतीशन और कोच्चि स्थित एनजीओ मनप्पट फाउंडेशन के खिलाफ की गई है।
विजिलेंस ने अपनी रिपोर्ट प्रदेश के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को सौंपी गई है। दरअसल, ‘पुनर्जनी’ एक पुनर्वास योजना है, जिसकी शुरुआत वीडी सतीशन ने वर्ष 2018 की विनाशकारी बाढ़ के बाद अपने नॉर्थ परवूर विधानसभा क्षेत्र में की थी। इस परियोजना का उद्देश्य बाढ़ से प्रभावित परिवारों को आवास उपलब्ध कराना था। विजिलेंस रिपोर्ट के अनुसार, वीडी सतीशन वर्ष 2019 में एक “निजी यात्रा” पर यूनाइटेड किंगडम गए थे, इसी दौरान उन्होंने कथित तौर पर पुनर्जनी प्रोजेक्ट के लिए चंदा जुटाया। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बर्मिंघम में आयोजित एक कार्यक्रम का वीडियो साक्ष्य मौजूद है, जिसमें सतीशन को उपस्थित लोगों से प्रति व्यक्ति 500 पाउंड का योगदान मांगते हुए देखा गया। इस कार्यक्रम से करीब 22,500 पाउंड (लगभग 20 लाख रुपये) जुटाए गए, जिन्हें यूके स्थित संस्था मिडलैंड इंटरनेशनल एड ट्रस्ट (एमआईएटी) के माध्यम से मनप्पट फाउंडेशन के एफसीआरए खाते में भेजा गया।
विजिलेंस का कहना है कि किसी मौजूदा विधायक का विदेशी धन की मांग करना एफसीआरए की धारा 3(2)(ए) का स्पष्ट उल्लंघन है। इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि मनप्पट फाउंडेशन ने वर्ष 2018 से 2022 के बीच प्राप्त करीब 1.22 करोड़ रुपये के विदेशी फंड का समुचित लेखा-जोखा नहीं रखा, जो एफसीआरए नियम 19 का उल्लंघन है।
इस मामले में एक और मोड़ तब आया, जब सितंबर 2025 की एक पुरानी विजिलेंस रिपोर्ट सामने आई, जिसमें वीडी सतीशन को “क्लीन चिट” दी गई थी। उस रिपोर्ट में कहा गया था कि कोई भी राशि सतीशन के निजी खातों में स्थानांतरित नहीं हुई और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसीए) के तहत लगाए गए आरोप सही नहीं थे। हालांकि, मौजूदा सिफारिश में स्पष्ट किया गया है कि यह मामला विशेष रूप से एफसीआरए उल्लंघनों से जुड़ा है और विदेशी फंडिंग व लेनदेन की जांच के लिए सीबीआई ही सक्षम एजेंसी है, क्योंकि यह विषय केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है।
इन सबके बीच वीडी सतीशन ने सीबीआई जांच का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें अपनी बेगुनाही पर पूरा भरोसा है और वे किसी भी जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं। उनका दावा है कि सभी लेनदेन पारदर्शी थे और उनका विधिवत ऑडिट कराया गया है।
उधर, केरल विधानसभा चुनाव नजदीक होने के बीच इस सिफारिश से सियासत तेज हो गई है। यूडीएफ ने इसे “राजनीतिक स्टंट” करार दिया है। कांग्रेस नेताओं केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला ने आरोप लगाया कि एलडीएफ सरकार जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्ष को निशाना बना रही है और अन्य मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। वहीं सीपीआई(एम) ने कहा कि किसी जनप्रतिनिधि द्वारा किए गए कथित कानूनी उल्लंघनों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि राज्य सरकार इस सिफारिश पर क्या कदम उठाती है और क्या मामला औपचारिक रूप से सीबीआई को सौंपा जाता है। यदि ऐसा होता है, तो यह प्रकरण न केवल कानूनी, बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी केरल की राजनीति को गहराई से प्रभावित कर सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उदय कुमार सिंह

