दुनिया को समग्र दृष्टिकोण देना भारत की जिम्मेदारी : डॉ मोहन भागवत

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दुनिया को समग्र दृष्टिकोण देना भारत की जिम्मेदारी : डॉ मोहन भागवत


बेंगलुरु, 28 जून (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने कहा हैकि आज विश्व जिन चुनौतियों का सामना कर रहा है, उनका समाधान भारत की समग्र एवं समन्वित दृष्टि में निहित है। उन्होंने कहा कि विश्व की विभिन्न विचारधाराएं अपने-अपने अनुभवों पर आधारित हैं और उनका अपना महत्व है, लेकिन वे आंशिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती हैं। ऐसे में संपूर्ण समाधान के लिए दुनिया को भारत के विचार को सुनना ही होगा।

डॉ भागवत रविवार को बेंगलुरु के आर्ट ऑफ लिविंग अंतरराष्ट्रीय केंद्र में भारतीय शिक्षण मंडल (बीएसएम) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का क्रियान्वयन : भारतीय ज्ञान प्रणाली का समावेशन के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि भारतीय चिंतन का मूल सिद्धांत 'अनेकता' है, जो सभी दृष्टिकोणों का सम्मान करता है। सत्य किसी एक विचार तक सीमित नहीं है। वाद-विवाद के बजाय शास्त्रार्थ और विचार-विमर्श के माध्यम से सभी विचारों के सार को ग्रहण करना भारतीय परंपरा की विशेषता है।

डॉ भागवत ने कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल का कार्य केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय मूल्यों, संस्कृति और मानव-केंद्रित शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने का एक व्यापक राष्ट्रीय अभियान है। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार या आर्थिक लाभ नहीं, बल्कि व्यक्ति का सर्वांगीण विकास होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल किसी भी राजनीतिक दल से संबद्ध संस्था नहीं है। शिक्षा जैसे कार्य राजनीतिक दलों की सीमाओं से ऊपर उठकर स्वतंत्र रूप से किए जाने चाहिए। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी समाजहित के कार्य राजनीति से अलग रहकर किए गए थे।

इस अवसर पर डॉ मोहन भागवत ने भारतीय शिक्षण मंडल की नई वेबसाइट का लोकार्पण भी किया। उन्होंने कहा कि इससे भारतीय शिक्षा की अवधारणा और विचारों को शिक्षकों, शोधकर्ताओं तथा आम नागरिकों तक डिजिटल माध्यम से व्यापक रूप से पहुंचाने में मदद मिलेगी।

समापन समारोह में भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय अध्यक्ष डॉ सच्चिदानंद जोशी, अखिल भारतीय महासचिव डॉ. भरतशरण सिंह सहित देशभर से आए लगभग 380 शिक्षाविद्, प्राध्यापक, शोधकर्ता एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश एम.बी.

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