मैसूरु दशहरा के नाम एक और गिनीज विश्व रिकॉर्ड, 3,473 ड्रोन से बनाई मोर की विशाल आकृति

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मैसूरु दशहरा के नाम एक और गिनीज विश्व रिकॉर्ड, 3,473 ड्रोन से बनाई मोर की विशाल आकृति


मैसूरु दशहरा के नाम एक और गिनीज विश्व रिकॉर्ड, 3,473 ड्रोन से बनाई मोर की विशाल आकृति


-पिछले साल 2,983 ड्रोन से बनाई गई थी बाघ की आकृति, मुख्यमंत्री ने सीईएससी की टीम को दी बधाई

मैसूरु, 19 अक्टूबर (हि.स.)। विश्वविख्यात मैसूरु दशहरा महोत्सव के नाम एक और उपलब्धि जुड़ गई है। बन्नीमंटप के मशाल परेड मैदान में आयोजित ड्रोन शो में 3,473 ड्रोन की मदद से आसमान में देश के राष्ट्रीय पक्षी मोर की विशाल आकृति बनाई गई। इस प्रदर्शन ने गिनीज विश्व रिकॉर्ड में जगह बनाई।

चामुंडेश्वरी विद्युत आपूर्ति निगम (सीईएससी) के सहयोग से आयोजित इस ड्रोन शो ने दशहरा उत्सव में आधुनिक तकनीक का अनूठा रंग भर दिया। 18 अक्टूबर की रात हुए इस प्रदर्शन को देखने के लिए हजारों दर्शक जुटे। आसमान में रोशनी से उभरी मोर की भव्य आकृति आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। गिनीज विश्व रिकॉर्ड के प्रतिनिधियों ने उपलब्धि का सत्यापन कर प्रमाणपत्र प्रदान किया।

मैसूरु दशहरा के ड्रोन शो ने पिछले वर्ष भी गिनीज विश्व रिकॉर्ड बनाया था। वर्ष 2025 में 2,983 ड्रोन की मदद से आसमान में बाघ की विशाल आकृति बनाई गई थी। इस बार 3,473 ड्रोन से मोर की आकृति बनाकर नया रिकॉर्ड कायम किया गया।

बन्नीमंटप के मशाल परेड मैदान में आयोजित होने वाला ड्रोन शो दशहरा महोत्सव के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है। इसमें रोशनी के जरिए आसमान में विभिन्न आकृतियां उकेरी जाती हैं। यह प्रदर्शन कर्नाटक की सांस्कृतिक परंपरा और आधुनिक तकनीक के संगम को दर्शाता है। इस वर्ष मोर की आकृति के साथ कई अन्य आकर्षक दृश्य भी प्रस्तुत किए गए।

प्रदेश के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस उपलब्धि की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि मैसूरु दशहरा के ड्रोन शो में 3,473 ड्रोन की मदद से बनाई गई मोर की विशाल आकृति ने गिनीज विश्व रिकॉर्ड बनाया है।

मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि को सीईएससी और ऊर्जा विभाग की तकनीकी क्षमता तथा नवाचार का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के पारंपरिक दशहरा उत्सव में आधुनिक तकनीक के समावेश से आयोजित इस शानदार प्रदर्शन ने वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है।

मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि के लिए सीईएससी की टीम को बधाई दी और कहा कि ऐसे प्रयास मैसूरु दशहरा की सांस्कृतिक प्रतिष्ठा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश एम.बी.

Livevns.news Desk
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