कर्नाटक के लक्कुंडी में उत्खनन जारी: सातवें दिन हड्डियां और कई अवशेष मिले
दुर्लभ हरे रंग की नाग शिला मिलने से पुरातत्वविदों में उत्सुकता बढ़ीआसपास की जमीन की कीमतें आसमान पर पहुंची
गदग, 22 जनवरी (हि.स.)। दान चिंतामणि अत्तिमब्बे की कर्मभूमि के रूप में प्रसिद्ध कर्नाटक के गदग जिले के ऐतिहासिक लक्कुंडी गांव इन दिनों पुरातात्विक दृष्टि से चर्चा का केंद्र बना हुआ है। पिछले सात दिन से लगातार चल रहे सरकारी उत्खनन कार्य के दौरान धरती के नीचे छिपे कई रहस्य एक-एक कर सामने आ रहे हैं। खुदाई में दुर्लभ हरे रंग की चमकदार नाग शिला मिलने से पुरातत्व विशेषज्ञों की उत्सुकता और बढ़ गई है।
गदग तालुक के लक्कुंडी स्थित कोटे वीरभद्रेश्वर मंदिर परिसर के पास हो रहे उत्खनन में अब तक कई प्राचीन वस्तुएं मिली हैं। हाल ही में मिली नाग शिला हरे रंग के चमकदार पत्थर पर उकेरी गई है, जो इस क्षेत्र में सामान्यतः मिलने वाली काली शिलाओं से बिल्कुल अलग है। इस दुर्लभ शिला की उत्पत्ति और कालखंड निर्धारित करने के लिए विशेषज्ञों ने अध्ययन शुरू कर दिया गया है।
उत्खनन के सातवें दिन प्राचीन काल की गोलियां (बिल्लियां), हड्डियां तथा टूटे हुए मिट्टी के बर्तनों के अवशेष भी मिले हैं। वर्तमान में 8 से 9 फीट की गहराई तक खुदाई की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी बहुमूल्य ऐतिहासिक वस्तुएं मिलने की संभावना है।
लक्कुंडी को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के प्रयासों के बीच हाल ही में सोने का खजाना मिलने और उत्खनन कार्य शुरू होने से गांव में नई चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसका सीधा असर जमीन की कीमतों पर पड़ा है, जो अब आसमान छूने लगी हैं। विशेष रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग 63 के किनारे स्थित जमीनों की भारी मांग बढ़ी है। जहां पहले प्रति एकड़ जमीन की कीमत 30 से 40 लाख रुपये थी, वहीं अब यह बढ़कर एक करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। थ्री स्टार और फाइव स्टार होटल मालिकों के साथ-साथ रियल एस्टेट कारोबारी जमीन खरीदने के लिए आगे आ रहे हैं। स्थानीय किसानों के अनुसार, पिछले दो वर्षों की तुलना में जमीन की कीमतें दो से तीन गुना तक बढ़ चुकी हैं।
उल्लेखनीय है कि 10 जनवरी को एक घर की नींव खुदाई के दौरान सोने का खजाना मिलने के बाद से लक्कुंडी लगातार ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी बनता जा रहा है। एक ओर जहां अतीत के अमूल्य अवशेष सामने आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विकास की नई उम्मीदें भी जन्म ले रही हैं। उत्खनन के साथ-साथ लक्कुंडी का भविष्य भी एक नई दिशा की ओर बढ़ता हुआ नजर आ रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश महादेवप्पा

