भारत की भविष्य की आर्थिक वृद्धि में भू-स्थानिक तकनीक की अहम भूमिका होगी: डॉ. जितेंद्र सिंह

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भारत की भविष्य की आर्थिक वृद्धि में भू-स्थानिक तकनीक की अहम भूमिका होगी: डॉ. जितेंद्र सिंह


नई दिल्ली, 30 अक्टूबर (हि.स.)।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की भविष्य की आर्थिक वृद्धि में भू-स्थानिक (जियोस्पेशियल) तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इस क्षेत्र की पूरी क्षमता का उपयोग करने के लिए सरकार और उद्योग के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भू-स्थानिक क्षेत्र को आगे बढ़ाने का मंत्र है—‘सक्षम बनाना, निवेश करना और अपनाना’।

डॉ. जितेंद्र सिंह शुक्रवार को नई दिल्ली में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत भारतीय सर्वेक्षण विभाग (सर्वे ऑफ इंडिया) की ओर से आयोजित ‘विकसित भारत 2047 के लिए भू-स्थानिक अर्थव्यवस्था का सह-निर्माण: सरकार और उद्योग के बीच तालमेल’ विषयक कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और विभिन्न प्रदर्शकों से बातचीत की।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ एक गोलमेज चर्चा में भी हिस्सा लिया।

मंत्री ने कहा कि भू-स्थानिक जानकारी अब केवल नक्शे बनाने और सर्वेक्षण तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह देश की आर्थिक वृद्धि के लिए एक रणनीतिक राष्ट्रीय संसाधन बन चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और प्रोत्साहन से पिछले 12-13 वर्षों में इस क्षेत्र में कई व्यापक सुधार किए गए हैं। इन सुधारों को लागू करने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और साहस की जरूरत थी। उन्होंने देहरादून स्थित भारतीय सर्वेक्षण विभाग के परिसर की अपनी यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले सर्वेक्षण कार्य में काफी शारीरिक श्रम लगता था, लेकिन आज इस क्षेत्र में कंप्यूटिंग और आधुनिक तकनीक का ज्ञान रखने वाले युवा पेशेवरों की आवश्यकता है।

मंत्री ने कहा कि भू-स्थानिक क्षेत्र में नए बाजार विकसित करने, व्यावहारिक कारोबारी मॉडल तैयार करने और स्टार्टअप तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार और निजी क्षेत्र के बीच साझेदारी मजबूत करनी होगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति-2022 ने इस क्षेत्र में नवाचार और नई तकनीकों को अपनाने के लिए एक खुला ढांचा उपलब्ध कराया है। इसमें भू-स्थानिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी उभरती तकनीकों को भी शामिल किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता काम की गति और सटीकता बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है। इसलिए विभिन्न क्षेत्रों में इसके इस्तेमाल को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

मंत्री ने केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों से भारतीय सर्वेक्षण विभाग के साथ मिलकर काम करने की संभावनाएं तलाशने का आग्रह किया। उन्होंने सर्वेयर जनरल को निर्देश दिया कि विभिन्न विभागों के अधिकारियों के लिए ऑनलाइन बैठकें आयोजित की जाएं, ताकि उन्हें भारतीय सर्वेक्षण विभाग की क्षमताओं और उपलब्ध तकनीकों की जानकारी मिल सके।

उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में जागरूकता बढ़ने से सरकारी विभागों और निजी उद्योगों के बीच सहयोग के नए अवसर पैदा होंगे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार प्रक्रियाओं को सरल बनाने, अनावश्यक नियमों को हटाने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कारोबार के अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने अंतरिक्ष और जैव प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सरकार और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग के सफल मॉडलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मॉडलों को भू-स्थानिक क्षेत्र में भी अपनाया जा सकता है। उन्होंने संबंधित पक्षों से प्रक्रियागत बाधाओं की पहचान करने, सरकारी सहायता तंत्र का लाभ उठाने और मिलकर इस क्षेत्र की संभावनाओं को साकार करने का आह्वान किया।

राष्ट्रीय संसाधनों के बेहतर उपयोग में मिलेगी मदद

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. उमेश वी. वाघमारे ने कहा कि भू-स्थानिक बुनियादी ढांचा देश के संसाधनों से जुड़ी जानकारियों को व्यवस्थित करने और उनके बेहतर उपयोग में मदद कर सकता है। ऊर्जा संक्रमण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी इसकी भूमिका उपयोगी होगी।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति-2022 के तहत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को इस क्षेत्र की नोडल एजेंसी की जिम्मेदारी दी गई है। नीति का उद्देश्य भू-स्थानिक डेटा के निर्माण, उपलब्धता और उपयोग के लिए उदार वातावरण तैयार करना है।

भारतीय सर्वेक्षण विभाग के सर्वेयर जनरल एस.के. सिन्हा ने कहा कि राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति-2022 ने नवाचार आधारित खुली व्यवस्था की नींव रखी है। इस क्षेत्र की संभावनाओं को आर्थिक अवसरों में बदलने के लिए सरकार, उद्योग और शिक्षण संस्थानों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने बताया कि भारतीय सर्वेक्षण विभाग सरकारी कार्यक्रमों को समर्थन देने के लिए बुनियादी भू-स्थानिक डेटा और पोजिशनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उद्योग जगत के साथ काम कर रहा है।

कार्यशाला में भू-स्थानिक डेटा संवर्धन एवं विकास समिति के अध्यक्ष श्रीकांत शास्त्री सहित सरकार, उद्योग और संबंधित संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

Livevns.news Desk
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