(अपडेट ) एम्स देवघर के दूसरे दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति ने स्नातकों से गांवों और आदिवासी क्षेत्रों में सेवा देने का किया आह्वान

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(अपडेट ) एम्स देवघर के दूसरे दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति ने स्नातकों से गांवों और आदिवासी क्षेत्रों में सेवा देने का किया आह्वान


-173 विद्यार्थियों में 132 छात्राएं, मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 846 होने का उल्लेख

देवघर, 10 अक्टूबर (हि.स.)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शनिवार को देवघर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के दूसरे दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने स्नातक होने वाले डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों को बधाई देते हुए कहा कि चिकित्सा की डिग्री केवल शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि वंचितों और कमजोर वर्गों की सेवा करने का दायित्व भी है। उन्होंने युवा चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों से दक्षता, सत्यनिष्ठा, सहानुभूति तथा नैतिक मूल्यों को अपने पेशे का आधार बनाने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने दीक्षांत समारोह को संथाल परगना क्षेत्र की आकांक्षाओं का उत्सव बताते हुए कहा कि एम्स देवघर जनजातीय और ग्रामीण समुदायों के लिए चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के बढ़ते अवसरों का प्रतीक है। उन्होंने स्नातकों से आग्रह किया कि वे अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग संस्थान की सीमाओं से आगे बढ़कर गांवों, आदिवासी समुदायों और देश के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में लोगों की सेवा के लिए करें। उन्होंने कहा कि चिकित्सा संबंधी ज्ञान का सर्वोच्च उद्देश्य मानवता और समाज का कल्याण है।

सीपी राधाकृष्णन ने भगवान बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू और तिलका मांझी की विरासत का उल्लेख करते हुए युवा स्वास्थ्य पेशेवरों से जनसेवा की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में सफलता का वास्तविक महत्व तभी है, जब उसका लाभ समाज के जरूरतमंद और वंचित लोगों तक पहुंचे।

उन्होंने क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में एम्स देवघर के योगदान की सराहना की। मलेरिया उन्मूलन, लसीका फाइलेरिया की निगरानी, एनीमिया नियंत्रण, श्रवण स्वास्थ्य और विद्यालय स्वास्थ्य से जुड़ी संस्थान की सामुदायिक पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि चिकित्सा संस्थानों की जिम्मेदारी उनके परिसर तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्हें आसपास के समुदायों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से पहले देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 थी, जो बढ़कर 846 हो गई है। उनके अनुसार, एम्स देवघर जैसे संस्थान संतुलित और समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रत्येक राज्य, जिले और गांव में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तथा उच्च शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है। स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार और चिकित्सा शिक्षा के अवसरों में वृद्धि देश के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

उपराष्ट्रपति ने एम्स देवघर के दीक्षांत समारोह में स्नातक होने वाले 173 विद्यार्थियों में से 132 छात्राओं की संख्या पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा महिला सशक्तिकरण से आगे बढ़कर महिला-नेतृत्व वाले विकास की दिशा में देश की प्रगति को दर्शाता है। साथ ही, यह शिक्षा की उस परिवर्तनकारी भूमिका को रेखांकित करता है, जो महिलाओं को अपनी प्रतिभा और क्षमताओं को साकार करने के अवसर प्रदान करती है।

उन्होंने स्नातकों से उन समुदायों के साथ जुड़े रहने का आग्रह किया, जिनकी सेवा के उद्देश्य से संस्थान की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि युवा स्वास्थ्य पेशेवरों को अपने ज्ञान का उपयोग जरूरतमंदों तक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने और समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए करना चाहिए।

सीपी राधाकृष्णन ने युवा चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), टेलीमेडिसिन और डिजिटल निदान जैसी उभरती तकनीकों को जिम्मेदारी के साथ अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में हो रही प्रगति का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि दूरदराज के गांवों और वंचित समुदायों तक भी पहुंचना चाहिए।

उन्होंने युवा पीढ़ी के बीच नशे के विरुद्ध जागरूकता फैलाने की जरूरत पर भी जोर दिया। साथ ही, रोगियों की देखभाल में नर्सिंग पेशेवरों की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय संवेदनशीलता भी जरूरी है।

उपराष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि एम्स देवघर झारखंड सहित पूर्वी भारत के व्यापक क्षेत्र में नैदानिक उत्कृष्टता, वैज्ञानिक अनुसंधान और करुणापूर्ण चिकित्सा सेवा के केंद्र के रूप में निरंतर आगे बढ़ेगा। उन्होंने स्नातकों से अपने व्यावसायिक जीवन में दक्षता, करुणा और चरित्र को मार्गदर्शक सिद्धांत बनाने तथा विकसित भारत के निर्माण में सार्थक योगदान देने की अपील की।

दीक्षांत समारोह में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव, झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, गोड्डा के सांसद डॉ. निशिकांत दुबे, राज्यसभा सांसद प्रदीप कुमार वर्मा, देवघर के विधायक सुरेश पासवान, एम्स देवघर की अध्यक्ष प्रोफेसर एमवी पद्मा श्रीवास्तव तथा संस्थान के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रोफेसर नितिन एम. गंगाने सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।----------

हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

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