प्रबंधन शिक्षा को बोर्डरूम और बैलेंस शीट से बढ़ना चाहिए आगे : उपराष्ट्रपति

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प्रबंधन शिक्षा को बोर्डरूम और बैलेंस शीट से बढ़ना चाहिए आगे : उपराष्ट्रपति


प्रबंधन शिक्षा को बोर्डरूम और बैलेंस शीट से बढ़ना चाहिए आगे : उपराष्ट्रपति


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प्रबंधन शिक्षा को बोर्डरूम और बैलेंस शीट से बढ़ना चाहिए आगे : उपराष्ट्रपति


रांची, 28 मार्च (हि.स.)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शनिवार को भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), रांची के 15वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने उभरते हुए लीडर्स को मेडल और सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया।

दीक्षांत समारोह में कुल 558 डिग्रियां दी गईं। इनमें 26 पीएचडी डिग्रियां, 11 पीएचडी (एग्जीक्यूटिव) डिग्रियां और बैच 2024-26 के विभिन्न प्रोग्राम के ग्रेजुएट्स शामिल हैं। इसमें एमबीए (251), एमबीए एचआरएम (62), एमबीए बीए (50), एमबीए (एग्जीक्यूटिव) (50), आईपीएम (बीबीए और एमबीए) बैच 2021-26 (73 छात्र) और आईपीएम (बीबीए) बैच 2022-25 (35 छात्र) शामिल हैं।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने आईआईएम के छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रबंधन शिक्षा को बोर्डरूम और बैलेंस शीट से आगे बढ़ना चाहिए और इसे समाज से जुड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि वास्तविक दुनिया की चुनौतियों का समाधान करना चाहिए और समावेशी विकास में योगदान देना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि जहां अकादमिक केस स्टडी विश्लेषणात्मक कौशल की परीक्षा लेती है, वहीं जीवन ऐसे निर्णयों की मांग करता है, जो लोगों की आजीविका, विश्वास और व्यापक सामाजिक भलाई को प्रभावित करते हैं। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे सफलता को केवल उपलब्धियों से ही परिभाषित न करें बल्कि उन मूल्यों और नैतिकता से परिभाषित करें जिनके साथ वे उन उपलब्धियों को प्राप्त करते हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि नैतिक नेतृत्व, सत्यनिष्ठा और विश्वास वे नींव हैं जिन पर स्थायी संस्थान निर्मित होते हैं। उन्होंने छात्रों को शॉर्टकट के बजाय चरित्र को और मुनाफे के बजाय उद्देश्य को चुनने के लिए प्रोत्साहित किया।

युवाओं से विकसित भारत ऐट द रेट 2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण में योगदान देने का आह्वान करते हुए, उपराष्ट्रपति ने उनसे वैश्विक सोचें, स्थानीय स्तर पर कार्य करें (थिंक ग्लोेबल, एक्टक लोकल) का आग्रह किया और यह सुनिश्चित करने को कहा कि उनका प्रभाव जमीनी स्तर से शुरू हो।

स्नातक होने वाले छात्रों, उनके माता-पिता और संकाय सदस्यों को बधाई देते हुए उपराष्ट्र पति ने उनके लिए सफलता, संतुष्टि और एक उद्देश्यपूर्ण जीवन की कामना की। साथ ही उनसे यह हमेशा याद रखने का आग्रह किया कि सफलता का सच्चा पैमाना यह नहीं है कि कोई कितना संचय करता है, बल्कि यह है कि कोई समाज को बदले में क्या देता है।

कार्यक्रम में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह दिन उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो उनके परिश्रम, अनुशासन एवं समर्पण का परिणाम है। उन्होंने विद्यार्थियों को न केवल उत्कृष्ट पेशेवर बनने, बल्कि संवेदनशील एवं उत्तरदायी नागरिक के रूप में समाज एवं राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

राज्यपाल ने कहा कि भारतीय प्रबंध संस्थान, रांची देश के अग्रणी प्रबंधन संस्थानों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुका है। यह संस्थान उत्कृष्ट शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, नेतृत्व क्षमता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे उच्च कोटि के संस्थान जिस भी राज्य में स्थापित होते हैं, वे उस राज्य के लिए गौरव का विषय होते हैं। उन्होंने संस्थान में स्थापित ‘अटल बिहारी वाजपेयी सेंटर फॉर पॉलिसी, लीडरशिप एंड गवर्नेंस’ एवं भगवान बिरसा मुंडा के नाम पर स्थापित सेंटर फॉर ट्राइबल अफेयर्स की सराहना करते हुए कहा कि ये केंद्र समावेशी विकास, सुशासन और सामाजिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिवेश में चुनौतियों के साथ-साथ अवसर भी व्यापक हैं। ऐसे समय में युवाओं को अपने निर्णयों में नैतिकता, पारदर्शिता एवं मानवीय मूल्यों को सर्वोपरि रखना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के मंत्र के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि उनका झारखंड से विशेष आत्मीय संबंध रहा है और उनकी उपस्थिति से यह समारोह और अधिक प्रेरणादायी बन गया है।

झारखंड के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने उन्होंने कहा कि इन छात्रों के सामने संभावनाओं का एक अनंत क्षितिज खुला है और उन्हें विश्वास है कि वे ऐसी ऊंचाइयों को प्राप्त करेंगे, जिससे न केवल उनका बल्कि संस्थान का गौरव भी बढ़ेगा।

मंत्री ने कहा कि वर्ष 2009 में स्थापना के बाद से आईआईएम रांची ने प्रबंधन शिक्षा के क्षेत्र में एक सशक्त और प्रतिष्ठित पहचान बनाई है। संस्थान ने शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार और नेतृत्व विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

मंत्री ने झारखंड सरकार की गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत योग्य छात्रों को 15 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण मात्र 04 प्रतिशत साधारण ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि आईआईएम रांची के 24 छात्रों ने इस योजना के माध्यम से लगभग 3.21 करोड़ रुपये का लाभ प्राप्त किया है।

उन्होंने झारखंड ग्रासरूट इनोवेशन इंटर्नशिप योजना की चर्चा करते हुए कहा कि यह पहल छात्रों को जमीनी स्तर पर नवाचार, स्थानीय अर्थव्यवस्था, आजीविका मॉडल और ग्रामीण चुनौतियों को समझने का अवसर देती है। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि आईआईएम रांची के रूरल इमर्शन प्रोग्राम को इस योजना से जोड़कर इसे और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक कमिश्नरेट में पांच नए बिजनेस स्कूल स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है। इसमें आईआईएम रांची एक मार्गदर्शक संस्थान के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे राज्य में गुणवत्तापूर्ण प्रबंधन शिक्षा का विस्तार होगा और स्थानीय स्तर पर उद्यमिता तथा रोजगार के अवसर सुदृढ़ होंगे।

इस अवसर पर राज्यपाल संतोष गंगवार, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे। इसके पहले उपराष्ट्रपति ने खूंटी जिले के उलिहातू गांव में भगवान बिरसा मुंडा के जन्मस्थान का दौरा किया और श्रद्धांजलि अर्पित की।

उन्होंने कहा कि उलिहातू का एक बार फिर दौरा करके वे अत्यंत भाव-विभोर हो गए और उन्होंने उस दिन को स्नेहपूर्वक याद किया, जब झारखंड के राज्यपाल के रूप में शपथ लेने के ठीक पहले दिन उन्होंने इस स्थान का दौरा किया था। उन्होंने उलिहातू गांव में भगवान बिरसा मुंडा के वंशजों से भी बातचीत की।

उपराष्ट्रपति ने रांची स्थित बिरसा चौक पर भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित की।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

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