उत्तराखंड की स्वदेशी बद्री गाय के संरक्षण में बड़ी उपलब्धि, आईवीएफ के जरिए हुआ बछिया का जन्म

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उत्तराखंड की स्वदेशी बद्री गाय के संरक्षण में बड़ी उपलब्धि, आईवीएफ के जरिए हुआ बछिया का जन्म


नई दिल्ली, 12 सितंबर (हि.स.)। उत्तराखंड की स्वदेशी बद्री गाय के संरक्षण और आनुवंशिक सुधार की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। उन्नत प्रजनन तकनीक ओवम पिक-अप और इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) के जरिए एक स्वस्थ बद्री नस्ल की बछिया का जन्म हुआ है। यह बछिया 11 सितंबर 2026 को अकादमिक डेयरी फार्म में पैदा हुई।

इस उपलब्धि की खास बात यह है कि बद्री गाय के भ्रूण को साहीवाल गाय में प्रत्यारोपित किया गया था। सफल भ्रूण प्रत्यारोपण के बाद साहीवाल गाय ने स्वस्थ बद्री बछिया को जन्म दिया।

बद्री गाय उत्तराखंड का राज्य पशु है और राज्य की महत्वपूर्ण स्वदेशी पशु आनुवंशिक संपदा मानी जाती है।

यह प्रयोग आईसीएआर-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल और जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के सहयोग से किया गया। परियोजना को उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद, हल्दी से वित्तीय सहयोग मिला।

आईसीएआर-एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने शनिवार को एक बयान में कहा कि ओपीयू-आईवीएफ जैसी उन्नत प्रजनन तकनीक से आनुवंशिक रूप से श्रेष्ठ मादा पशुओं से बड़ी संख्या में भ्रूण तैयार किए जा सकते हैं। इससे बद्री नस्ल के उत्कृष्ट जर्मप्लाज्म को पारंपरिक प्रजनन की तुलना में तेजी से बढ़ाने में मदद मिलेगी।

इस शोध कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2023 में जीबी पंत विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति डॉ. एमएस चौहान की पहल और नेतृत्व में हुई थी। इसके बाद पंतनगर विश्वविद्यालय और आईसीएआर-एनडीआरआई के वैज्ञानिकों ने बद्री गाय के लिए ओपीयू-आईवीएफ, भ्रूण उत्पादन और भ्रूण प्रत्यारोपण की तकनीक विकसित करने पर काम किया।

श्रेष्ठ बद्री गायों से लिए गए अंडाणु

कार्यक्रम के तहत आनुवंशिक रूप से मूल्यवान बद्री गायों से अल्ट्रासाउंड की मदद से अंडाणु निकाले गए। इन अंडाणुओं को प्रयोगशाला में परिपक्व किया गया और उत्तराखंड पशुधन विकास बोर्ड से प्राप्त आनुवंशिक रूप से श्रेष्ठ बद्री सांड के वीर्य से उनका निषेचन कराया गया।

तैयार भ्रूणों को नियंत्रित प्रयोगशाला परिस्थितियों में विकसित करने के बाद उपयुक्त समय के लिए तैयार की गई साहीवाल और अन्य गायों में प्रत्यारोपित किया गया। इसी प्रक्रिया से एक साहीवाल रिसिपिएंट गाय ने स्वस्थ बद्री बछिया को जन्म दिया।

वैज्ञानिक टीम के अनुसार, एक अन्य तैयार क्रॉसब्रेड रिसिपिएंट गाय के भी अगले 5 से 7 दिनों में बद्री बछड़े को जन्म देने की उम्मीद है।

बद्री नस्ल के संरक्षण और आनुवंशिक सुधार के लिए वैज्ञानिक अब श्रेष्ठ और अधिक उत्पादन देने वाली बद्री गायों की क्लोनिंग पर भी काम कर रहे हैं। शोध के दौरान क्लोन किए गए बद्री भ्रूण तैयार करने में सफलता मिली है।

अगले चरण में ओपीयू-आईवीएफ और क्लोनिंग से तैयार भ्रूणों को साहीवाल, क्रॉसब्रेड और बद्री नस्ल की उपयुक्त रिसिपिएंट गायों में प्रत्यारोपित करने की योजना है। इसका उद्देश्य श्रेष्ठ बद्री जर्मप्लाज्म का तेजी से विस्तार करना और इस स्वदेशी नस्ल के दीर्घकालिक संरक्षण एवं आनुवंशिक सुधार को बढ़ावा देना है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि आधुनिक प्रजनन तकनीक और देशी आनुवंशिक संसाधनों के इस संयोजन से हिमालयी क्षेत्र में टिकाऊ पशुधन विकास को बढ़ावा मिल सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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