भारतीय संगीत आध्यात्म का ही एक रूप है : सयूमी तकोनो
धमतरी, 02 जनवरी (हि.स.)। भारत वह देश है जहां सह-अस्तित्व केवल विचार नहीं बल्कि व्यवहार में दिखाई देता है। इस भावना को यहां आकर प्रत्यक्ष रूप से महसूस किया जा सकता है। यह कहना है जापान से भारत आयीं अंतरराष्ट्रीय पियानो कलाकार सयूमी तकोनो का। यूरोपियन क्लासिकल म्यूजिक की प्रतिष्ठित कलाकार सयूमी इन दिनों पंडित जगन्नाथ राव महाजन की स्मृति में आयोजित दो दिवसीय “लययात्रा” संगीत समारोह में हिस्सा लेने धमतरी पहुंची हैं।
इस अवसर पर उन्होंने प्रसिद्ध तबला वादक तानसेन श्रीवास्तव के साथ स्थानीय हरदिहा साहू समाज भवन में अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति दी। धमतरी में उनकी उपस्थिति और प्रस्तुति ने संगीत प्रेमियों को भारतीय और विश्व संगीत के आध्यात्मिक संगम का अनूठा अनुभव कराया। संगीत और संस्कृति पर बातचीत करते हुए सयूमी ने कहा कि वह जापान की रहने वाली हैं और भारत आकर उन्हें यहां के लोगों की खुली सोच और सहज व्यवहार ने बहुत प्रभावित किया। उन्होंने बताया कि जहां जापान के लोग स्वभाव से थोड़े संकोची होते हैं, वहीं भारत में लोग बेझिझक अपनी भावनाएं और विचार व्यक्त करते हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से दोनों देशों की मान्यताएं और मानसिकता काफी हद तक एक जैसी हैं।
भारतीय संगीत पर अपनी राय रखते हुए सयूमी ने कहा कि भारतीय संगीत आध्यात्म का ही एक हिस्सा है। यहां संगीत पूरी तरह कलाकार की सोच, भावनाओं और स्वभाव पर निर्भर करता है। किसी राग को कलाकार किस तरह बरतता है, यही उसकी आत्मा को दर्शाता है। उन्होंने भारतीय और यूरोपियन संगीत की तुलना करते हुए बताया कि यूरोपियन संगीत अधिकतर स्क्रिप्टेड होता है, जहां महान संगीतकारों की रचनाओं को जस का तस प्रस्तुत करने की परंपरा है। वहीं भारतीय संगीत में भले ही बंदिश या गत पुरानी हो, लेकिन उसका ट्रीटमेंट पूरी तरह कलाकार की कल्पना और सृजनशीलता पर निर्भर करता है।
सयूमी तकोनो ने एक म्यूज़िक कालेज के पियानो विभाग से ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद उन्होंने स्टेज और लाइव शोज़ में लगातार परफार्म किया। संगीत के विविध क्षेत्रों में अनुभव रखते हुए उन्होंने 10 वर्षों तक बैले पियानिस्ट और पांच वर्षों तक म्यूज़िक थेरेपी पियानिस्ट के रूप में भी काम किया है। वर्तमान में वह कंपोज़िशन और अरेंजमेंट सर्विसेज, इंस्ट्रूमेंट-मेकिंग वर्कशॉप, साउंड और रिदम वर्कशॉप के माध्यम से संगीत का प्रशिक्षण दे रही हैं। साथ ही विभिन्न जॉनर के कंपोज़र और आर्टिस्ट के साथ मिलकर सेशन परफॉर्मेंस भी कर रही हैं। शुरुआती संगीत, कंटेंपररी म्यूज़िक, इम्प्रोवाइजेशन, वर्ल्ड म्यूज़िक और एम्बिएंट साउंड्स में उन्हें विशेष दक्षता हासिल है।सयूमी कई प्रसिद्ध म्यूज़िक ग्रुप्स की सदस्य हैं, जिनमें लूना क्रेसेंटे, ओटो नीवा, गान गान टू नेवा और ओंगाकुशित्सु डुओ शामिल हैं। उन्होंने एक सीडी भी रिलीज़ की है। वर्ष 2015 में उन्होंने सयूमी नाम से सोलो आर्टिस्ट के रूप में डेब्यू किया और आईट्यून्स पर अपना गीत “शिनरेकी” रिलीज़ किया। पियानो के अलावा वह जा हार्प, सिंथेसाइज़र, हाथ से बने वाद्ययंत्र, परकशन, फ्लूट और मेलोडिका जैसे कई वाद्ययंत्रों में भी निपुण हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

