किसी देश पर हुक्म चलाने के बजाय अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए शक्तिशाली बनना चाहता है भारत : उपराष्ट्रपति
नई दिल्ली, 12 अक्टूबर (हि.स.)। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने सोमवार को कहा कि भारत दुनिया की अग्रणी शक्ति बनना चाहता है, ताकि कोई देश उस पर अनुचित शर्तें न थोप सके। उन्होंने सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करने और किसी भी देश की सीमाओं का अतिक्रमण नहीं करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (एनडीसी) के 66वें पाठ्यक्रम के प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि राष्ट्रीय रणनीति ऐसी होनी चाहिए, जो देश के उद्देश्यों को ठोस कार्रवाई और परिणामों में बदल सके। राष्ट्रीय मूल्यों, हितों और उद्देश्यों के बीच समन्वय देश की सुरक्षा और विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत के राष्ट्रीय हित उसके संवैधानिक मूल्यों- संप्रभुता, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, न्याय, स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व तथा राष्ट्र की एकता और अखंडता से जुड़े हैं। उन्होंने संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा, लोकतांत्रिक और संघीय व्यवस्था को बनाए रखने तथा देश के रणनीतिक, राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य उद्देश्यों को आगे बढ़ाने को प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया।
राधाकृष्णन ने भारत की सभ्यतागत अवधारणा ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय मूल्य दुनिया के साथ देश के संबंधों को दिशा देते हैं। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल, आपदाओं के समय सहायता और जलवायु परिवर्तन से निपटने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में देश की भूमिका का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद, साइबर खतरे, महामारी, जलवायु परिवर्तन और सीमा पार अपराध जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है। राष्ट्रीय हितों की रक्षा और साझा वैश्विक हितों को आगे बढ़ाना एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। इसके लिए देशों के बीच समन्वय, सूचनाओं का आदान-प्रदान और आपसी विश्वास जरूरी है।
उपराष्ट्रपति ने विकसित भारत-2047 को देश का महत्वपूर्ण राष्ट्रीय लक्ष्य बताते हुए कहा कि दीर्घकालिक दृष्टिकोण को उपलब्ध संसाधनों और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाना होगा। राष्ट्रीय सुरक्षा में देश की थल सीमाओं, हवाई क्षेत्र, समुद्री हितों और साइबर क्षेत्र की रक्षा के साथ-साथ सतत विकास और समृद्धि के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करना भी शामिल है।
राधाकृष्णन ने वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक संप्रभु राष्ट्र समान है, चाहे वह बड़ा हो या छोटा। उन्होंने प्रौद्योगिकी, व्यापार, संपर्क, शिक्षा, नवाचार और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने वैश्विक दक्षिण के सामने भ्रष्टाचार को एक बड़ी चुनौती बताते हुए इसके उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयास करने की जरूरत भी बताई।
एनडीसी के 66वें पाठ्यक्रम में भारतीय सशस्त्र बलों, सिविल सेवाओं, पुलिस और अन्य सरकारी संगठनों के अधिकारियों के साथ मित्र देशों के 41 अधिकारी सहित कुल 122 प्रतिभागी शामिल हैं। इस अवसर पर राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय के कमांडेंट एयर मार्शल मनीष कुमार गुप्ता और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

