तमिलनाडु में 4 अरब डॉलर के निवेश से बनेगा भारत का सबसे बड़ा वाणिज्यिक पोत निर्माण यार्ड

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तमिलनाडु में 4 अरब डॉलर के निवेश से बनेगा भारत का सबसे बड़ा वाणिज्यिक पोत निर्माण यार्ड


नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में एचडी हुंडई के अध्यक्ष चुंग की-सुन से मुलाकात कर तमिलनाडु के तूतीकोरिन में प्रस्तावित मेगा पोत निर्माण यार्ड की प्रगति पर चर्चा की। परियोजना के लिए संयुक्त कार्य समूह बनाया जाएगा। दोनों पक्ष संयुक्त उद्यम की संरचना तय करने की दिशा में काम करेंगे। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) अगले छह महीने में तैयार होने की उम्मीद है।

केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, सोनोवाल दक्षिण कोरिया की चार दिवसीय यात्रा पर हैं। इस दौरान भारत और दक्षिण कोरिया के बीच पोत निर्माण और समुद्री उद्योग में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हो रही है। एचडी हुंडई की पोत निर्माण इकाई एचडी कोरिया शिपबिल्डिंग एंड ऑफशोर इंजीनियरिंग (एचडी केएसओई) ने परियोजना में प्रमुख रणनीतिक निवेशक के रूप में भाग लेने की अपनी मंशा दोहराई है।

सोनोवाल ने कहा कि 20 अप्रैल, 2026 को हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन तूतीकोरिन में प्रस्तावित परियोजना का आधार है। चार अरब डॉलर के निवेश वाली यह परियोजना महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। उन्होंने कहा कि केंद्र और तमिलनाडु सरकार की टीमें परियोजना के लिए लगातार सहयोग कर रही हैं।

सोनोवाल ने कहा कि भारत में घरेलू पोतों की मांग तेजी से बढ़ रही है। सार्वजनिक क्षेत्र की एजेंसियां आने वाले वर्षों में 400 से अधिक पोत खरीदने की योजना बना रही हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि तूतीकोरिन का नया यार्ड निर्यात के लिए पोत बनाने के साथ इन जरूरतों को पूरा करने में भी योगदान देगा।

सोनोवाल ने कहा कि यह साझेदारी भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बनेगी। इसमें दक्षिण कोरिया की उन्नत पोत निर्माण तकनीक और भारत की औद्योगिक क्षमता तथा बड़े बाजार को साथ लाने की योजना है। प्रस्तावित तूतीकोरिन पोत निर्माण यार्ड को दोनों देशों की विशेष रणनीतिक साझेदारी की प्रमुख परियोजना के रूप में विकसित करने की परिकल्पना है।

प्रस्तावित पोत निर्माण यार्ड को भारत सरकार की पोत निर्माण विकास योजना के तहत विकसित किया जा रहा है। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में पुष्टि होने के बाद इसकी सालाना क्षमता लगभग 25 लाख ग्रॉस टनेज (जीटी) होगी। चालू होने पर यह भारत का सबसे बड़ा वाणिज्यिक पोत निर्माण यार्ड बनने की उम्मीद है। इससे देश की घरेलू पोत निर्माण क्षमता बढ़ेगी और वैश्विक समुद्री उद्योग में भारत की प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी।

परियोजना में निवेश की संरचना, हिस्सेदारी और क्रियान्वयन से जुड़ी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा। यह प्रक्रिया आवश्यक जांच और मंजूरियों के अधीन होगी। प्रस्तावित संयुक्त कार्य समूह परियोजना के विकास और दोनों पक्षों के बीच समन्वय की निगरानी करेगा।

परियोजना के तहत राष्ट्रीय पोत निर्माण एवं भारी उद्योग पार्क, तमिलनाडु लिमिटेड (एनएसएचआईपी-टीएन) उपयुक्त तटीय भूमि उपलब्ध कराने, बुनियादी ढांचे और अन्य सुविधाओं के विकास तथा संबंधित सरकारी मंजूरियों के लिए समन्वय करेगा। स्थल का आकलन, बुनियादी ढांचे की योजना और ड्रेजिंग तथा भूमि पुनर्भरण से जुड़े शुरुआती अध्ययन भी आगे बढ़ाए जाएंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

Livevns.news Desk
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