भारत–यूरोपीय संघ एफटीए पर सफल वार्ता, भारतीय कपड़ा निर्यात को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

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नई दिल्ली, 27 जनवरी (हि.स.)। विश्व की दूसरी और चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच बाजार एकीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत और यूरोपीय संघ ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर वार्ता सफलतापूर्वक संपन्न की है। यह समझौता दोनों देशों के बाजारों को एक-दूसरे के लिए खोल देगा। इससे कारोबारियों को फायदा होगा तथा वैश्विक स्तर पर भारत की पकड़ और मजबूत होगी।

कपड़ा मंत्रालय की मंगलवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार, इस समझौते को भारत की सबसे रणनीतिक आर्थिक उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है। अमेरिका के बाद यूरोपीय संघ भारतीय कपड़ा और परिधान निर्यात का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। इस संधि के बाद अब दुनिया की चौथी (भारत) और दूसरी (यूरोपीय संघ) सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार के नए द्वार खुलेंगे।

​इस समझौते की सबसे बड़ी उपलब्धि कपड़ा और परिधानों पर टैरिफ में 12 प्रतिशत तक की कटौती और सभी श्रेणियों में शून्य शुल्क का प्रावधान है। इससे यूरोपीय संघ का लगभग 22.9 लाख करोड़ रुपये (263.5 अरब डॉलर) का विशाल आयात बाजार भारतीय निर्यातकों के लिए खुल जाएगा।

भारत अब बांग्लादेश, पाकिस्तान और तुर्की जैसे अपने प्रतिद्वंद्वी देशों के समान पायदान पर आ जाएगा, जिन्हें अब तक टैरिफ लाभ मिल रहा था।

​भारतीय कपड़ा क्षेत्र लगभग 4.5 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार देता है। समझौते से उत्पादन और क्षमता में वृद्धि होगी, जिससे विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) में रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे। यह समझौता न केवल व्यापार, बल्कि निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और 'ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग' को भी बढ़ावा देगा।

​भारत के 342 जिलों से होने वाला निर्यात अब और अधिक मजबूत होगा। देश के प्रमुख क्लस्टरों को इससे सीधा लाभ मिलेगा। इसमें तिरुप्पुर, बेंगलुरु और गुरुग्राम-फरीदाबाद में रेडीमेड कपड़ों का उत्पादन होता है। करूर, पानीपत और अहमदाबाद से सूती वस्त्र और घरेलू साज-सज्जा का उत्पादन जुड़ा है। मुरादाबाद, जयपुर, भदोही और वाराणसी ​हस्तशिल्प व कालीन जबकि भागलपुर, बेंगलुरु और कोलकाता सिल्क व जूट से जुड़ा हुआ है।

​कपड़ा क्षेत्र के साथ-साथ लकड़ी, बांस और हस्तशिल्प फर्नीचर पर शुल्क में 10.5 प्रतिशत तक की कमी की गई है। इससे उच्च-मूल्य वाले डिजाइन-आधारित क्षेत्रों में भारतीय कारीगरों की पहुंच वैश्विक स्तर पर बढ़ेगी।

​विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप, यह एफटीए भारत को एक भरोसेमंद और भविष्य के लिए तैयार वैश्विक टेक्सटाइल हब के रूप में स्थापित करेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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