चीन काे सोचना चाहिए कि आतंकवादियाें की मदद करने से उसकी कितनी इज्ज़त बढ़ी: भारत

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नई दिल्ली, 12 मई (हि.स.)। भारत ने चीन द्वारा ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान पाकिस्तान को सहायता दिये जाने की स्वीकारोक्ति पर आज अफसोस जाहिर किया और कहा कि उसे सोचना चाहिए कि आतंकवादी ढांचे को बचाने के प्रयासों में मदद करने से उसकी वैश्विक साख एवं प्रतिष्ठा पर क्या प्रभाव पड़ा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यहां नियमित ब्रीफिंग में चीन की स्वीकारोक्ति के बारे में एक सवाल के जवाब में कहा कि चीन ने उन्हीं बातों की पुष्टि की है जो भारत को पहले से पता हैं। जायसवाल ने कहा, हमने इन रिपोर्टों को देखा है और यह उन्हीं तथ्यों की पुष्टि करती हैं जिनके बारे में हमें पहले से ही पता था।

प्रवक्ता ने कहा, ऑपरेशन सिंदूर पहलगाम में हुए आतंकी हमले का एक सटीक, लक्षित और नपा-तुला जवाब था। इसका उद्देश्य उस आतंकवादी ढांचे को नष्ट करना था, जो न केवल पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित है, बल्कि पाकिस्तान से और उसके इशारे पर चलता है।

अब यह उन राष्ट्रों पर निर्भर है जो स्वयं को ज़िम्मेदार मानते हैं कि वे इस बात पर आत्मचिंतन करें कि क्या आतंकवादी ढांचे को बचाने के प्रयासों का समर्थन करना उनकी प्रतिष्ठा और वैश्विक साख को प्रभावित करता है।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में चीन ने स्वीकार किया है कि उसने भारत के ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान पाकिस्तान को सीधे ताैर पर सहायता प्रदान की थी। चीनी विमानन उद्योग संस्था के इंजीनियरों ने माना कि वे पाकिस्तान में जे-10सीई लड़ाकू विमानों की तकनीकी सहायता के लिए मौजूद थे, जिसका उपयोग पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ किया। चीन ने यह भी स्वीकार किया है कि उसने संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को भारत की सैन्य गतिविधियों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई और चीनी इंजीनियरों ने पाकिस्तान के साथ मिलकर 'दिन-रात' काम करने और चीनी हथियारों की युद्ध क्षमता बढ़ाने में प्रत्यक्ष भूमिका निभाई।

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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन बुधौलिया

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